
शक्ति सिह/कोटा. आज कोटा की पहचान एक कोचिंग सिटी के रूप में होती है लेकिन यह शहर अपने ऐतिहासिक इमारतें महलों के कारण भी प्रसिद्ध रहा है. आज भी 18वीं शताब्दी की कई ऐतिहासिक इमारतें यहां मौजूद है जो कोटा की शान है.इन्ही इमारतों में से एक है लक्खी बुर्ज. इसके नाम की कहानी भी रोचक है. इसको बनवाने में उस समय एक लाख रुपए खर्च हुए थे. इसलिए इसका नाम भी लक्खी बुर्ज रखा गया.
इतिहासकार फिरोज अहमद ने बताया कि 18वीं शताब्दी में बना लक्खी बुर्ज कोटा की पहचान है. इसे कोटा के दीवान जालिम सिंह झाला ने बनवाया था. इसके नाम की कहानी भी रोचक है. इसको बनवाने में उस समय एक लाख रुपए खर्च हुए थे. इसलिए इसका नाम भी लक्खी बुर्ज पड़ गया. यह बुर्ज सुरक्षा की दृष्टि से इतना मजबूत था कि इस पर तोपों का भी असर नहीं होता था. बुर्ज अद्भुत जगह है यह जमीन से लगभग 100 फीट की ऊंचाई पर स्थित एक ओपन-एयर गार्डन है. और आसपास के किशोर सागर तालाब का शानदार दृश्य प्रस्तुत करता है. किशोर सागर तालाब के किनारे सूर्यास्त और सूर्योदय के मनोरम दृश्यों का आनंद लेने के लिए इस जगह का उपयोग किया जाता है.
हाड़ा शासकों का अंतिम विश्राम स्थल है क्षार बाग
नेचर प्रमोटर एएच जैदी बताया कि लक्खी बुर्ज से सटा क्षार बाग हाड़ा शासकों का अंतिम विश्राम स्थल है. यहां 17वीं से 20वीं शताब्दी तक के शासकों की स्मृति के रूप में छतरियां और चबूतरे बने हैं. ये छतरियां रियासतकालीन स्थापत्य का सुंदर नमूना है. कोटा रियासत के दिवंगत राजाओं की याद में बनी छतरियां. ऐसी छतरी जिसका वर्णन बहुत कम लोगो को मालूम है. इस छतरी की विशेषता है कि इसमें 136 खंबे है. हाडौती में इतने खंबे वाली छतरी कहीं नही है.बून्दी की चौरासी खंबे की छतरी प्रसिद्द है . बून्दी की चौरासी खंबे की छतरी भी दो मंजिला है क्षार बाग की छतरी भी दो मंजिला है.
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FIRST PUBLISHED : May 06, 2023, 17:25 IST








