क्या अब मासूम बलात्कार पीड़िता की आवाज़ उठाना गुनाह हो गया है? – चन्द्रशेखर

कौशाम्बी

उत्तर प्रदेश के जनपद कौशाम्बी के थाना सैनी क्षेत्र में कथा आयोजन के दौरान,आयोजक परिवार के युवक द्वारा बहुजन-पाल समाज की मात्र 8 वर्ष की मासूम बच्ची को बहला-फुसलाकर एकांत स्थान पर ले जाकर और उसके साथ अश्लील हरकत व बलात्कार किया गया। अत्यंत पीड़ादायक ,शर्मनाक और दंडनीय।

जब पीड़ित परिवार ने इस घटना की शिकायत आरोपी के परिवार से की, तो उन्हें गालियाँ देकर अपमानित करते हुए भगा दिया गया।

इसके बाद,गाँव के प्रधान जो खुद पाल समाज से है उनके प्रयास से मुकदमा दर्ज हुआ और पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।

लेकिन बेटे की गिरफ़्तारी और सामाजिक बदनामी के डर से आरोपी के पिता ने ज़हर खाकर खा लिया , जिससे उनकी मृत्यु हो गई।

इस आत्महत्या के बाद, आरोपी के सजातीय संगठनों ने शव के साथ हाईवे पर जाम लगाया।

इस पर आरोपी के पिता ने, बेटे के जेल जाने और सामाजिक बदनामी के डर से जहर पी लिया और बाद में उनकी मृत्यु हो गई। उनकी मृत्यु के बाद आरोपी के जातीय संगठनों ने शव के साथ हाईवे जाम किया।

सबसे शर्मनाक और चिंताजनक यह रहा कि 7 जून की रात 9:30 बजे उपमुख्यमंत्री Brajesh Pathak जी द्वारा ट्वीट कर दिए गए निर्देशों के दबाव में कौशाम्बी पुलिस ने बलात्कार पीड़िता के परिजनों पर ही आत्महत्या के लिए उकसाने की धाराओं में केस दर्ज कर उन्हें जेल भेज दिया।

यहाँ तक कि पीड़िता को न्याय दिलाने वाले प्रधान के खिलाफ ₹25,000 का इनाम घोषित कर दिया गया है!

मैं मुख्यमंत्री MYogiAdityanath जी से पूछना चाहता हूँ :

क्या अब मासूम बलात्कार पीड़िता की आवाज़ उठाना गुनाह हो गया है?

क्या न्याय माँगने वालों को ही अपराधी बना देना ही ” राम राज्य” है?

Government of UP से हमारी मांगे हैं

1. पीड़िता और उसके परिजनों पर दर्ज सभी झूठे मुकदमे अविलंब वापस लिए जाएं।

2. ग्राम प्रधान पर घोषित इनाम और दर्ज आरोपों को तुरंत रद्द किया जाए।

3. आरोपी के पिता की आत्महत्या की स्वतंत्र, निष्पक्ष और न्यायिक जांच कराई जाए।

4. पुलिस द्वारा जातीय दबाव में की गई कार्रवाई की जांच कर दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए।

5. पीड़िता को उचित सुरक्षा, मानसिक परामर्श, मुआवज़ा और सम्मानजनक न्याय सुनिश्चित किया जाए।

यदि इस देश में न्याय की माँग करने वालों को ही अपराधी बना दिया जाएगा, तो यह लोकतंत्र नहीं, अपमान और संविधान का उल्लंघन होगा।

Up Head Line
Author: Up Head Line

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