शिया समुदाय की तरफ से मंगलवार को हजरत अली डे मनाया गया। इस दौरान मुसलमानों के आखिरी नबी मोहम्मद साहब के दामाद इमाम हजरत अली का जन्मदिन मनौरी गांव में केक काटकर मनाया गया। इस दौरान घरों में अच्छे पकवान पकाकर नए कपड़े पहनकर बच्चों और बड़ों ने जश्न मनाया।
मनौरी गांव स्थित पंचायती बड़ा इमामबाड़ा कलां के सदर आफताब हैदर ने बताया कि शियों के पहले इमाम इमामुल मुत्तकीन अमीरूल मोमनीन शेरे खुदा हाजत रवां हजरत अली का जन्म आज के दिन मुसलमानों के पवित्र स्थल खाना ए काबा मक्का में हुआ था। आपके सबसे प्रिय बेटे इमाम हुसैन जो कि कर्बला में शहीद हुए थे। आपकी शहादत भी नजफ (इराक) की मस्जिद ए कूफा में 21 रमजान को हुई थी। आपकी शादी हजरत मोहम्मद मुस्तफा की इकलौती बेटी फातमा जहरा के साथ हुई थी। आपको इतिहास में दुनिया का सबसे ताकतवर इंसान माना जाता है। अली डे के मौके पर लोगों ने अपने-अपने घरों में मौला अली की नजर दिलाई और केक काटकर उनका जन्म दिन मनाया। इसके बाद शब्बर अली के मकान में महफिल का आयोजन किया गया। महफिल में मजहर हसन, अजहर हसन, अतहर हसन और जुल्फेकार हैदर आदि ने कसीदे पढ़े। महफिल में नारा ए तकबीर अल्लाहो अकबर, नारा ए रेसालत या रसूल अल्लाह और नारा ऐ हैदरी या अली से फिजा गूंज उठी। शब्बर अली ने तकरीर करते हुए बताया कि हजरत अली शिया मुस्लिम समुदाय के पहले इमाम थे। हजरत अली ने लोगों को दुश्मनों से भी प्रेम करने की सलाह दी थी। उनका मनाना था जो आज तुम्हारा दुश्मन है वह एक न एक दिन तुम्हारा दोस्त जरूर बन जाएगा, इसलिए किसी से भी भेदभाव और मनमुटाव नहीं रखना चाहिए। उन्होंने हजरत अली के पांच खास संदेश बताते हुए कहा कि व्यक्ति को हमेशा सोच समझकर बोलना चाहिए, बोलने से पहले शब्द आपके गुलाम होते हैं। लेकिन, बोलने के बाद आप लफ्जों के गुलाम बन जाते हैं। हजरत अली भीख मांगने के सख्त खिलाफ थे। उनका मनाना था कि भीख मांगने से बदतर कोई और चीज नहीं होती। उन्होंने ने आगे बताया कि अपनी सोच को पानी की बूंदों से भी ज्यादा साफ रखो, क्योंकि जिस तरह बूंदों से दरिया बनता है उसी तरह सोच से ईमान बनता है।
———————–
मुस्तफाबाद में भी अली डे पर सजी महफिल
सरायअकिल के मुस्तफाबाद गांव में हजरत अली की विलादत के मौके पर हेना नक्वी के मकान में महफिल का आयोजन किया गया। हजरत अली के जन्मदिन पर कसीदे की शुरुआत तेलावते कलाम पाक से किया गया। जिसको मोहतरमा दिलबरी साहिबा ने अंजाम दिया। उसके बाद तमाम महिलाओं ने हजरत अली की शान में कसीदे पढ़े। डेजी नक्वी, तमन्ना नक्वी, जहरा नक्वी, आफरीन जहरा, तनवीर जहरा, माही नक्वी, शबाना नक्वी, हेमा रिजवी, नाज फातिमा, आरजू फातिमा, रशमी अलकमा, जकिया फातिमा, आएजा कुलसूम और मनतशा इन्नमा आदि महिलाओं ने कसीदे पढ़े। इस मौके पर महिलाओं ने एक-दूसरे को हजरत अली के जन्मदिन की बधाई दी।







