असरावे कलां गांव में मरहूम के चेहल्लुम की मजलिस में अश्कबार हुईं आंखें
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SHABBAR ALI/7007720588
असरावे कलां गांव में रविवार को इमामबारगाह मीर अली बख्श में मरहूम अमीर रजा के चेहल्लुम की मजलिस का आयोजन किया गया। मजलिस को मौलाना सैयद जमीर हैदर रिजवी ने खिताब किया। मजलिस में मौजूद लोगों ने मरहूम के बेटे को उनके बाप का पुरसा दिया।
मजलिस की शुरुआत सोजख्वानी से की गई। सोजख्वानी सैयद नसीम हसन बिसौनवी ने पढ़ी। इसके बाद अयाज अब्बास आदि शायरों ने ताजियाती नज्म पेश की। इमाम ए जुमा करारी मौलाना सैयद जमीर हैदर रिजवी ने मजलिस को खिताब करते हुए फरमाया कि कुरान व हदीस में वालिदैन के साथ हुस्ने सुलूक करने की खुसूसी ताकीद की गई है। अल्लाह तआला ने बहुत सी जगहों पर अपनी तौहीद व इबादत का हुकुम देने के साथ वालिदैन के साथ अच्छा बरताव करने का हुक्म दिया है। जिससे मां-बाप की इताअत, उनकी खिदमत और उनके अदब व एहतेराम की अहमियत वाजेह हो जाती है। अल्लाह तआला हम सबको मां-बाप के साथ अच्छा बरताव करने वाला बनाए, उनकी फरमांबरदारी करने वाला बनाए और उनके हुकूक की अदाएगी करने वाला बनाए। मजलिस में करबला के मसायब सुनकर मौजूद अजादार जारो-कतार रोने लगे। मजलिस के बाद मौजूद लोगों ने मरहूम के बेटे को उनके बाप का पुरसा दिया।






