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मनौरी रेलवे ओवरब्रिज की लेयर उखड़ने से कई जगह पर बड़े-बड़े गड्ढे भी हो गए हैं। अनहोनी की आशंका से लोग दहशतजदा हैं। स्थानीय नागरिक निर्माण में घटिया सामग्रियों के इस्तेमाल का इल्जाम लगा रहे हैं। इसके पहले भी कई बार पैचिंग की जा चुकी है। पर, घटिया सामग्रियों के इस्तेमाल से फिर बड़े-बड़े गड्ढे हो गए हैं। उधर, संबंधित विभाग के अफसर इस पूरे प्रकरण से बेखबर हैं।
मनौरी में रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण 32 करोड़ 27 लाख 31 हजार की लागत से हुआ था। निर्माण कार्य अप्रैल 2016 में आरम्भ हुआ था। नवम्बर 2018 में यह ब्रिज बनकर तैयार हो गया और इसपर आवागमन भी शुरू हो गया। पुल के ऊपर डामर बिछाने का काम उत्तर प्रदेश राज्य सेतु निगम ने किया था। राज्य सेतु निगम के तत्कालीन अवर अभियंता सुशील वर्मा के अनुसार पुल पर 85 एमएम डामर मिक्स गिट्टी की परत डाली गई थी। पूरा काम रेलवे पुल निर्माण विशेष मालभाड़ा परियोजना के उप प्रबंधक डीके सिंह की देखरेख में हुआ था। छह साल के भीतर ही इस पुल की हालत खस्ता हो गई है। इसमें कई जगह दरार आ गई है। बड़े-बड़े गढ्ढे भी हो गए हैं। भारी वाहनों के गुजरने पर स्थानीय लोगों की सांसें थम जाती हैं। उन्हें हर पल अनहोनी की आशंका रहती है। इसके पहले भी पैचिंग किया गया था। इलाके के लोगों का कहना है कि निर्माण के समय ही घटिया सामग्रियों के उपयोग की शिकायत की गई थी। तत्कालीन जिलाधिकारी ने कार्रवाई का भरोसा भी दिलाया था लेकिन, किया किसी ने कुछ नहीं। तिल्हापुर मोड़ से पूरामुफ्ती जाने के लिए इस ओवर ब्रिज पर रोजाना हजारों की संख्या में वाहनों का आवागमन होता है। लेकिन, जर्जर हाल रेलवे ओवरब्रिज लोगों की परेशानियों का सबब बना हुआ हैं।






