चित्रकूट-
आर्थिक सामाजिक व राजनीतिक न्याय हेतु जातिगत जनगणना सरकार तत्काल कराए- अमित
भाकपा ने 5सितम्बर को न्याय दिवस के रुप में मनाया और धरना प्रदर्शन कर सौंपा ज्ञापन
चित्रकूट: 5 सितम्बर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय आवाहन पर जिला इकाई के सैकड़ों कार्यकर्ताओं व पदाधिकारियों ने का. अमित यादव एड जिला सचिव के नेतृत्व में कचेहरी कर्वी से नारेबाजी करते हुए तहसील मुख्यालय पहुंच कर धरना देकर प्रदर्शन किया व का. बल्देव विश्वकर्मा की अध्यक्षता में सभा किए। सभा को संबोधित करते हुए का अमित यादव ने कहा कि देश की जनगणना 2011 में संपन्न हुई थी । जनगणना को 10 वर्ष के बाद 2021 में संपन्न होना चाहिए था परंतु कोरोना के कारण ऐसा नहीं हो सका। लेकिन कोरोना के बीत् जाने के बाद भी 2024 का भी आधा वर्ष गुजरने के बाद भी सरकार की तरफ से राष्ट्रीय जनगणना की कोई कार्यवाही दिखाई नहीं दे रही है। भारतीय जनता पार्टी शायद डरती है ।भारतीय जनता पार्टी सबका साथ सबका विकास का खोखला नारा देती रहती है । सदियों सदियों से हमारे देश की बनावट ऐसी है कि उसके सामाजिक जीवन में असमानता मौजूद है ।

भारत ही एकमात्र देश है जिस देश में अमीर गरीब का अंतर तो है ही साथ ही साथ व्यक्ति की पैदाइश से उसकी जाति से उसका भविष्य तय होता है तथा ऊंच नीच का कारोबार चलता है ।भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ऊंच-नीच के सामाजिक विकार की और गैर वास्तविकता की घोर विरोधी है।सरकारों का फर्ज है कि जो सामाजिक अन्याय से पीड़ित रहे हैं उनको सामाजिक न्याय मिले। सामाजिक न्याय तभी मिल सकता है जब देश के 140 करोड लोगों की वैज्ञानिक सांख्यिकी के आंकड़े हमारे पास मौजूद हो और समाज को पता हो कि किस जाति के कितने लोग हैं और कितने लोग पिछड़े है या कितने लोगों को पिछड़ा रखने के लिए अन्यायपूर्ण सामाजिक व्यवस्था ने मजबूर किया है । संविधान निर्माताओं ने इस व्यवस्था को 1950 में प्रारंभ कर दिया था अब इसको और आगे ले चलने की आवश्यकता है।
इसलिए भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी मांग करती है कि पांच सितंबर शिक्षक दिवस है और यह शिक्षक दिवस हम “न्याय दिवस” के रूप में मना रहे हैं। इस नारे का अभिप्राय है कि देश के नागरिकों को ,जो पिछड़े हैं, को सामाजिक न्याय प्राप्त हो। सामाजिक न्याय मिलेगा तो गरीबी और अमीरी की भी असमानता दूर होगी। हमारे प्रदेश के किसान, मजदूर, दलित, पिछड़े,छात्र,युवा, महिलाएं व गरीब वर्ग के लोग पूरी तरह से सामाजिक, आर्थिक, शैक्षिक, रूप से निचले पायदान पर खडे होने को मजबूर हैं ।श्रमिक समाज के 88% पिछड़े दलित ही मूल रूप से किसान, मजदूर हैं जो वास्तविक गणना न होने से अपने अधिकार से वंचित हैं।
इन्ही के लडके बेरोजगारी व शिक्षा के अभाव में दूर दूर भटकने को मजबूर हैं ।

निजी शिक्षा व चिकित्सा लूट के अड्डे बन गए हैं ।
का. चंद्रपाल ने कहा कि राज्य एवं केन्द्र के अनेकों विभाग भष्टाचार मे सराबोर है । वहीं दूसरी ओर बजट का बन्दरबांट जारी है । अधिकतर निर्माण कागजी व गुणवत्ता विहीन है ।आर्थिक तंगी के चलते आये दिन किसान, मजदूर , महिलाएं आत्महत्या को मजबूर है ।
ग्रामपंचायत, जिलापंचायत ,नगर निगम,नगरपंचायतो के बजट को मिलजुल कर डकारा जा रहा है ।
तंत्र का बड़ा हिस्सा लूट और बेईमानी के मायाजाल मे मस्त है ।
सभा को का. कमलेश,संदीप कुमार पाण्डेय, हनुमान,शंकरमणि(भागीदारी आंदोलन) ने संबोधित किया। धरना का समर्थन भागीदारी पार्टी ( पी ) के नेता अच्छेलाल प्रजापति व लक्ष्मी प्रसाद ने किया। सभा के दौरान रामसनेही निषाद ने अपने मीठे स्वरों से कम्युनिस्ट संघर्ष की व्याख्या कर वाहवाही बटोरी।
धरना प्रदर्शन व ज्ञापन में प्रमुख रूप से कमलाकांत ,भूषण, बुद्धविलाश, प्रद्युम्न कुमार, शिवबरन ,राजा, रामचन्द्र, देवनाथ,कमलेश सिंह, रामस्वरूप,राम विजय,रवि, राममिलन सहित सैकड़ों लोग मौजूद थे
जिला पार्टी ने 13 सूत्री निम्नलिखित मांगों का प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी कर्वी को सौंपा –
जातीय जन गणना तत्काल कराई जाए।,संबिदा,आउटसोर्सिंग, कर्मचारियों को नियमित कर्मचारी घोषित किया जाए। किसानों के समस्त कर्जे माफ किए जायें एवं एम एस पी की गारन्टी दी जाए।
मनरेगा को युध्दस्तर पर चलाया जाय। 500रू दैनिक मजदूरी व 300 दिनो के काम की गारन्टी दी जाए।
निजी शिक्षा, चिकित्सा सेवा में हो रही लूट रोकी जाय ।
विधायकनिधियों के कामों की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच कराई जाय । नजूल भूमि अधिग्रहण 2024 को रोका जाय। ग्रामीण स्तर में अठारह घंटे बिजली दी जाय। आवारा पशुओं से फसलें बचाई जायें । जिले व गांवों की सड़को को गड्ढा मुक्त कराया जाए।






