ऑनलाइन हाजिरी को लेकर हजारों शिक्षको ने रायबरेली के जिलाधिकारी कार्यालय का घेराव कर जताया विरोध
रायबरेली
ऑनलाइन हाजिरी आदेश को लेकर पूरे उत्तर प्रदेश में लगातार विरोध प्रदर्शन जारी है वही रायबरेली में राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह की अगुवाई में हजारों की संख्या शिक्षकों ने रायबेरली जिलाधकरी कार्यालय का घेराव कर ज्ञापन सौपा,,,
शिक्षक वीरेंद्र सिंह का कहना है कि बेसिक स्कूलों में बच्चों की संख्या लगातार कम होने, अध्यापकों के देरी से जैसे विभिन्न आरोप लगाकर शासन-प्रशासन और सत्ता में बैठे हुए लोगों को लगता है कि बेसिक शिक्षा विभाग के अध्यापक अपने काम के प्रति लापरवाह हैं और समय की चोरी करते हैं | इसलिए सरकार शिक्षकों पर लगातार दबाव बढ़ा रही है |जबकि वास्तिकता ये है कि किसी भी अन्य विभाग के कार्यालय प्रायः शहरों और कस्बों में होते होते हैं जहाँ उनके कर्मचारियों के लिये वाहन और सारे भौतिक संसाधन उपलब्ध होते हैं | बेसिक शिक्षा विभाग के ज्यादातर विद्यालय सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों में होते हैं जहाँ शिक्षकों को वाहन तथा अन्य सुविधाएं सार्वजनिक न होकर व्यक्तिगत जुटानी होती हैं दोपहिया वाहन सर्दी गर्मी बरसात किसी भी मौसम की उसकी चरम तीब्रता की स्थिति में फिट नहीं बैठते, वाहनों की खराबी की स्थिति में दूर दूर तक मैकेनिक नहीं मिलता |शिक्षकों को हाफ डे लीव की व्यवस्था नहीं जिस कारण परिजनों व प्रियजनों की अस्वस्थता व आकस्मिक दुर्घटना की स्थिति में विद्यालय में उपस्थिति के बावजूद अंतिम उपस्थिति दर्ज कराये बिना निकलना पड़े तो भी उसे अनुपस्थित माना जायेगा |शिक्षकों को समर वेकेशन और विंटर वेकेशन जैसे मौसम आधारित निश्चित अवकाश जबकि मात्र 14 आकस्मिक अवकाश दिए जाते हैं जो किसी भी कार्य प्रयोजन और पारिवारिक देखभाल के लिये अपर्याप्त हैं जबकि अन्य कर्मचारियों को 30-45 अर्जित अवकाश दिए जाते हैं |ऐसे में प्रतिकूल परिस्थितियों में सुदूर क्षेत्रों में सार्वजनिक वाहन और सुविधाओं के बिना निजी साधनों से पहुंचना तथा अन्य कारणों के चलते शिक्षकों की मामूली देरी उसकी अनधिकृत अनुपस्थिति में बदलकर उससे स्पष्टीकरण के बहाने उच्चधिकारियों द्वारा उसका शोषण किया जायेगा, विजिलेंस और एंटीकरप्शन टीम द्वारा प्रायः बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारियों के विरुद्ध भ्रष्टाचार के दर्ज मामले इसका प्रमाण हैं |

बेसिक स्कूलों में गिरती छात्र संख्या के लिये भी शिक्षक नहीं बल्कि कुकरमुत्तों की तरह लगभग हर गांव में फैल रहे गैर मान्यता प्राप्त स्कूल तथा सुदूर क्षेत्रों के स्कूलों से सम्बद्ध क्षेत्रीय स्कूल जिम्मेदार हैं |बेसिक स्कूलों में भौतिक सुविधाओं का अभाव,सरकार का परिवार नियोजन कार्यक्रम,निपुण होने पर छात्रों का अन्य प्राइवेट स्कूलों में स्थानांतरण, मजदूरी के लिये ग्रामीणों का परिवार सहित पलायन और किसान के बच्चों की स्कूल के बजाय खेतों में मजदूरी करना जैसे कारण जिम्मेदार हैं न कि शिक्षक |शिक्षकों की डिजिटल उपस्थिति के बजाय बेसिक शिक्षा, बेसिक शिक्षक और ग्राम समाज को सुविधाओं व साधन संपन्न बनाने पर सरकार का ध्यान अवश्य होना चाहिए |






