Lake that changes colours: दुनिया में जहां भी चले जाइए प्रकृति का अलग ही नजारा देखने को मिलता है. वहीं, भारत के अलग-अलग क्षेत्रों में प्रकृति के सारे रंग देखने को मिल जाते हैं. राजस्थान की तपती रेत, हिमालय के ठंडे पहाड़, मध्य प्रदेश की झीलें, दक्षिण के जंगल यानी एक ही देश में प्रकृति के सारे रंग सिमटे हुए हैं. वहीं, भारत में एक झील ऐसी भी है, जो दिन में कई रंग बदलती है. बता दें कि ये झील झीलों के शहर भोपाल में नहीं है. यह झील ट्रेकिंग और कैंपिंग की रुचि रखने वाले साहसी पर्यटकों के बीच काफी प्रसिद्ध है.
रंग बदलने वाली ये हिमाचल प्रदेश में है. बता दें कि ये झील एक दिन में तीन बार रंग बदलती है. चंद्रताल नाम की इस झील को देखने के लिए हर साल हजारों देशी-विदेशी सैलानी हिमाचल पहुंचते हैं. इसे ‘द मून लेक’ भी कहा जाता है. झील समुद्रतल से 14,100 फीट की उंचाई पर है. मून लेक या चंद्रताल झील नाम इसके आधे चांद जैसे आकार के कारण पड़ा है. इस झील का पानी एकदम साफ और निर्मल है. ये झील एक टापू पर बनी है.
महाभारत से भी है चंद्र ताल का संबंध
चंद्रताल का संबंध महाभारत से भी बताया जाता है. कहा जाता है कि इसी ताल के पास पांडवों में सबसे बड़े युधिष्ठिर ने गुस्से में आकर इंद्र देव का रथ अपने हाथों में उठा लिया था. इसके बाद लंबे समय तक चंद्रताल की पूजा-पाठ भी की जाती रही. हालांकि, अब यहां लोग पूजा पाठ तो नहीं करते, लेकिन रंग-बिरंगी झंडियां जरूर लगाते हैं. झील का व्यास लगभग 2.5 किलोमीटर है और इसके चारों तरफ विशाल मैदान हैं. ये मैदान वसंत और गरमी के मौसम में कई वनस्पति व जंगली फूलों से भर जाता है. झील के बीचों बीच एक टापू भी है, जिसे समुद्र टापू कहा जाता है.
झील के आसपास का मैदान वसंत और गरमी के मौसम में कई वनस्पति व जंगली फूलों से भर जाता है. (Wikipedia)
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झील की वजह से फला-फूला सिल्क रूट
कहा जाता है कि पूरी दुनिया में सिल्क रूट इसी झील के कारण फला-फूला था. झील का ये क्षेत्र कभी स्पीति और कुल्लू जाने वाले तिब्बत व लद्दाखी व्यापारियों के लिए अहम पड़ाव था. झील हिमाचल प्रदेश की लाहौल व स्पीति घाटियों की सीमा पर कुंजम पास के नजदीक है. इसी झील से चंद्र नदी का उद्गम भी होता है. आगे जाकर ये नदी भागा नदी से मिलकर चंद्रभागा और जम्मू-कश्मीर में जाकर चेनाब कहलाने लगती है. कॉपेन जलवायु वर्गीकरण मानकों के मुताबिक, बहुत ज्यादा ठंडी जलवायु वाली यह जगह रामसर आर्द्रभूमि के रूप में वर्गीकृत है.
कैसे पहुंचा जा सकता है चंद्र ताल तक
चंद्रताल में पानी के आने का कोई स्रोत दिखाई नहीं देता है, जबकि निकलने का रास्ता स्पष्ट है. अनुमान लगाया जाता है कि पानी का स्रोत झील में धरती के नीचे से ही है. चंद्र ताल से करीब 30 किमी की दूरी पर सूरज ताल है. चंद्रताल से चंद्र नदी और सूरज ताल से भागा नदी का उद्गम होता है. चंद ताल जाने का सही समय मई के आखिर से अक्टूबर की शुरुआत तक है. इसका सबसे नजदीकी एयरपोर्ट मनाली है. मनाली से आगे रोहतांग पास से होते हुए 7 से 8 घंटे का सफर कर चंद्र ताल पहुंचा जा सकता है. दूसरा रास्ता कुंजम पास है, जो पैदल रास्ता है.
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झील से चंद्र नदी का उद्गम होता है,जो आगे जम्मू-कश्मीर में जाकर चेनाब कहलाने लगती है.
हिम तेंदुआ समेत कई प्रजातियों का है घर
चंद्र ताल हिम तेंदुआ, स्नोकॉक, चुकोर, ब्लैक रिंग स्टिल्ट, केस्ट्रेल, गोल्डन ईगल, चॉफ, रेड फॉक्स, हिमालयन आइबेक्स और ब्लू शीप जैसी कुछ प्रजातियों का घर है. समय के साथ इन प्रजातियों ने शारीरिक क्षमताओं को विकसित कर ठंडी शुष्क जलवायु और ऑक्सीजन की कमी के लिए खुद को ढाल लिया है. रूडी शेल्डक जैसी प्रवासी प्रजातियां यहां गर्मियों में पाई जाती हैं.
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FIRST PUBLISHED : June 25, 2023, 18:52 IST






