हाइलाइट्स
डब्बा ट्रेडिंग इनवेस्टमेंट का गैरकानूनी तरीका है.
डब्बा ट्रेडिंग में शामिल होने पर 10 साल तक की सज़ा हो सकती है.
SEBI के दायरे में नहीं आने के चलते पैसों का बड़ा नुकसान हो सकता है.
नई दिल्ली. बीते कुछ सालों में लोगों में शेयर मार्केट को लेकर जागरूकता बढ़ी है. लोग सेविंग्स और थोड़ी एक्स्ट्रा इनकम के लिए शेयर मार्केट में पैसे इनवेस्ट करने लगे हैं. अलग-अलग तरह की ट्रेडिंग को समझ रहे हैं, अपने लिए ट्रेडिंग का बेहतर ऑप्शन चुन रहे हैं. इन सबके बीच डब्बा ट्रेडिंग भी खूब फल-फूल रहा है. अगर ये डब्बा ट्रेडिंग शब्द आपको इंटरेस्टिंग लग रहा है और अगर आप इसमें हाथ आजमाने का मन बना रहे हैं, तो रुक जाइए, क्योंकि डब्बा ट्रेडिंग में हाथ आजमाने का मतलब देश की ब्लैक इकॉनमी में अपना योगदान देना है.
पर ये डब्बा ट्रेडिंग है क्या और ये काम कैसे करता है? क्या डब्बा ट्रेडिंग का कोई रिस्क भी है और अगर नहीं तो इसमें गलत क्या है?
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क्या है डब्बा ट्रेडिंग?
आसान भाषा में कहें तो डब्बा ट्रेडिंग एक तरह का सट्टा है, जो शेयर मार्केट के उतार-चढ़ाव के आधार पर चलता तो है पर शेयर मार्केट से इसका सीधा कोई कनेक्शन नहीं है. जैसे स्टॉक ब्रोकर होते हैं, वैसे ही होता है डब्बा ब्रोकर. जैसे स्टॉक मार्केट में लोग शेयर्स पर पैसे लगाते हैं, वैसे ही डब्बा ट्रेडिंग में भी पैसे लगाए जाते हैं. अंतर ये है कि इसमें सबकुछ शेयर मार्केट के बाहर होता है. मतलब न डीमैट अकाउंट लगता है और न ही शेयर पर पैसे लगाने पर शेयर का पॉजेशन मिलता है.
डब्बा ट्रेडिंग होती कैसे है?
स्टॉक ब्रोकर्स की तरह ही डब्बा ब्रोकर्स होते हैं. रोज़ मार्केट खुलने के बाद लोग अपनी पसंद के शेयर्स पर पैसे लगाते हैं. मार्केट बंद होने पर शेयर के कीमत के हिसाब से उन्हें प्रॉफिट या नुकसान होता है. मान लीजिए कि जब मार्केट खुला तो XYZ स्टॉक के भाव 100 रुपये थे और मार्केट बंद होते वक्त भाव 120 हो गए, तो जिन लोगों ने XYZ पर पैसे लगाए थे उन्हें डब्बा ट्रेडर 120 के भाव में पैसे देगा. इसी तरह अगर मार्केट बंद होने के समय स्टॉक की कीमत 80 रुपये रह जाती है तो 20 रुपये अपने पास रखकर डब्बा ट्रेडर 80 रुपये लोगों को देगा.
शेयर मार्कट में SEBI से रजिस्टर्ड स्टॉक ब्रोकर के जरिए पैसे लगाना ही सेफ ऑप्शन है.
इसी तरह कई शेयर्स पर पैसे लगाए जाते हैं. डब्बा ट्रेडर नुकसान उठाने वाले इनवेस्टर का पैसा प्रॉफिट कमाने वाले इनवेस्टर को दे देता है और इसमें जितना बचता है वो सब उसकी जेब में जाता है. मतलब ये कि इनवेस्टर के नुकसान में डब्बा ट्रेडर का फायदा होता है.
क्या डब्बा ट्रेडिंग का कोई रिस्क भी है?
एक रेगुलर स्टॉक ब्रोकर पर SEBI की पैनी नजर होती है. शेयर मार्केट में होने वाले हर लेन-देन पर सेबी की कड़ी नज़र होती है. यहां इनवेस्टर्स को मार्केट के उतार-चढ़ाव से भले ही नुकसान हो, पर उनके साथ ठगी होने की संभावना बिल्कुल नहीं होती है. पर डब्बा ब्रोकर के केस में ऐसा नहीं है. कई मामलों में देखा गया है कि डब्बा ब्रोकर शुरुआत में लोगों का भरोसा जीतने के लिए उन्हें उनके प्रॉफिट का शेयर देते हैं, पर कुछ समय के बाद वो लोगों के पैसे लेकर गायब हो जाते हैं. डब्बा ट्रेडिंग SEBI या किसी और रेगुलेटर के दायरे में नहीं आता है, तो ऐसे में अगर डब्बा ब्रोकर पैसे लेकर गायब हो गया तो उसके खिलाफ लीगल ऐक्शन लिया जाना मुश्किल होता है क्योंकि डब्बा ट्रेडिंग में सारा ट्रांजैक्शन कैश में होता है, न लेन-देन का कोई रिकॉर्ड होता है और न ही कोई डॉक्यूमेंटेशन होता है.
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NSE ने दी थी डब्बा ट्रेडिंग को लेकर चेतावनी
इस साल अप्रैल में NSE यानी नैशनल स्टॉक एक्सचेंज ने डब्बा ट्रेडिंग को लेकर चेतावनी जारी की थी. इनवेस्टर्स को आगाह किया था कि इस तरह की स्कीम्स में पैसा लगाने से बचें, इससे आर्थिक नुकसान हो सकता है. NSE ने ये साफ कहा था कि डब्बा ट्रेडिंग कानूनी तौर पर प्रतिबंधित है.
सिक्योरिटीज़ कॉन्ट्रैक्ट्स (रेगुलेशन) एक्ट 1956 के सेक्शन 23 (1) के तहत डब्बा ट्रेडिंग अपराध है. डब्बा ट्रेडिंग में इनवॉल्व होने पर IPC की धारा 406 (विश्वास का आपराधिक हनन), 420 (धोखाधड़ी) और 120-बी (क्रिमिनल कॉनस्पिरेसी) के तहत केस दर्ज होता है.
दोषी पाए जाने पर इनवेस्टर्स और डब्बा ट्रेडर्स को 10 साल तक की सज़ा या 25 करोड़ रुपये तक का जुर्माना या फिर दोनों की सज़ा सुनाई जा सकती है.
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FIRST PUBLISHED : June 27, 2023, 21:48 IST






