Emergency Fund : मुश्किल हालात के लिए रहें तैयार, आज से ही शुरू करें इमर्जेंसी फंड में निवेश


हाइलाइट्स

आम तौर पर आपके 6 से 9 महीनों के खर्चके लिए फिक्स डिपॉजिट का सुझाव दिया जाता है.
यह बहुत कुछ आपकी नौकरी की सुरक्षा और कारोबार व आय की स्थिरता पर निर्भर है.
आपको अपने इमर्जेंसी फंड का एक महत्वपूर्ण हिस्सा लिक्विड फंड में निवेश करना चाहिए.

नई दिल्‍ली. जिंदगी बहुत सारे उतार-चढ़ाव से भरी होती है और कभी भी कुछ भी हो सकता है. ऐसी कठिन चुनौतियों को आने से रोका नहीं जा सकता है, लेकिन आप खुद को तैयार कर सकते हैं. इसके लिए इमर्जेंसी या आपातकालीन फंड बनाना चाहिए. इमर्जेंसी फ़ंड आपके लिए एक सुरक्षा कवच की तरह है, जो आर्थिक संकट के दौर में आपको बचाने के काम आ सकते हैं. इस फ़ंड का इस्तेमाल आप क़र्ज़ लेने से बचने के लिए कर सकते हैं. आखिरी वक्त में पैसे की कमी की वज़ह से आपका कोई काम नहीं रुके, इसके लिए इमर्जेंसी फ़ंड से पैसे निकाल सकते हैं.

हम सबकी आर्थिक स्थिति अलग होती है. यह हमारी लाइफ़स्टाइल से लेकर, परिवार में मौजूद लोगों की निर्भरता, आय के स्रोत और ज़रूरी खर्चों जैसी बहुत सी वज़हों पर टिकी रहती है. आम तौर पर आपके 6 से 9 महीनों के खर्च को पूरा करने के लिए फिक्स डिपॉजिट या किसी और तरीके से पैसे जमा करने का सुझाव दिया जाता है. यह सलाह तमाम बड़ी वित्तीय संस्थाओं की ओर से दी जाती है. हालांकि, यह अवधि अलग भी हो सकती है, क्योंकि यह बहुत कुछ आपकी नौकरी की सुरक्षा और कारोबार व आय की स्थिरता पर निर्भर है.

कहां लगाएं इस फंड का पैसा
आपको अपने इमर्जेंसी फंड का एक महत्वपूर्ण हिस्सा लिक्विड फंड में निवेश करना चाहिए. यह सलाह तरलता (लिक्विडिटी) या ज़रूरत के मुताबिक पैसे निकालने की सुविधा और कम से कम जोखिम को देखते हुए दी जाती है. ये फ़ंड पारंपरिक बचत खातों की तुलना में ज़्यादा अच्छे रिटर्न देते हैं. ज़रूरत के वक्त इन फंड से आप आसानी से और जल्दी पैसे निकाल भी सकते हैं. इमर्जेंसी फ़ंड एक झटके में तैयार नहीं होते हैं और इन्हें बनने में समय लगता है. आज के दौर में जब रोज़मर्रा के खर्चे इतने बढ़ गए हैं, तब तो ऐसे फंड को तैयार करना और भी चुनौतीपूर्ण है. हालांकि, डेब्ट म्युचुअल फ़ंड एक विकल्प हैं, जिनसे आप इमर्जेंसी फ़ंड को कम समय में तैयार कर सकते हैं. इनमें जोखिम भी कम होता है और यह बेहतर निवेश भी देते हैं. व्यवस्थित निवेश योजना (SIP) शुरू करने और अपनी बचत और निवेश की सही रणनीति अपनाकर आप अपने आर्थिक लक्ष्यों को आसानी से पूरा कर सकते हैं. इसके अलावा, आप चाहें तो हर साल मिलने वाले बोनस या किसी और तरह से होने वाली आय को इन फ़ंड में डाल सकते हैं.

इमर्जेंसी फ़ंड को आप अपनी सुविधा के लिए दो हिस्सों में बांट सकते हैं- लंबे समय के लिए और कम समय के लिए. लंबे समय के लिए फ़ंड का इस्तेमाल किसी बड़ी मुश्किल के वक्त या बीमारी और इलाज के खर्चों के लिए रख सकते हैं. आम तौर पर लॉन्ग टर्म फ़ंड थोड़ा बेहतर निवेश देते हैं और उनमें रकम भी बड़ी होती है, तो वह आपकी मुश्किल के वक्त में लंबे समय तक मदद कर सकते हैं. कम समय के लिए या शॉर्ट टर्म फ़ंड का इस्तेमाल आकस्मिक ज़रूरतों के लिए कर सकते हैं. इन फ़ंड का इस्तेमाल ऐसे वक्त में कर सकते हैं जब आपको पैसों की तत्काल ज़रूरत हो और लॉन्ग टर्म फ़ंड से पैसे नहीं निकाल सकते हों.

इमर्जेंसी फ़ंड के लिए इन बातों का रखें ध्यान
1. इमर्जेंसी फ़ंड के लिए लक्ष्य बनाएं :
अपनी ज़रूरतों और खर्चों का ठीक-ठीक आकलन करें और देखें कि तीन से छह महीने तक खर्च चलाने के लिए आपको कितने पैसों की ज़रूरत होगी. इसे देखते हुए निश्चित रकम जमा करने का लक्ष्य बनाएं.

2. अपने खर्चों पर नज़र रखें : हर महीने होने वाले खर्चों पर एक बार बैठकर सोचें और देखें कि ऐसे कौन से खर्चे हैं जिन्हें खत्म करके या घटाकर आप बचत कर सकते हैं. महीने के खर्चों के लिए बजट बनाएं और इमर्जेंसी फ़ंड के लिए पैसे बचाने को अपनी प्राथमिकता में सबसे ऊपर रखें.

3. बचत के लिए ऑटो-ट्रांसफ़र सेट करें : अपने बचत खाते में निश्चित रकम हर महीने ट्रांसफ़र होती रहे, इसके लिए ऑटोमैटिक ट्रांसफ़र का इस्तेमाल करें. इमर्जेंसी फ़ंड के लिए एक अलग से बचत खाता बनाएं और उसमें यह ऑटो-ट्रांसफ़र की व्यवस्था करें. इससे बिना किसी रुकावट के हर महीने बचत भी होगी और आपको मैन्युअली खाते में पैसे ट्रांसफ़र करने की भी ज़रूरत नहीं होगी.

4. बेकार के खर्चों में कटौती करें : बाहर रेस्टोरेंट में खाना खाने या फ़िल्म देखने जैसे खर्चों में कुछ सीमा तक कटौती की जा सकती है. इन पैसों को आप अपने इमर्जेंसी फ़ंड में डाल सकते हैं.

5. अपनी आय बढ़ाने की कोशिश करें : पैसे बचाने के लिए ज़्यादा पैसे कमाना भी ज़रूरी है. अपनी आय बढ़ाने के मौकों की तलाश करें. यह कोई दूसरी नौकरी हो सकती है या काम के साथ फ़्रीलांसिंग करना भी हो सकता है. इस कमाई को अपने इमर्जेंसी फ़ंड के लिए सुरक्षित करें.

6. अचानक मिले पैसे और बोनस सेव करें : कभी-कभी अचानक ही हमें कुछ पैसे मिल जाते हैं. अगर आपके साथ भी ऐसा हो या बोनस मिले, तो उसे इधर-उधर खर्च करने के बज़ाय अपने इमर्जेंसी फ़ंड में डाल दें. यह आपको भविष्य की ज़रूरतों के लिए तैयार करता है.

7. क़र्ज लेने से बचें, अगर लें तो जल्दी चुकाने की कोशिश करें : सही आर्थिक रणनीति में से एक होती है क़र्ज़ को कम से कम रखना. क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन, जिन पर बहुत ज़्यादा ब्याज लगता है, उनसे शॉपिंग वगैरह कम से कम करें. अगर कभी क़र्ज़ लें भी, तो इसे जल्द से जल्द चुकाने की कोशिश करें. इससे बचने वाले पैसों का इस्तेमाल आप इमर्जेंसी फ़ंड के लिए कर सकते हैं.

8) समीक्षा करें और ज़रूरत के मुताबिक बदलाव करें : नियमित रूप से अपने बजट की समीक्षा करें और देखें कि अपने आर्थिक लक्ष्यों को आपने किस हद तक पूरा कर लिया है. अपने इमर्जेंसी फ़ंड के लक्ष्य की दिशा में आप कहां तक पहुंचे हैं, इसे देखें और ज़रूरत के मुताबिक इनमें बदलाव भी करें.

इमर्जेंसी फ़ंड रातों-रात तैयार नहीं होते हैं और इसे बनाने में बहुत सी चीज़ों का ध्यान रखना होता है. फ़ंड बनाने के लिए समय, लगातार निवेश करना, योजना और पैसों को सही तरीके से व्यवस्थित करने और खर्च करने की ज़रूरत होती है. अपनी ज़रूरतों और आय को देखें. अगर सही लगे या ज़रूरी हो, तो कम पैसों से भी शुरुआत कर सकते हैं और धीरे-धीरे अपनी बचत बढ़ा सकते हैं. इमर्जेंसी फ़ंड को आपको किस ज़रूरत के वक्त इस्तेमाल करना है, हमेशा इस पर कायम रहें. मौज-मस्ती या फ़िजूलखर्ची के लिए बिल्कुल भी इस्तेमाल न करें. छोटे और आपातकालीन खर्चों के लिए हमेशा खुद को तैयार रखें.

म्यूचुअल फंड निवेश के बारे में यह समझना ज़रूरी है कि यह जमा करने का विकल्प नहीं हैं. साथ ही, म्यूचुअल फ़ंड या एएमसी न तो निवेशकों के प्रति बाध्यकारी हैं, न ही रिटर्न की गारंटी देते हैं और न ही यह बीमाकृत होते हैं. म्यूचुअल फ़ंड निवेश की प्रकृति ऐसी है, जो रिटर्न या तय रिटर्न की गारंटी नहीं देते हैं. अतीत में किए गए प्रदर्शन को जब पेश किया जाता है, तो यह सिर्फ़ संदर्भ के लिए होता है. हम बता दें कि इसे भविष्य में ऐसे ही रिटर्न की गारंटी के तौर पर नहीं लिया जाना चाहिए. निवेश की यह योजना निवेशक के लिए फ़ायदेमंद है या नहीं, इसके बारे में निवेशकों को अपने आर्थिक सलाहकारों से मशवरा लेना चाहिए.

म्यूचुअल फंड निवेश जोखिम के अधीन हैं, कृपया सभी दस्तावेज़ सावधानी से पढ़ें.

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Author: Jagran Times

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