
हाइलाइट्स
हज यात्रा शुरू हो चुकी है. ये 26 जून से शुरू होकर 01 जुलाई तक चलेगी
इस बार हज यात्रा के दौरान मक्का में 25 लाख लोगों के पहुंचने की उम्मीद है
हज की यात्रा शुरू हो गई. 26 जून की शाम सफेद वस्त्र पहने मुसलमानों की भीड़ ने इस्लाम के सबसे पवित्र स्थल काबा की परिक्रमा की. उस दौरान उनकी इबादत की आवाज हवा में गूंजती रही. वार्षिक हज यात्रा सउदी अरब के मक्का में तवाफ, काबा की परिक्रमा के साथ शुरू हुई. इस बार इस कार्यक्रम में 25 लाख से अधिक मुसलमानों के भाग लेने की उम्मीद है, जो एक नया रिकॉर्ड होगा.
कोरोना के कारण पिछले तीन सालों से तमाम प्रतिबंधों के बीच ये हज यात्रा हो रही थी. वर्ष 2020 में केवल 10,000 लोगों को भाग लेने की अनुमति दी गई थी; 2021 में 59,000 लोगों को जबकि पिछले साल दस लाख लोगों की सीमा थी. इस बार कोरोना के कारण लगाए कड़े नियम हटा लिए गए हैं. इस्लाम के जो पिलर्स यानि स्तंभ बताए गए हैं, उसमें एक जीवन में एक बार हज यात्रा करना भी है.
जानते हैं कि भारत से लोग किस तरह इसमें जाते हैं. इस यात्रा को कौन क्वर्डिनेट करता है. कितना खर्च होता है. वहां कितने दिनों तक रहना होता है. सारी व्यवस्थाएं कैसे होती हैं.
सवाल – भारत से मक्का हज यात्रा पर जाने का कोटा कैसे तय होता है?
– वैसे सऊदी अरब ने लंबे समय से एक नियम बना रखा है कि जो भी मुस्लिम देश हैं वहां हर 1000 की आबादी पर एक व्यक्ति हज की यात्रा कर सकता है. दुनिया की सबसे बड़ी मुस्लिम आबादी इंडोनेशिया में रहती है. वहां 27.6 करोड़ मुस्लिम रहते हैं. लिहाजा वहां का कोटा 230,000 हज यात्रियों का है. दरअसल हर देश चाहता है कि अपने यहां से ज्यादा लोगों को हज पर भेज सके.
लिहाजा कोटा बढ़ाने पर बात चलती रहती है. भारत ने इस साल के शुरू में सऊदी अरब सरकार के साथ जेद्दाह में भारत से हज कोटे को लेकर करार किया है, जिसके अनुसार भारत से इस साल हज यात्रियों का कोट 1,75,025 जायरीनों का है.
सवाल – फिर इस कोटे के आधार पर सरकार कैसे तय करती है कि किस राज्य के कितने लोग वहां जाएंगे?
– इसको तय करने का काम केंद्र सरकार का अल्पसंख्यक मंत्रालय और हज कमेटी ऑफ इंडिया करती है. वो ये तय करती है कि भारत के हर राज्य से कितने लोग हज की यात्रा कर सकेंगे. इसके लिए हर राज्य की हज कमेटी आवेदन मंगाती है. उसका ड्रा निकाला जाता है. इस आधार छांटे गए लोगों को हज जाने का मौका मिलता है.
आबादी के आधार पर सबसे ज्यादा हज यात्री उत्तर प्रदेश के होते हैं, इसके बाद पश्चिम बंगाल और बिहार के हज यात्री होते हैं.इसे तय करने और छांटने का काम पूरी तरह राज्य हज कमेटियों का होता है, वो भारतीय हज कमेटी के साथ तालमेल पर काम करती हैं.
सवाल – भारत से हज जाने वाले यात्रियों को औसतन कितना पैसा देना होता है?
– हज का 70 फीसदी कोटा केंद्र सरकार अपने अल्पसंख्यक मंत्रालय और हज कमेटी के जरिए तय करती है और 30 फीसदी कोटा प्राइवेट आपरेटर्स पूरा करते हैं. सरकारी कोटे से जाने वाले लोगो को सरकार आने जाने के खर्च से लेकर वहां रहने के खर्च में काफी सब्सिडी देती है जबकि प्राइवेट आपरेटर्स अपने हिसाब से इस खर्च को तय करते हैं.
इस साल फरवरी में भारत सरकार के अल्पसंख्यक मंत्रालय ने घोषणा की थी कि नई पॉलिसी के तहत आवेदन के फॉर्म मुफ्त में लोगों को उपलब्ध कराए गए और सभी हज यात्रियों के कुल खर्च में 50,000 रुपए तक की कटौती की गई. हालांकि हज के कुल खर्च में इस बार बढोतरी हुई है.हालांकि अलग अलग राज्य सरकारें भी अपने यहां हज पर जाने वालों को कुछ सब्सिडी या आर्थिक मदद देती हैं.
इस बार जिन लोगों ने भारत सरकार के जरिए हज पर जाने के लिए रजिस्टर कराया, उन्हें 399,500 रुपए देने पड़े, जिसमें अलग अलग राज्यों से रियायतों के जरिए उनके कुल शुल्क में ऊपर नीचे हुआ.प्राइवेट आपरेटर्स ने हज यात्रियों से 06 लाख रुपए लिये. इसमें सरकार की 50 हजार की छूट को घटाकर देखें तो एक हज यात्री को तीन लाख रुपए से 3.50 लाख रुपए देने पड़े.अलग राज्यों के आधार पर भी राशि अलग रही.
सवाल – इस शुल्क में बढोतरी कैसे हो गई?
– इसकी वजह ये बताई गई कि सऊदी अरब सरकार ने मीना और अराफात पर्वत पर ठहरने की कीमत 22,778 रुपए से बढ़ाकर 124,247 रुपए कर दी है.
सवाल – सरकार में हज यात्री जो पैसा देते हैं, उसमें उन्हें क्या सुविधाएं मिलती हैं?
– इस पैसे में उन्हें आने जाने का हवाई खर्च, होटलों या तय स्थानों पर ठहरने का खर्च और मक्का में आवागमन का खर्च सम्मिलित रहता है. एक जायरीन को मक्का में 40 दिनों तक रुकना होता है. कार्यक्रम इस हिसाब से तय किए जाते हैं हर हज यात्री वहां 40 दिन रुके. खाने का खर्च उसे खुद वहन करना होता है. चूंकि हज यात्रा में शुचिता और सफाई का पूरा ख्याल रखना होता है, लिहाजा आमतौर पर हज यात्री अपना खाना खुद वहां बनाते हैं.
सवाल – जायरीन वहां 40 दिनों तक क्यों रुकते हैं. क्या वहां सभी जाने वाले एक साथ 40 दिनों तक रुकते हैं या ये आगे पीछे भी हो सकता है?
– हर जायरीन का वहां 40 दिन रुकना इसलिए जरूरी माना जाता है क्योंकि मुख्य हज यात्रा तब तक पूरी नहीं मानी जाती जब तक कि आप काबा में 40 दिन नमाज नहीं करें. लिहाजा जो लोग पहले जाते हैं वो हज यात्रा के साथ 40 दिन पूरा करके वापस आ जाते हैं और जो बाद में जाते हैं वो हज यात्रा में शामिल होने के बाद आगे भी ठहरते हैं कि 40 दिनों की काबा की नमाज की अवधि पूरी करें.
सवाल – हज यात्रा पर कौन जा सकता है?
– हज यात्रा पर कोई भी जा सकता है, जिसकी उम्र 12 साल से ज्यादा हो.
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Tags: Haj Committee of India, Haj yatra, Haj Yatri, Saudi Arab
FIRST PUBLISHED : June 27, 2023, 18:27 IST






