
रविकांत कुमार/मधेपुरा. बिहार के मधेपुरा जिले के मुरलीगंज प्रखंड के पकिलपार गांव के मध्य में बाबा जटाधारी का स्थान है. यहां की महिमा अपरंपार है. मन्नत पूरी होने के बाद यहां लोग बाबा को खड़ाऊं और चिमटा चढ़ाते हैं. स्थानीय लोगों की मानें तो सैकड़ों वर्ष पहले यहां जंगल था, नाममात्र की आबादी थी. उन्हीं दिनों यहां जटा वाले संत आए और पीपल पेड़ के नीचे विश्राम करने लगे. कुछ ग्रामीण उनके लिए भोजन की व्यवस्था कर ले आये, लेकिन तब तक संत बाबा विलोपित हो चुके थे. पीपल पेड़ के नीचे उनका खड़ाऊं और चिमटा था. इसके बाद से लोग उस खड़ाऊं और चिमटा की पूजा करते आ रहे हैं.
स्थानीय लोगों ने बताया कि बाबा जटाधारी महाराज मंदिर में नहीं, बल्कि पीपल के वृक्ष के नीचे ही विराजमान हैं. यहीं पर उनकी पूजा-अर्चना होती है. मन्नत पूरी होने के बाद श्रद्धालु यहां बाबा को खड़ाऊं और चिमटा चढ़ाते हैं. ग्रामीणों की मानें तो उनके गांव में जितने भी लोगों को नौकरी में सफलता मिली है, सब बाबा की कृपा से ही हुआ है. लिहाजा इस गांव में सर्वाधिक बिहार पुलिस और सेना के जवान हैं. लोगों ने बताया कि बाबा की भक्ति और श्रद्धा के कारण दूसरे गांव के भी लोग यहां रह कर नौकरी की तैयारी करते हैं. उनको सफलता मिली है. गांव में ऐसे कई उदाहरण मौजूद है.
कई गांव के लोग आते हैं पूजा करने
ग्रामीणों ने बताया कि वर्ष 2008 की प्रलयंकारी बाढ़ के समय चारों ओर से गांव जलमग्न हो गया था, लेकिन गांव में पानी प्रवेश नहीं कर पाया था. बाबा की कृपा से गांव में किसी भी प्रकार की आपदा या विपदा आज तक नहीं आई है. अगर आपदा या विपदा आती भी है, तो जान माल की क्षति नहीं होती है. ग्रामीणों ने बताया कि पहले गांव के ही लोग यहां पूजा-पाठ करते थे, लेकिन जैसे-जैसे समय बदलते गया, बाबा की महिमा दूर-दूर तक फैलती गई. अब यहां आस-पास के कई गांवों के लोग भी पूजा-उपासना करने आते हैं.
यहां पर पशुपालकों की भी विशेष आस्था है. जब कोई पशु दूध देना शुरू करता है, तो उसके स्वस्थ और दीर्घायु के लिए किसान यहां दही-चूड़ा का भोग लगाते हैं. मान्यता है कि ऐसा करने से उनके पशुओं को किसी भी प्रकार की समस्या नहीं होती है.
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FIRST PUBLISHED : June 27, 2023, 14:57 IST






