
शिवहरि दीक्षित/ हरदोई. किसानों को फसल उगाने के लिए तमाम दिक्कतों का सामना करना पड़ता है फिर भी किसान फसलों को उगाते हैं. इसी तरह खीरे की खेती के लिए भी किसानों को तमाम व्यवस्थाएं करनी पड़ती हैं. खीरे की खेती महज ढाई तीन महीने में तैयार तो होती है. मगर बांस व तार के ढांचों को तैयार करना सबसे बड़ा काम हो जाता है.
खीरे की खेती से किसान वर्ष में दो बार कमाई कर सकते हैं हरदोई जिला उद्यान अधिकारी सुरेश कुमार का कहना है कि खीरे की फसल को खरीफ के मौसम और जायद के मौसम में तैयार करने का समय सबसे अच्छा रहता है या ये कह सकते हैं कि खीरे की खेती किसान वर्ष में दो बार कर सकते हैं जिससे उनकी अच्छी कमाई भी हो सकती है.
खीरे की खेती के लिए तैयार करना होता है बांस का ढांचा
खीरे की खेती करने वाले किसानों को अपने खेतों में खीरे के पौधों की बेल को बढ़ाने के लिए बांस के ढांचे को तैयार करना होता है. इसके लिए जितने बीघे की खेती होती है उसी हिसाब से बांस के लट्ठे लगाने पड़ते हैं फिर इसके बाद में इन बांसों के ऊपर तार बांधे जाते हैं ताकि खीरे के पौधों की बेल अच्छे से इन बांसों पर बंधे तारों पर फैल सके.
खेत की जुताई के साथ ही डालना होता है बीज
खीरे की खेती करने वाले किसानों को खीरे की खेती के लिए सबसे पहले खेत की जुताई करानी पड़ती है. इसके ठीक बाद बीज की बुवाई शुरू हो जाती है, बीज की बुवाई हो जाने के बाद किसान अपने खेतों में पानी लगाते हैं. ढाई से तीन माह की इस खेती के गर्मी के दिनों में हर सप्ताह हल्की सिंचाई करना जरूरी होता है, ताकि खीरे की पौध को मुरझाने से बचाया जा सके.
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FIRST PUBLISHED : June 27, 2023, 15:06 IST






