प्रतीक कुमार
सिरोही. राजस्थान में विधानसभा चुनाव 2023 का शंख नाद हो चुका है. ऐसे में विधायकों ने भी कमर कस ली है. सिरोही की सबसे महत्वपूर्ण सीट मानी जाने वाली सिरोही शिवगंज विधानसभा में 1952 के बाद 2008 में निर्दलीय के रूप में संयम लोढ़ा ने जीत हासिल की थी और आज इस विधानसभा सीट का कार्ड देखा जा रहा है. साढ़े चार साल में सिरोही शिवगंज विधायक संयम लोढ़ा अपने कार्यकाल में जनता की उम्मीदों पर कितना खरा उतरे और जनता के मुद्दे और नेता के दावे कितने पूरे हुए आइए जानते है इस रिपोर्ट कार्ड के जरीए.
सिरोही विधानसभा सीट तीन बार भाजपा और एक बार कांग्रेस और एक बार निर्दलीय के कब्जे में रही है. सिरोही शिवगंज व्यापारी दृष्टि से शिवगंज व्यापार का हब कहलाता है. शिवगंज को मिनी बॉम्बे के नाम से भी जाना जाता है और यहां कृषि मंडी नहीं होने के चलते किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए पाली के सुमेरपुर मंडी जाना पड़ता है. स्थानीय मुद्दों की बात करे तो पानी और सिरोही बागरा को जोड़ने वाला रेल लाइन का मुद्दा सबसे बड़ा मुद्दा है, जो पिछले 25 सालों से नेता सरदार बूटा सिंह के समय से चला आ रहा है. ये मुद्दा हर चुनाव में पहली श्रेणी में देखा जाता है, लेकिन जनता की उम्मीदों पर अभी तक एक भी नेता खरा नहीं उतरा है, जिसके कारण जनता अपने आप को ठगा सा महसूस कर रही हैं.
सिरोही शिवगंज विधानसभा को लेकर स्थानीय नागरिक कई तरह की मांग कर रहे है.
विपक्षी नेताओं ने लगाए वाहवाही लुटने का आरोप
हालांकि सिरोही के वर्तमान विधायक संयम लोढ़ा विकास के नाम पर कई दावे करते हैं, लेकिन उन सभी दावों पर विपक्ष की भूमिक निभाने वाले पूर्व विधायक ओटाराम देवासी और किसान नेता क्षितिज मेवाड़ा खंडन करते हुए नजर आते हैं और दोनों का आरोप है कि केंद्र सरकार की योजनाओं को लोढ़ा खुद का नाम लेकर वाहवाही लुटने में लगे रहते हैं. सिरोही के मेडिकल कॉलेज की बात करें तो भाजपा पर निर्दलीय विधायक की कॉन्ट्रोवर्सी बनी हुई थी. दोनों राजनीतिक दल एक दूसरे पर वाहवाही करने के आरोप लगाती हुई नजर आती है.
तहसील कार्यालय में नगर पालिका कार्मिकों की कमी
सिरोही एक शिक्षित विकसित शहरों में अपनी प्राथमिकता दर्ज करवाता है. संयम लोढ़ा ने सिरोही में लॉ कॉलेज, नर्सिंग कॉलेज और शिक्षा के क्षेत्र में कई प्रकार की उपलब्धि को शहर के लिए सौगात दी है. सिरोही शिवगंज विधानसभा क्षेत्र की बात की जाए तो सिरोही का तहसील कार्यालय शिवगंज तहसील कार्यालय नगर पालिका कार्मिकों की कमी के चलते आम जनता को अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ रहे हैं.
पायलट खेमे के माने जाते थे विधायक
पिछले साढे 4 साल में विधायक के घोषणा की बात की जाए तो घोषणा बहुत हुई है, लेकिन उन घोषणाओं को जमीनी स्तर पर उतारने में विधायक ने अपनी पूरी कोशिश की हैं. संयम लोढ़ा के साढ़े 4 वर्ष के कार्यकाल की बात की जाए तो संयम लोढ़ा पहले पायलट समर्थक खेमे में थे, लेकिन जैसे ही गहलोत सरकार ने बाड़े बंदी करनी शुरु की तो लोढ़ा ने अपना पाला बदलकर गहलोत सरकार को अपना मत देकर सपोर्ट किया.
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FIRST PUBLISHED : June 27, 2023, 14:59 IST






