बचपन में थाम ली थी हॉकी स्टिक…फिर संघर्षों से बनाई पहचान, प्रीतम को मिल चुका द्रोड़ाचार्य सम्मान


नीतिन आंतिल/सोनीपत: हरियाणा की छोरियों ने हर क्षेत्र में अपना परचम लहराया है. खासतौर से खेल के मैदान में एक से बढ़कर एक कामयाबी हासिल की हैं. कई ऐसे नाम हैं, जो खेल इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हैं. इन्हीं में से एक नाम है प्रीतम सिवाच का.

प्रीतम भारतीय महिला हॉकी का वो बड़ा नाम हैं, जिसने पहले देश को हॉकी में चैंपियन बनाया और अब 18 सालों से देश के लिए हॉकी के खिलाड़ी तैयार कर रही हैं. हॉकी के लिए प्रीतम सिवाच के योगदान को देखते हुए खेल जगत के बड़े सम्मान जैसे द्रोणाचार्य, अर्जुन और भीम अवॉर्ड आदि प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है.

बचपन में ही थाम ली थी हॉकी स्टिक
गुरुग्राम के गांव झाड़सा में जन्मीं प्रीतम सिवाच ने वर्ष 1987 में हॉकी स्टिक थामी थी. जब वह 7वीं कक्षा में पढ़ती थीं. फिर वक्त के साथ उनका हॉकी के लिए प्यार बढ़ता ही गया. 1990 में पहली बार प्रीतम ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में भाग लिया था, जिसमें उन्हें सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी का खिताब भी मिला था. उन्होंने वर्ष 1992 में जूनियर एशिया कप में पहली बार अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा में भाग लिया था.

प्रीति भी प्रीतम की शिष्या
वहीं प्रीतम सिवाच ने जिन खिलाड़ियों को अब तक ट्रेनिंग दी है, वे एशिया कप जीत चुकी हैं. वर्तमान की जूनियर हॉकी टीम की कैप्टन प्रीति भी प्रीतम सिवाच की ही शिष्या हैं. उनसे प्रशिक्षित खिलाड़ी नेहा गोयल, निशा वारसी, किरण दहिया, ज्योति रूमावत और महिमा अंतरराष्ट्रीय फलक पर चमक बिखेर रही हैं.

मिला खेल जगत का सबसे बड़ा सम्मान
हॉकी के लिए प्रीतम सिवाच के योगदान को देखते हुए खेल जगत के बड़े अवॉर्ड जैसे द्रोणाचार्य, अर्जुन और भीम जैसे प्रतिष्ठित पुरस्कारों से उनको सम्मानित किया जा चुका है. प्रीतम ने बताया कि अर्जुन और द्रोणाचार्य अवॉर्ड मिलना गौरव की बात है. इससे मुझे अपने काम को और बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है. उनका कहना है कि वह देश को ओलंपिक का पदक नहीं दिला सकी थीं, लेकिन अपने उसी सपने को साकार करने के लिए प्रीतम जिले में हॉकी की बेहतरीन खिलाड़ी तैयार करने में लगी हैं. प्रीतम कहती हैं कि मैंने हमेशा अपने काम को ईमानदारी से किया है और देश के लिए बेहतर खिलाड़ी तैयार किए हैं. खेल के प्रति ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा ने ही उन्हें यह मुकाम दिलाया है.

ज्यादातर जरूरतमंदों को देती हैं प्रशिक्षण
प्रीतम 2004 से लड़कियों को हॉकी का प्रशिक्षण दे रही हैं. इस समय उनकी देखरेख में करीब 165 लड़कियां नियमित रूप से अभ्यास कर रही हैं. वे ज्यादातर जरूरतमंद खिलाड़ियों को ही प्रशिक्षण देती हैं. वह स्वयं हर स्तर की सुविधा उपलब्ध कराती हैं.

प्रीतम के नाम ये उपलब्धियां
• 1992 में पहले अंतरराष्ट्रीय मुकाबले जूनियर एशिया कप में बेस्ट प्लेयर का खिताब
• 1998 में एशियाड में देश की कप्तानी करते हुए बैंकॉक में 15 वर्ष बाद प्रतियोगिता का रजत पदक
• 2002 में मैनचेस्टर इंग्लैंड में हुए राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण पदक
• 2010 राष्ट्रमंडल खेलों में भारतीय महिला हॉकी टीम की प्रशिक्षक बनीं
• चाइना में एशियन गेम और अर्जेंटीना में हुए विश्व कप में टीम को प्रशिक्षण दिया
• 2017 एशिया कप की स्वर्ण पदक विजेता टीम को प्रशिक्षण दिया
• वर्ष 2021 में हॉकी में द्रोणाचार्य अवॉर्ड प्राप्त करने वाली देश की पहली महिला कोच बनीं

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Author: Jagran Times

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