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कासिम खान/नूंह. हरियाणा का नूंह जिला कई ऐतिहासिक धरोहरों का गवाह है. लेकिन यह धरोहर रखरखाव के अभाव में खंडहर होती जा रही हैं. ऐसी ही एक ऐतिहासिक धरोहर है नूंह में सेठ चूहिमल का तालाब. सेठ चूहीमल का तालाब अपनी खूबसूरती के साथ गुबंद में की गई चित्रकारी के लिए भी आकर्षण का केंद्र है लेकिन प्रशासन इस खूबसूरत धरोहर को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित करने में नाकाम रहा है. अनदेखी की वजह से ये चूहिमल का तालाब खंडहर होता जा रहा है.
ऐसे में स्थानीय लोगों ने सरकार और प्रशासन ने गुहार लगाई है कि इस ऐतिहासिक और खूबसूरत धरोहर को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया जाए. सेठ चूहिमल की सातवीं पीढ़ी के वंशज मास्टर चंद्रभान इसकी देखरेख कर रहे हैं. यूं तो मेवात जिला ( वर्तमान में नूंह नाम से जाना जाता है )2005 में बना था. लेकिन आज तक सरकार यहां किसी ऐतिहासिक स्थल को पर्यटक स्थल के रूप में विकसित नहीं कर पाई है. अगर सेठ चूहिमल तालाब को सरकार पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करे, तो मेवात जिले को अलग पहचान मिल सकती है, साथ ही सरकार को राजस्व में भी इजाफा होगा. इसी के साथ इस ऐतिहासिक धरोहर को संजोकर रखा जा सकेगा.
चूहिमल तालाब और महल की विशेषताएं
चूहिमल तालाब की कई विशेषताएं हैं. पहली तो यह कि चूहिमल तालाब का पानी सूखता नहीं है. साफ-सफाई नहीं होने की वजह से तालाब का पानी गंदा हो गया है. इसके अलावा यहां बने गुंबद में जो चित्रकारी की गई है, ऐसी चित्रकारी अजंता-एलोरा की गुफाओं में देखने को मिलती हैं. यहां एक विशाल गुफा बनी है. जो सेठ चूहिमल के महल तक जाती है. इसी गुफा के जरिए चूहिमल तलाब में नहाने आते थे.
पुरातत्व विभाग में गंभीरता की कमी
सेठ चूहीमल इलाके के काफी अमीर व्यक्ति थे. उन्होंने इस तालाब और गुबंद के साथ – साथ गुफा को आरामगाह के लिए बनाया था. तालाब में स्नान करने के लिए गुफा से जाते थे और स्नान के बाद गुबंद की छतरी पर धूप सेंकते थे. घर की महिलाएं भी इसी गुफा से पर्दा प्रथा की वजह से स्नान करने आती-जाती थी. पुरातत्व विभाग ने भी इस ऐतिहासिक इमारत को गंभीरता से नहीं लिया. अगर पुरातत्व विभाग और सरकार इसकी तरफ आगे भी ध्यान नहीं देते हैं तो वह समय दूर नहीं है कि जब आने वाली पीढ़ियां इन इमारतों को महज किताबों में ही देखना पड़ेगा
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Tags: Haryana news, History of India, Local18, Mewat
FIRST PUBLISHED : June 27, 2023, 13:47 IST






