गजब! कबाड़ से बना दिया…पैडल से चलने वाला ट्रैक्टर, जोत सकता है खेत, खींच लेगा वजन

आशीष कुमार/पश्चिम चम्पारण: हुनरमंद किसी परिस्थिति या अवसर के मोहताज नहीं होते. परिस्थिति चाहे जैसी भी हो, हुनर को कभी मात नहीं दे सकती. कुछ ऐसा ही पश्चिम चम्पारण के एक छोटे से गांव में देखने को मिला, जहां प्रतिकूल परिस्थिति में रहने के बावजूद एक युवक ने कबाड़ से ट्रैक्टर बना डाला. खास बात ये कि यह डीजल से नहीं बल्कि पैडल से चलता है.

नौतन प्रखंड के अंतर्गत आने वाले धुसवां गांव के रहने वाले संजीत (28) ने घर में पड़े कबाड़ से महज़ 30 दिनों में छोटे ट्रैक्टर के आकार का वाहन तैयार किया है, जिसे उन्होंने मानव ऊर्जा से चलने वाला ट्रैक्टर नाम दिया है. खास बात यह है कि इसे चलाने के लिए पेट्रोल तथा डीजल की जरूरत नहीं पड़ती. साइकिल की तरह इसमें दो पैडल लगे हैं, जिसे घुमाने पर यह ट्रैक्टर आगे बढ़ेगा.

संजीत ने बताया कि इस वाहन में 5000 एमएएच पावर की एक चार्जेबल बैटरी भी लगाई है, जिससे ट्रैक्टर में लगे एलईडी बल्ब जलते हैं. जब ट्रैक्टर को चलाया जाएगा, तब मानव ऊर्जा को इसमें लगा डायनेमो यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करेगा, जिससे बैटरी चार्ज होती रहेगी. बताया कि अब लोग दूर-दूर से इस ट्रैक्टर को देखने के लिए आ रहे हैं और उन्हें यह पसंद भी आ रहा है.

आसानी से जोत सकते हैं खेत
संजीत ने बताया कि इस मानव ऊर्जा चलित ट्रैक्टर को एकदम साइकिल की तरह इस्तेमाल करना है, जिससे इसमें लगे यंत्र आसानी से मिट्टी को ढाई से 3 इंच तक जोत सकते हैं. खास बात यह है कि इसे चलाने में विशेष ताकत की जरूरत नहीं पड़ती है, जितनी ताकत आपको एक साइकिल चलाने के लगती है, ठीक उतनी ताकत ही आपको यहां भी लगेगी. दावा किया कि फावड़े से खेत जोतने या पशुओं से खेत जुतवाने की तुलना में इस ट्रैक्टर से खेत जोतना, कई गुना आसान तथा ऊर्जा की बचत करने वाला है. बकौल संजीत वास्तविक ट्रैक्टर से भी खेती के लिए दो से ढाई इंच तक ही जुताई करनी होती है.

छोटे स्तर पर जुताई के लिए बेहतर
संजीत ने बताया कि उनका यह ट्रैक्टर वैसी जगहों पर जुताई के लिए बेहतर है, जहां बड़े ट्रैक्टर नहीं जा पाते. खासकर छोटे पैमाने के खेत या घर के अंदर लगाए गए कोले में इससे जुताई की जा सकती है. इस ट्रैक्टर की रफ्तार 5 से 10 किलोमीटर प्रति घंटा है. इसे आसानी से कहीं भी ले जा सकते हैं तथा खेत जोत सकते हैं. इसके अलावे आप इससे 600 किलो तक का वजन भी ढो सकते हैं.

इंडिया इंटरनेशनल साइंस फेस्टिवल में शामिल
संजीत के अनुसार, इस आविष्का को 2022 में गोवा में लगे इंडिया इंटरनेशनल विज्ञान प्रदर्शनी में भी शामिल किया गया था. खास बात यह है कि पूरे बिहार से संजीत एकमात्र ऐसे युवा थे, जिनके आविष्कार को उस प्रदर्शनी के लिए चुना गया था. वहां मौजूद सभी अधिकारियों ने संजीत के इस अविष्कार की सराहना की तथा पुरस्कृत भी किया.

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Author: Jagran Times

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