Indian Economy: आरबीआई गवर्नर बोले- GDP ग्रोथ रेट 6.5 फीसदी रहने का भरोसा

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मुंबई. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर शक्तिकांत दास ने चालू वित्त वर्ष (FY24) में आर्थिक वृद्धि दर 6.5 फीसदी रहने का भरोसा जताया है. उन्होंने कहा कि हमने सभी पहलुओं पर गौर करने के बाद वृद्धि दर का अनुमान लगाया है और इसे हासिल करने की हमें पूरी उम्मीद है.

उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व आगे नीतिगत दर में कुछ और वृद्धि करता है तो उससे रुपये की विनिमय दर पर असर पड़ने की आशंका नहीं है. साथ ही सेवा निर्यात बेहतर रहने से चालू खाते का घाटा प्रबंधन योग्य दायरे में रहेगा.

आईएमएफ और फिच रेटिंग्स के अनुमान से बेहतर ग्रोथ की उम्मीद
आरबीआई ने इस महीने पेश मौद्रिक नीति समीक्षा में जीडीपी वृद्धि दर 6.5 फीसदी रहने के अनुमान को बरकरार रखा है. हालांकि, यह आईएमएफ के इस साल अप्रैल में जताए गए 5.9 फीसदी आर्थिक वृद्धि दर के अनुमान से कहीं अधिक है. वहीं रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स ने ताजा अनुमान में चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की जीडीपी वृद्धि दर अनुमान को बढ़ाकर 6.3 फीसदी कर दिया है.

जीडीपी वृद्धि दर को लेकर RBI का संतुलित रुख
दास ने कहा, ‘‘जीडीपी वृद्धि दर को लेकर हमने संतुलित रुख लिया है. किसी भी स्थिति में आप अनुमान जताते हैं, तो सकारात्मक और नकारात्मक, दोनों जोखिम होते हैं. यह सब मिलाकर हमने संतुलित रुख अपनाया है और इसके आधार पर हमारा अनुमान है कि आर्थिक वृद्धि चालू वित्त वर्ष में 6.5 फीसदी रहेगी तथा इसके लिये हम काफी आशान्वित हैं.’’

रुपये में उतार-चढ़ाव काफी मामूली
बीते वित्त वर्ष 2022-23 में आर्थिक वृद्धि दर 7.2 फीसदी रही जो अनुमान से अधिक है. रुपये के बारे में पूछे जाने पर दास ने कहा, ‘‘कोविड के समय से देखें, रुपया-डॉलर विनिमय दर काफी स्थिर रही है. इस साल जनवरी से अभी तक के आंकड़े लें तो रुपये में उतार-चढ़ाव काफी मामूली है. वास्तव में रुपये में थोड़ी मजबूती ही आई है. हमारी कोशिश है कि डॉलर-रुपये की विनिमय दर में अत्याधिक उतार-चढ़ाव नहीं हो.’’

फेडरल रिजर्व की ओर से रेट बढ़ाए जाने के बाद रुपया काफी स्थिर
उन्होंने कहा, ‘‘अमेरिका में फेडरल रिजर्व ने 500 बेसिस प्वाइंट (5 फीसदी) ब्याज दर बढ़ा दिए, उसके बाद भी रुपया काफी स्थिर है. इसीलिए घरेलू निवेशक हों या फिर विदेशी निवेशक, उनके विश्वास के लिए यह सकारात्मक संदेश है कि जो भारतीय रुपया है, वह स्थिर है. केंद्रीय बैंक उसकी स्थिरता पर ध्यान दे रहा है. अमेरिकी फेडरल रिजर्व आगे नीतिगत दर में कुछ और वृद्धि करता है तो उससे रुपये की विनिमय दर पर असर पड़ने की आशंका नहीं है.’’

वस्तु निर्यात में कमी लेकिन सेवा निर्यात बढ़े 
दास ने कहा, ‘‘जहां तक चालू खाते के घाटे (Current Account Deficit) का सवाल है, अप्रैल-दिसंबर तक यह 2.7 फीसदी था. साल के आखिर तक का आंकड़ा हम जारी करने जा रहे हैं, वह भी दायरे में होगा.’’ इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा, ‘‘वस्तु निर्यात जरूर कम हुआ है लेकिन सेवा निर्यात काफी बढ़े हैं. इस साल पूंजी प्रवाह भी बढ़ा है. हालांकि यह फाइनेंस के लिए है. मुख्य कारण सेवा निर्यात का बढ़ना है. साथ ही आयात बिल भी कम हुआ है. पिछले साल कई महीने कच्चा तेल 100 अरब डॉलर बैरल के आसपास था, इस साल इसमें कमी है. इसीलिए कैड चालू वित्त वर्ष में प्रबंधन योग्य दायरे में रहेगा.’’

क्रेडिट ग्रोथ कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं
चालू वित्त वर्ष में बैंक कर्ज वृद्धि के बारे में गवर्नर ने कहा, ‘‘इस साल कर्ज वृद्धि काफी मजबूत रही है. अभी तक सालाना आधार पर इसमें 16 फीसदी की वृद्धि हुई है. कई क्षेत्रों में वृद्धि हुई है. खुदरा क्षेत्र में जो कर्ज वृद्धि है वह टिकाऊ सीमा में है. बैंकों से जो सूचना मिली है, उसके अनुसार अभी हाल में कॉरपोरेट कर्ज हो या फिर परियोजना से जुड़ा कर्ज, वहां से भी काफी मांग आ रही है. इसीलिए जो ‘क्रेडिट ग्रोथ’ है, वह धीरे-धीरे सभी क्षेत्रों में हो रहा है. यह कुछ क्षेत्रों तक सीमित नहीं है.’’

Tags: GDP, GDP growth, Shaktikanta Das

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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