Udaipur : उज्जैन के महाकाल मंदिर की तर्ज पर इस मंदिर में होती है महाआरती, सावन में भोलेबाबा निकलते हैं नगर भ्रमण पर

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निशा राठौड़/ उदयपुर. सावन मास की शुरुआत 4 जुलाई 2023 से होगी और 31 अगस्त 2023 तक रहेगा. भक्त इस बार 58 दिनों तक भगवान शिव की उपासना करने वाले हैं. सावन के महीने में महादेव की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है. धार्मिक मान्यता है कि जो व्यक्ति केवल सावन महीने में महादेव का जल अभिषेक करता है भगवान उसकी हर मनोकामना पूर्ण करते है. वैसे तो उदयुर के काफी शिव मंदिर हैं, जो बहुत प्रचीन भी हैं. लेकिन, यहां एक ऐसा मंदिर है जहां उज्जैन के महाकाल मंदिर की तर्ज पर कार्यक्रम होते हैं.अइस मंदिर से हजारों भक्तो की श्रद्धा जुड़ी है. पूरे सावन के महीने में यहां विषेश आयोजन होते हैं.

सावन में निकती है भोलेनाथ की सवारी

उदयपुर के रानी रोड स्थित महाकाल मंदिर में सावन में विशेष आयोजन होते हैं. इस मंदिर में सावन के प्रत्येक सोमवार को भगवान शिव को सवारी निकली जाती है और वे नगर भ्रमण पर निकलते हैं. सावन के पहले सोमवार को मन्दिर की प्रक्रिमा कराई जाती है. दूसरे सोमवार को वनविहार कराया जाता है. तीसरे सोमवार को जल विहार कराया जाता है. इसके बाद सावन के अन्तिम सोमवार को भगवान शिव अपने गणों के साथ नगर भ्रमण पर निकले है. इस मौके पर मंदिर से भव्य शोभायात्रा निकाली जाती है. शहर के विभिन्न हिस्सों से होती हुई यह यात्रा निकलती है.

उज्जैन महाकाल की तर्ज पर होती है पूजा

उदयपुर शहर के इस महाकाल मंदिर में भी पूजा अर्चना का विधि विधान ज्योतिर्लिंग महाकाल मंदिर की तर्ज पर ही की जाती है. बताया जाता है कि यह शिवलिंग स्वंभू है. किसी ने इसकी स्थापना नहीं की. यह शिवलिंग अपने आप प्रकट हुआ था. कहा जाता है कि गुरु गोरखनाथ यहां पूजा अर्चना किया करते थे. मान्यताओं के अनुसार महाकाल मन्दिर पूजा—अर्चना करने से भक्त की हर मनोकामना पूर्ण होती है. बाबा का सावन के हर दिन विशेष श्रृंगार भी कराया जाता है. इसके साथ ही सुबह के समय भक्तों द्वारा महादेव का जलाभिषेक भी किया जाता है.

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FIRST PUBLISHED : June 25, 2023, 18:35 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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