अलवर के इस मंदिर में जरूरतमंदों को फ्री में खिलाया जाता है खाना, हर दिन रहता है अलग मेन्यू

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पीयूष पाठक/ अलवर. भारतीय संस्कृति भूखे को खाना खिलना सबसे बड़ा धर्म माना गया है. इसी संस्कृति को ध्यान में रखते हुए शहर के एक मंदिर समिति ने असहाय लोगों को खाना खिलाने का काम कर रही है. अलवर शहर के स्वर्ग रोड स्थित 1008 कल्याणकारी हनुमान जी की समिति ने सन 2014 से असहाय व गरीब लोगों को मुफ्त में खाना खिला रही है. हनुमान मंदिर के महंत ने बताया कि समिति द्वारा निस्वार्थ भाव से 2014 से सुबह व शाम भूखे वे असहाय लोगों को खाना खिलाया जा रहा है. हालांकि,कोरोनावायरस के समय में शाम के खाने को रोक दिया गया. लेकिन सुबह का खाना 2014 से आज तक जारी है. इसमें रोजाना अलग-अलग मेन्यू बनाकर असहाय लोगों को खिलाया जाता है. यदि कोई भक्त इसमें अपना योगदान देना चाहता है तो वह मंदिर समिति से इसकी जानकारी ले सकता है.

50 साल पुराना है मंदिर

कल्याणकारी हनुमान मंदिर के महंत पंडित शशिकांत शर्मा ने बताया कि कल्याणकारी हनुमान मंदिर पहले छोटा सा था. मंदिर 50 सालों से भी ज्यादा पुराना है. मंदिर की मूर्ति खंडित होने के बाद 25 मई 2013 को भगवान की नई प्रतिमा की पूरे विधि विधान से स्थापना करवाई. 5 अगस्त 2014 से गरीब व असहाय लोगों को भोजन को वितरण किया जा रहा है. भोजन लोगों को दोनों टाइम उपलब्ध कराया जाता था. लेकिन कोरोना काल में शाम के भोजन को रोक दिया गया. सुबह का भोजन तब से अब तक चल रहा है. भोजन वितरण का सयम 9 बजे से 2 से 3 घंटे तक चलता है.

रोज बदलता है खाने का मेन्यू

मंदिर के महंत शशिकांत ने बताया कि खाने का मेन्यू रोज़ाना अलग अलग होता है. कभी खीर, पूरी, सब्जी, चावल, रोटी सब्जी आदि रहती है. महंत ने बताया कि यहां खाने वाले लोगों को रोज अलग-अलग खाना खिलाया जाता है. मंदिर समिति व भक्तों द्वारा 2014 से असहाय लोगों को सेवा भाव से खाना खिलाया जा रहा है.

महंत ने बताया कि यदि कोई भक्तों में अपना योगदान करना चाहता है तो 1 दिन का सादा भोजन रोटी सब्जी चावल का 1500 रुपये व पूरी सब्जी खीर 2500 रुपये 1 दिन का खर्च आता है. वह समिति द्वारा जानकारी कर अपना योगदान दे सकता है. पूरा खाना बनने के लिए करीब 3 घंटे का समय लगता है. जिसमें रोटी को कोयले की आंच पर सेका जाता है.

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Author: Up Head Line

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