पाकिस्‍तानी दिग्‍गज का दावा,’वॉर्न से बेहतर थे मुरली लेकिन रंग-देश के कारण ‘वार्नी’ को मिली ज्‍यादा इज्‍जत’


हाइलाइट्स

टेस्‍ट क्रिकेट में मुरली के नाम दर्ज हैं सबसे ज्‍यादा 800 विकेट
श्रीलंका के मुरलीधरन के बॉलिंग एक्‍शन पर सवाल भी उठे थे

नई दिल्‍ली. मुथैया मुरलीधरन (Muthiah Muralidaran) और शेन वॉर्न (Shane Warne) की गिनती दुनिया के महान गेंदबाजों में की जाती है. श्रीलंका के मुरलीधरन के नाम पर टेस्‍ट क्रिकेट में सबसे अधिक 800 विकेट दर्ज हैं, वही इस सूची में दूसरे स्‍थान पर ऑस्‍ट्रेलिया के शेन वॉर्न हैं जिन्‍होंने 708 टेस्‍ट क्रिकेट लिए हैं. दोनों स्पिनरों में श्रेष्‍ठ कौन, कई बार क्रिकेट जगत में बहस होती रही हैं. दोनों बॉलर्स के समर्थकों के इनके पक्ष में अपने-अपने तर्क हैं, वैसे पाकिस्‍तान के पूर्व हरफनमौला अब्‍दुल रज्‍जाक (Abdul Razzaq) ने मुरलीधरन को वॉर्न से बेहतर माना है.

रज्‍जाक का यहां तक कहना है कि ऑस्‍ट्रेलिया के होने और अपने रंग की वजह से वॉर्न को श्रीलंका के स्पिन गेंदबाज से ऊपर आंका गया.उन्‍होंने एक टीवी शो के दौरान यह विचार व्‍यक्‍त किए. इस सवाल पर कि इंटरनेशनल क्रिकेट में खेलते हुए आपको किस गेंदबाज से डर लगता था, जवाब में पाकिस्‍तान के इस पूर्व हरफनमौला ने बताया कि मुरलीधरन और शेन वॉर्न ने सबसे अधिक तंग किया.रज्‍जाक ने कहा कि वह इस बात को लेकर खुद को गौरवान्वित महसूस करते हैं कि उन्‍होंने इन दोनों महान गेंदबाजों का सामना किया. मुरली निश्चित रूप से वॉर्न से बेहतर थे लेकिन अपने रंग और क्रिकेट जगत में ऑस्‍ट्रेलिया के रुतबे के कारण ‘वार्नी’ को ज्‍यादा इज्‍जत और शोहरत मिली. मुरली अगर ऑस्‍ट्रेलिया के होते तो उन्‍हें शेन वॉर्स ने डबल इज्‍जत मिलती.

इस सवाल कि क्‍या देश का फर्क पड़ता है, रज्‍जाक ने कहा-निश्चित रूप से. मुरली श्रीलंका से हैं जबकि वॉर्न ऑस्‍ट्रेलिया से, जो कि धनी देश है. इसका असर पड़ता है. जैसे हम कह सकते हैं कि वसीम अकरम अगर भारत में होते तो हो सकता है कि उनके वहां स्‍टेच्‍यू बन जाते. वे अगर इंग्‍लैंड में होती तो वहां ‘सर’ का खिताब मिल जाता. निश्वित रूप से इस बात का फर्क पड़ता है. बता दें, मुरली ने 133 टेस्‍ट में 22.72 के औसत से 800 विकेट लिए जबकि वॉर्न ने 145 टेस्‍ट में 25.41 क औसत से 708 विकेट हासिल किए.

हालांकि मुरलीधरन के बॉलिंग एक्‍शन को लेकर सवाल भी उठे. भारत के पूर्व स्पिन गेंदबाज बिशन सिंह बेदी ने तो मुरली को स्पिनर के बजाय जैवलिन थ्रोअर ही कहा था. उस समय भी विवाद हुआ था जब ऑस्‍ट्रेलिया में एक सीरीज के दौरान अंपायर डेविड हेयर ने मुरली की गेंदबाजी को थ्रो करार देते हुए नोबॉल घोषित कर दिया था. हेयर का मानना था कि मुरली का बॉलिंग एक्‍शन संदिग्‍ध है. वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया के विश्वविद्यालय ने छह अलग-अलग कोणों से 1,000 फ्रेम प्रति सेकंड की गति से मुरली की गतिविधि की तस्वीरें खींचीं, और निष्कर्ष निकाला था कि कुछ कोणों से एक्‍शन संदिग्ध दिखता है लेकिन अन्य कोणों से कोई समस्या नहीं है.’

Tags: Abdul razzaq, Cricket, Shane warne

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Author: Jagran Times

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