
Pigmentation: अनचाहे गर्भ से निजात पाने में गर्भ निरोधक गोलियां भले ही आपकी मदद कर सकती हैं, लेकिन लगातार गर्भ निरोधक गोलियां के इस्तेमाल से आपके लिए कई मुसीबतें भी खड़ी कर सकती है. इन तमाम मुसीबतों में एक मुसीबत आपकी सुंदरता से भी जुड़ी हो सकती है. जी हां, गर्भ निरोधक गोलियों के लगातार इस्तेमाल से आपको पिगमेंटेशन की समस्या का सामना करना पड़ सकता हैं.
मैक्स हॉस्पिटल की सीनियर डर्मेटोलॉजिस्ट डॉ. दीप्ति राणा के अनुसार, एंटी प्रेगनेंसी पिल्स के तौर पर इस्तेमाल होने वाली कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स अथवा आईपिल की वजह से चेहरे पर पिगमेंटेशन की शिकायत हो सकती हैं. दरअसल, कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स की वजह से महिलाओं के शरीर हार्मोनल चेंज होते हैं. हार्मोनल डिसबैलेंस की वजह से महिलाओं को पिगमेंटेशन की शिकायत हो सकती है.
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क्या है पिगमेंटेशन की असल वजह
पिगमेंटेशन यानी चेहरे पर नजर आने वाले काले धब्बे अथवा झाइयां. ये अनचाहे काले धब्बे न केवल आपकी सुंदरता पर दाग लगाते हैं, बल्कि कई बार आपके आत्मविस्वाश को भी कमजोर करने लगते हैं. इन काले धब्बों से निजात पाने के लिए आप तरह-तरह के उपाय तो आजमाने लगते हैं, लेकिन इस बात पर ज्यादा ध्यान नहीं देते, कि आखिर आपकी सुंदरता पर दाग लगाने वाले पिगमेंटेशन की आखिर वजह क्या है आइए समझते हैं असल वजह.
डॉ. दीप्ति राणा के अनुसार, गर्भ को रोकने के लिए गर्भनिरोधक गोलियों का इस्तेमाल शरीर के लिए अप्राकृतिक स्थिति है. गर्भनिरोधक गोलियों के जरिए एक तरह का हार्मोनल ट्रीटमेंट हो रहा होता है, नतीजतन, इस दवा के सेवन के बाद शरीर में कई तरह के हार्मोन रिलीज होते हैं और जिसकी वजह से शरीर का हार्मोनल सिस्टम डिस्बैलेंस हो जाता है, जिसका नतीजा पिगमेंटेशन के रूप में सामने आता है.
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क्या PCOD के मरीजों के लिए फायदेमंद हैं गर्भ निरोधक गोलियां?
ऐसा नहीं कि गर्भ निरोधक गोलियां हमेशा पिगमेंटेशन की वजह बने. कई बार ऐसा भी हो सकता है कि ये दवाएं आपके लिए लाभदायक भी साबित हो जाएं. लेकिन, इसका यह बिल्कुल मतलब नहीं कि आप जब चाहें, जितनी चाहें, गर्भ निरोधक गोलियां खा लें. जब जरूरत हो तभी खाएं, यदि आप गर्भ निरोधक गोलियों खाने की वजह से ऑलरेडी पिगमेंटेशन का शिकार हो चुके हैं तो क्या इसका इलाज अब संभव है.
इस सवाल को लेकर डॉ. दीप्ति राणा का कहना है कि हां, कई बार गर्भ निरोधक गोलियों के सेवन की वजह से रिजल्ट बिल्कुल उल्टे होते हैं और चेहरे पर उसके अलग असर नजर आते हैं. कई बार मुंहासों से परेशान मरीज या पीसीओडी के मरीजों को इलाज के तौर पर कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स की लो डोज दी जाती है. यानी, हर शरीर में कॉन्ट्रासेप्टिव पिल्स का इस अलग है, लेकिन ज्यादातर मामलों में पिगमेंटेशन की समस्या देगी गई है.
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FIRST PUBLISHED : June 23, 2023, 17:51 IST





