पटना हाईकोर्ट के निर्देश पर दिव्यांगजनों का हो रहा सर्वे, डेटाबेस तैयार कर दिया जाएगा योजना का लाभ

गुलशन कश्यप/जमुई. अगर आप दिव्यांगजन हैं और आज तक आपका दिव्यांगता प्रमाणपत्र नहीं बना है. साथ ही, यदि आपको आज तक दिव्यांगजनों को लेकर चलाई जा रही योजनाओं का लाभ नहीं मिल रहा है. तो यह खबर आपके काम की है. उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद बिहार सरकार घर-घर घूम कर दिव्यांगजनों का कोटिवार सर्वेक्षण करा रही है. ऐसे सभी दिव्यांगजनों को चिन्हित किया जा रहा है, जो अभी तक सरकारी योजनाओं से वंचित है और उन्हें प्रमाणपत्र नहीं मिला है. उनका आंकड़ा लिया जा रहा है, ताकि इन सभी डाटा को ऑनलाइन एप पर फीड किया जा सके और वैसे दिव्यांगजनों को भी योजना का लाभ मिल सके तथा उनका दिव्यांगता प्रमाण पत्र बन सके.

22 जून से लेकर 27 जून तक बिहार के जमुई जिले में इस प्रकार का सर्वेक्षण किया जा रहा है, जिसमें आईसीडीएस के कर्मियों को लगाया गया है. राज्य निशक्तता (दिव्यांगजन) समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार के द्वारा यह पूरा कार्यक्रम कराया जा रहा है. जिलाधिकारी (डीएम) अवनीश कुमार सिंह ने बताया कि उच्च न्यायालय के अनुपालन में राज्य आयुक्त निशक्तता (दिव्यांगजन) समाज कल्याण विभाग, बिहार सरकार के निर्देशानुसार बच्चों की दिव्यांगता कोटिवार सर्वेक्षण का कार्य कराया जाना है. इस दौरान जिले के प्रत्येक वार्ड में सर्वेक्षण कार्य किया जाना है. आवश्यकता अनुसार एक या दो दिन तिथि विस्तारित की जा सकती है.

आंगनबाड़ी, एएनएम सहित अन्य कर्मियों को लगाया जायेगा

डीएम ने बताया कि यह कार्य आईसीडीएस की महिला पर्यवेक्षिका, एएनएम कर्मी, डाटा एंट्री ऑपरेटर, कार्यपालक सहायक तथा पंचायतों में कार्यरत विकास मित्र के माध्यम से कराया जाएगा. इसके अलावा, आवश्यक सहयोग के लिए मोबिलाइजर का काम उस वार्ड की सेविका और सहायिका के द्वारा की जाएगी. उन्होंने बताया कि आवंटित वार्ड में कर्मी के द्वारा सर्वेक्षण कार्य को डोर-टू-डोर जा कर आयोग या विभाग के द्वारा विकसित डिसेबिलिटी सर्वे एप में रियल टाइम डाटा भरेंगे. इसमें दिव्यांगता का प्रकार, गृह संख्या, उसी समय मोबाइल फोन से लिया गया फोटो, आधार, बैंक पासबुक आदि के विवरण की आवश्यकता होगी.

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Author: Jagran Times

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