हाइलाइट्स
रिसर्च बताते हैं कि सेंधा नमक में 90 से अधिक मिनरल्स होते हैं.
नींबू पानी में सेंधा नमक मिलाकर पीना काफी लाभकारी होता है.
Swad Ka Safarnama: नमक के बिना भोजन रसहीन है, इसलिए आहार में भोजन अनिवार्य तत्व है. लेकिन बदलती दिनचर्या और एक्सरसाइज की कमी के चलते लोगों पर नमक भारी पड़ने लगा है, इसलिए हेल्थ एक्सपर्ट और योगाचार्य सेंधा नमक खाने की सलाह देने लगे हैं. उसके पीछे कारण यह है कि यह एक तरह से शुद्ध खनिज है और अन्य नमक की तरह इसका निर्माण नहीं किया जाता. सैंधा नमक डायजेशन सिस्टम की गड़बड़ियों से लड़ता है और शरीर को स्वस्थ रखने में मदद करता है. सेंधा नमक की एक विशेषता है कि जो लोग हाई ब्लड प्रेशर से ग्रस्त हैं, वह कम मात्रा में इसका सेवन कर सकते हैं, यह सामान्य नमक की तरह बीपी को बूस्ट नहीं करता है. यह नमक हजारों वर्षों से रसोई की शान बढ़ा रहा है. भारत में तो इसे व्रत उपवास से भी जोड़ा गया है.
प्राकृतिक खनिज है सेंधा नमक
नमक एक ऐसा खाद्य पदार्थ है जो दुनिया के हर देश में उपलब्ध है. असल में जहां समुद्र हैं, वहां इसे बना लिया जाता है. जहां, समुद्र नहीं है, खारा पानी है तो उसे वाष्पित कर नमक तैयार हो जाता है. लेकिन सेंधा नमक एक खनिज है और यह प्रकृति द्वारा हजारों वर्षों से तैयार किया गया है. सेंधा नमक (Rock/Himalayan Salt) को लाहौरी और सैंधव नमक भी कहा जाता है और विशेष क्षेत्र में इसके पहाड़ ओर प्राकृतिक सुरंगे है, इसलिए इसे शुद्ध माना जाता है, क्योंकि खाने योग्य बनाने के लिए इसे किसी भी प्रकार की केमिकल प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ता.
सेंधा नमक वाले पानी के गर्म टब में स्नान करना तनाव दूर होता है. Image-Canva
यह पहाड़ों के नीचे बहने वाले पानी के वाष्पीकरण से बनता है और इसका कलर भी सामान्य सफेद नमक के बजाय क्षेत्र विशेष के हिसाब से हल्का नीला, गाढ़ा नीला, जामुनी, गुलाबी, नारंगी, पीला या भूरा हो सकता है. भारत में इसे सेंधा नमक इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह प्राचीन समय से ही सिंध प्रांत से आ रहा है, जहां हजारों वर्षों से बहुत बड़ा क्षेत्र सेंधा नमक से भरा हुआ है. इसे लाहौरी नमक भी इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यह पुराने वक्त से ही लाहौर शहर से गुजरकर आता था.
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इस नमक को धार्मिक मान्यता भी प्राप्त है
आप हैरान होंगे कि भारत ही एक ऐसा देश है, जहां सेंधा नमक को विशेष धार्मिक मान्यता प्राप्त मिली हुई है. चूंकि भारत व्रत-त्योहारों का देश है, इसलिए इस अवसर पर सामान्य नमक के बजाय सेंधा नमक ही खाया जाता है. पहली तो बात यही है कि यह एक ऐसा नमक है जो फ्रूट्स व ड्राईफ्रूट्स के समान ही प्राकृतिक व शुद्ध है और इसमें केमिकली तौर पर तैयार किए गए साधारण नमक जैसा तीखापन और नमकपन भी कम है. दूसरी बात यह भी है कि व्रत या उपवास के दौरान एक बार ही आहार का सेवन करने का नियम है, इसलिए भोजन में कुछ ऐसा भी खाया जाए जो तुरंत एनर्जी प्रदान करे.
फूड एक्सपर्ट मानते हैं कि सेंधा नमक हल्का और सुपाच्य होता है, साथ ही इसके सेवन से एजर्नी भी तुरंत प्रदान होती है. सेंधा नमक में उस प्रकार के हानिकारण मिनरल्स भी नहीं होते, जो सामान्य नमक में होते हैं, इसलिए इसे व्रत-उपवास में खाया जाता है. नवरात्रों में जो व्रत वाली थाली मिलती है, उसमें सबसे बड़ा योगदान सेंधा नमक का ही होता है.
पर्वतों जितना पुराना है इसका इतिहास
सेंधा नमक का इतिहास भी उतना पुराना है, जितना दुनिया में पहाड़ों का इतिहास है. सिंध क्षेत्र, जहां सेंधा नमक के पहाड़ और गुफाएं हैं, वह तो आजादी से पूर्व भारत का ही हिस्सा था, इसलिए माना जा सकता है कि हजारों वर्ष पहले से भारत में सेंधा नमक मौजूद था और इसका प्रयोग भी किया जा रहा था. अगर हम यह कहें कि सेंधा नमक की उत्पत्ति उत्तर भारतीय उपमहाद्वीप में हुई, तो इसे ठीक माना जाएगा. इन इलाकों में सिंध, पश्चिमी पंजाब के सिन्धु नदी के साथ लगे हुए हिस्सों और ख़ैबर-पख्तूनवा के कोहाट जिले शमिल हैं, जो अब पाकिस्तान में हैं.
सेंधा नमक क्षेत्र विशेष के हिसाब से हल्का नीला, गाढ़ा नीला, जामुनी, गुलाबी, नारंगी, पीला या भूरा हो सकता है. Image-Canva
वैसे तो कुछ हिमालयन क्षेत्र में सेंधा नमक पाया जाता है, लेकिन भारत में अभी भी पुराने क्षेत्र से ही यह नमक आ रहा है. वैसे तो पूरी दुनिया में नमक के कई इलाके हैं, लेकिन सेंधा नमक बहुत कम देशों में नजर आता है. विशेष बात यह है कि सातवीं-आठवीं ईसा पूर्व भारत के आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ में सेंधा नमक (सैन्धवं लवण) का वर्णन है. ग्रंथ में इसे आहार को स्वादिष्ट बताने वाला, नेत्रों के लिए हितकर, त्रिदोषनाशक, कुछ मधुर बताया गया है. ग्रंथ का यह भी कहना है कि जितने भी नमक हैं, उनमें सेंधा नमक श्रेष्ठ है.
इसलिए बढ़ रहा है सेंधा नमक का चलन
विशेष बात यह है कि भारत वर्ष में सेंधा नमक का प्रचलन तेजी से बढ़ रहा है, उसका कारण यह है कि सामान्य नमक को अब ब्लड प्रेशर को बढ़ाने वाला माना जाता है, लेकिन सेंधा नमक की विशेषता यह है कि सामान्य मात्रा में खाए जाने पर यह ब्लड प्रेशर को सामान्य रखता हे. सेंधा नमक के अन्य गुण भी इसे लगातार विश्वसनीय बनाते जा रहे हैं. फूड एक्सपर्ट व होमशेफ सिम्मी बब्बर के अनुसार साधारण नमक की तुलना में सेंधा नमक में सोडियम की मात्रा बहुत कम होती है और आयरन, पोटेशियम, जिंक व मैग्नीशियम की मात्रा अधिक होती है. रिसर्च बताते हैं कि इसमें 90 से अधिक मिनरल्स होते हैं. यह पानी में घुलनशील होता है और पानी के संपर्क में आते ही इसके सभी प्राकृतिक गुण एक्टिव हो जाते हैं.
रोजाना नींबू पानी में सेंधा नमक डालकर सेवन किया जाए तो फेट कम हो सकता है. Image-Canva
आजकल अधिकतर लोग जिंक फूड व अनियमित खानपान के चलते पेट व पाचन संबंधी समस्याओं से दो-चार हो रहे हैं. सेंधा नमक की विशेषता यह है कि इसमें डायजेशन सिस्टम की गड़बड़यों से लड़ने की क्षमता है. यह पेट में गैस नहीं बनने देता और भूख को भी बढ़ाता है. रिसर्च यह भी बताती है कि सेंधा नमक दिमाग और शरीर को आराम पहुंचाने में सहायता करता है. इसका रोजाना सेवन चिंता और तनाव को नियंत्रित कर सकता है. सेंधा नमक वाले पानी के गर्म टब में स्नान करना तनाव दूर होता है और व्यक्ति खुद को तरोताजा महसूस करता है. आजकल तो सेंधा नमक से बने लैंप भी आ गए हैं, जो वायु के हानिकारण विषाक्त पदाथों का स्तर भी कम कर देते हैं.
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शरीर के फेट को बढ़ने से रोकता है
ऐसा भी माना जाता है कि मौजूद मिनल्स के चलते सेंधा नमक शरीर में मौजूद वसा को बढ़ने से रोकता है, ऐसा होने से वजन पर कंट्रोल किया जा सकता है. रोजाना नींबू पानी में सेंधा नमक डालकर सेवन किया जाए तो फेट कम हो जाता है. इसको स्किन के लिए भी लाभकारी माना जाता है. यह स्किन को डिटॉक्सीफाई (विषाक्ता रोकना) कर सकता है ओर डेड स्किन को भी सुधार सकता है. यह स्किन के ऊत्तकों (Tissue) से रोगाणु खत्म कर देता है और उसे चमकदार बना देता है. यह नखूनों को भी स्वस्थ बनाए रखता है. सेंधा नमक के गरारे करने से टॉन्सिल, सूखी खांसी, गले में सूजन और गले के दर्द से राहत भी मिल जाती है. सामान्य तौर पर सेंधा नमक को आहार में शामिल करने से किसी प्रकार के साइड इफेक्ट की संभावना नहीं है, लेकिन अधिक मात्रा में खाने से यह एलर्जी पैदा कर देता है. ब्लड प्रेशर भी बाधित हो सकता है. प्रयास यह करना चाहिए कि इसे अकेले न खाया जाए. वरना यह हानि पहुंचा सकता है.
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FIRST PUBLISHED : June 25, 2023, 07:01 IST






