
मॉस्को. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पिछले 23 वर्षों में सत्ता पर अपनी पकड़ बनाए हुए हैं. लेकिन इन दिनों सबसे गंभीर खतरे का सामना कर रहे हैं. वैगनर ग्रुप के विद्रोह के बाद पुतिन के सामने बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है. पश्चिमी मीडिया ने कहा है कि रूस के लिए अगले आने वाले एक दो दिन बेहद महत्वपूर्ण हैं. विद्रोही वैगनर ग्रुप की ओर से दो शहरों पर कब्जा और आगे कूच करने के दावों से मॉस्को पर बढ़ रहे खतरे पर पुतिन ने रूस की सेना को विद्रोहियों पर सख्त कार्रवाई का आदेश दिया है. सीएनएन के मुताबिक, पुतिन के लिए अगले 24 घंटे अहम हो सकते हैं. वहीं, वैगनर ग्रुप के विद्रोह की यह खबर यूक्रेन के लिए किसी राहत से कम नहीं है.
दरअसल, यूक्रेन युद्ध के बाद रूस के सेना के भीतर से कई तरह की बातें पहले भी सामने आती रही हैं. सीएनएन की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस यूक्रेन युद्ध के बाद व्लादिमीर पुतिन की आलोचना उनके ही देश में पहले भी होती रही है, लेकिन इस तरह के दुस्साहस के बाद पुतिन सत्ता की सख्ती से पुतिन के आलोचक गायब हो जाते रहे हैं. कुछ हादसों का शिकार बनते देखे जाते रहे हैं. इस बार वैगनर आर्मी की बगावत से दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी सेना के सामने सबसे अहम चुनौती खड़ी हो गई है. सेना की यह लड़ाई उनके ही लड़ाकों के साथ शुरू हो रही है, जो यदि समय से नहीं संभली तो मॉस्को के पतन का कारण भी बन सकती है.
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक, वैगनर प्रमुख येवगेनी प्रिगोझिन शुरू से ही पुतिन को लेकर मुखर रहे हैं. यूक्रेन से युद्ध के बाद उनकी नाफरमानी पहले दिखावा के रूप में आंक लिया जाता था, लेकिन आज वैगनर ग्रुप पुतिन की सत्ता को चुनौती देते हुए सामने खड़ा हो गया है. पुतिन को यह स्वीकार करने के लिए मजबूर होना पड़ा कि रोस्तोव ऑन डॉन उनका मुख्य सैन्य अड्डा उनके नियंत्रण से बाहर हो रहा है.
वैगनर ग्रुप के शिविर पर हवाई हमला किसने किया?
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक वैगनर ग्रुप काफी समय से विद्रोह की गतिविधियों पर एक्टिव था. इस विद्रोह का असर अब जाकर सहज रूप में दिखाई देने लगा है. जंगल में वैगनर शिविर पर एक हवाई हमले के बाद विद्रोही और उग्र दिखे हैं, जिस हमले में रूसी रक्षा मंत्रालय ने उनकी किसी भूमिका की बात को खारिज कर दिया है.
रूस में विद्रोह से यूक्रेन को कितनी राहत
जानकारों की मानें तो रूस के भीतर ताजा घटनाक्रम को लेकर यूक्रेन संभवतः जश्न मना रहा होगा. यह जारी रहा तो कीव के पक्ष में युद्ध का रुख बदल देगा. लेकिन रूस में या कहीं भी विद्रोह शायद ही कभी उन परिणामों के साथ समाप्त होते हैं जिन्हें वे प्राप्त करना चाहते हैं. 1917 में रूस में ज़ार निकोलस द्वितीय का निष्कासन बोल्शेविक क्रांति, लेनिन और फिर सोवियत साम्राज्य में बदल गया.
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FIRST PUBLISHED : June 24, 2023, 17:39 IST






