
हिमांशु नारंग/करनाल: विज्ञान ने आज बहुत तरक्की कर ली है. इंसान दूसरे ग्रह तक पहुंच गया है और अब तो मंगल ग्रह पर जीवन की तलाश की जा रही है. चिकित्सा विज्ञान और प्रौद्योगिकी में भी एक से बढ़कर एक कामयाब प्रयोग किए गए हैं, जो कुछ सालों तक असंभव नज़र आते थे.
करनाल एनडीआरआई के वैज्ञानिक एक ऐसा अनुसंधान करने जा रहा हैं, जो अभी हमारे लिए असंभव मालूम पड़ता है. डेयरी क्षेत्र में देश का अग्रणी अनुसंधान संस्थान एनडीआरआई तापमान और हवा के दबाव का पशुओं के शरीर पर प्रभाव जानने के लिए अनुसंधान कर रहा है.
अनुसंधान के लिए संस्थान ने ऐसी विंड ब्लास्ट मशीन तैयार की है, जो न्यूनतम हवा के साथ-साथ 85 किलोमीटर प्रति घंटे की हवा फेंकने में सक्षम है. पशुओं पर इस मशीन के प्रयोग से पता लगाया जा रहा है कि तूफान और पंखों की हवा का पशुओं के दूध उत्पादन और स्वास्थ्य पर क्या असर पड़ता है?
शोध की इसलिए पड़ी जरूरत
संस्थान के निदेशक डॉ. धीर सिंह के नेतृत्व में इस विंड ब्लास्ट तकनीक का लाइव प्रदर्शन किया गया. डॉ. धीर ने बताया कि निकरा प्रोजेक्ट के तहत हम उच्च हवा के दबाव का पशुओं के शरीर पर प्रभाव का अध्ययन कर रहे हैं. अभी तक हमारे पास ऐसा कोई मानक नहीं है, जिससे पता लगा सकें कि कितनी हवा के स्तर तक पशु आराम महसूस कर सकते हैं और हवा के ज्यादा दबाव से उनको क्या नुकसान होता है. इस पर अभी शोध चल रहा है. निदेशक ने कहा कि इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत हम न्यूनतम और अधिकतम तापमान जिस पर पशु आराम महसूस कर सके, उसे सेट करने का प्रयास कर रहे हैं. ताकि किसान और पशुपालक भी उसी तापमान को अपने पशु बाड़े में सेट करें, जिससे उनके पशु के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन पर कोई असर न हो.
तय किया जा रहा मानक
संस्थान के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आशुतोष सिंह ने बताया कि जलवायु परिवर्तन के विभिन्न आयामों पर हमारा 12 साल से शोध चल रहा है. इस दौरान जलवायु परिवर्तन पर जो डाटा हमने इकट्ठा किया है, वह पहले कभी नहीं हुआ. कहा कि शोध के दौरान हमने पाया कि किसान अपने पशु बाड़े में जो पंखा इस्तेमाल करते हैं, उसकी गति मानक के अनुरूप नहीं होती. क्योंकि पशु को जितनी हवा और तापमान चाहिए वह उससे कम या ज्यादा होता है. कहा कि घरों या सभागार वगैरह में तो इसका ध्यान रखा जाता है, किंतु पशु घर में इस पर काम नहीं होता. इसी को देखते हुए हम एक ऐसा मानक तय करें, जिससे पशु को परेशानी न हो.
जल्द जारी करेंगे एडवाइजरी
डॉ. आशुतोष ने बताया कि इस विंड ब्लास्ट मशीन से हमने पाया कि किस गति पर पशु सामान्य या असामान्य व्यवहार करता है. इसका गहनता से अध्ययन करने के बाद हम किसानों को इसकी सिफारिश करेंगे कि साल के किस मौसम में कितनी रफ्तार से हम पंखा चलाएं, जिससे पशुओं के स्वास्थ्य पर गलत प्रभाव न पड़े. कहा कि प्राकृतिक तूफानों और आपदाओं के बाद पशु पर हुए प्रभाव को कम करने के लिए उसे क्या खुराक दी जाए इस पर भी हम एडवाइजरी जारी करेंगे.
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FIRST PUBLISHED : June 24, 2023, 17:01 IST






