
शानू कुमार/बरेली. नाथ नगरी बरेली में प्रसिद्धि सात नाथ के मंदिर चारों दिशाओं में बने हैं जिनमें से एक तपेश्वर नाथ मंदिर है. जो सुभाष नगर क्षेत्र में स्थित है. यहां श्रद्धालुओं का प्रतिदिन तांता लगा रहता है और रोजाना सुबह 4 बजे से ही जलाभिषेक शुरू हो जाता है और श्रद्धालु अपनी मनोकामना लेकर मंदिर आते हैं.
मंदिर के महंत बाबा लखन दास ने मंदिर के बारे में बताया मंदिर को साधु संतों की तपसस्थली माना जाता है. मंदिर का पौराणिक इतिहास 5 हज़ार वर्ष पुराना माना जाता है. पूर्व में यहां जंगल समान वन था, यहां एक बाबा ने 400 साल तक कठोर तपस्या की थी. तपस्या के समय उनके शरीर पर भालू के सामान बाल होने के कारण उन्हें भालू दास बाबा के नाम से पुकारा जाने लगा और बाबा भालू दास की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव जी ने दर्शन दिए. साथ ही वहां मंदिर को तपेश्वर नाथ मंदिर नाम देने को कहा और सेवा करने को कहा जिसके बाद मंदिर का नाम तपेश्वर नाथ पड़ गया और यहाँ मंदिर की पहचान अलग बन गई.
कई महंतों ने की थी तपस्या
महंत बाबा लखन दास ने बताया कि बाबा भालू दास जी के 400 वर्ष कठोर तपस्या करने के बाद मंदिर का नाम तपेश्वर नाथ पड़ा लेकिन तपस्या करने का सिलसिला यहां नही रुका. उसके बाद कई महंतों, ऋषियों और साधुओं ने तपस्या की थी जिससे भगवान शिव जी हमेशा प्रसन्न रहे और यहां आने वाले श्रद्धालुओं की मनोकामना को पूर्ण करते रहे.
बाबा रामलखन दास महाराज रहे 12 साल मौन, नाम पड़ा \”मौनी बाबा\”
महंत बाबा लखन दास ने बताया कि उनसे पहले महंत रहे बाबा रामलखन दास महाराज 12 वर्ष तक मौन रहे थे और उन्होंने 12 वर्ष तक खाना नहीं खाया था सिर्फ फल खाते थे और किसी से कुछ नहीं बोलते थे. इसी कारण उनका नाम मौनी बाबा भी पड़ गया था. उनकी मृत्यु होने के बाद उनकी समाधि मंदिर प्रांगण में हुई थी. जिसके बाद से महंत बाबा लखनदास ही मंदिर के महंत हैं. मंदिर के महंत के अनुसार मंदिर में जिन बाबा ने यहां तपस्या की थी. उनकी मृत्यु के बाद मंदिर में ही उनकी समाधि बनाई गई थी.
मंदिर परिसर में नहीं है साधु संतों के रुकने और विश्राम की व्यवस्था
मंदिर के महंत बाबा लखनदास ने बताया कि मंदिर में अयोध्या के साथ साथ कई पावन जगह से साधु संत आते हैं लेकिन यहां उनके रुकने की व्यवस्था नहीं है. जिससे वह नाराज होते हैं और दिक्कत का सामना उठाना पड़ता है. महंत का कहना है कि जल्द से जल्द यहाँ व्यवस्था हो जाये तो बेहतर रहेगा साधु संतों को रुकने में काफी परेशानी होती है. परिसर में टॉयलेट और बाथरूम की व्यवस्था भी नही है.
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FIRST PUBLISHED : June 24, 2023, 16:32 IST






