गांव का पहला डॉक्टर बनेगा किसान का बेटा, तीसरे प्रयास में नीट में मारी बाजी, ये हैं सक्सेस मंत्र

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शक्ति सिंह/कोटा. जिंदगी में कुछ पाना हो तो खुद पर ऐतबार रखना चाहिए. यह बात बारां जिले में समरानियां के निकट स्थित रामपुर उप्रेती के आशु पर सटीक बैठती है. आशु ने हौसला खोए बिना एक नहीं, दो नहीं, तीन बार नीट का एग्जाम दिया तब जाकर सफलता मिली. अब वह अपने गांव का पहला डॉक्टर बनाने वाला है. आशु की इस सफलता से पूरे गांव में जश्न का माहौल है. साधारण परिवार के आशु ने कठिन मेहनत के दम पर यह मुकाम हासिल किया है.

तीसरे प्रयास में मिली सफलता
आशु ने बताया कि उसने दसवीं कक्षा में 91.6 और बारहवीं में 92 प्रतिशत से अधिक अंक हासिल किए थे. बारहवीं के साथ नीट दी तो 370 ही अंक आए. थोड़ा झटका लगा लेकिन अगले साल ऑनलाइन कोचिंग की. इसमें इतने नंबर नहीं आ सके कि सरकारी मेडिकल कॉलेज मिल जाए.

एक बार तो हिम्मत जवाब दे गई. लेकिन उसके सामने अपना सपना था. इसलिए उसकी समझ में आ गया कि ऑनलाइन कोचिंग में क्लास रूम वाली बात नहीं है. इसके बाद उसने नीट की क्लासरूम कोचिंग लेना शुरू की. इस बार नीट एक्जाम में में 657 अंक आए. ऑल इंडिया रैंक 5254 और केटेगिरी रैंक 1796 रही.

खेती करते हैं पिता
आशु ने बताया कि उसके पिता राजेश किराड़ ने बीएड की थी. नौकरी नहीं मिली तो खुद को खेती में खपा दिया. मां पढ़ी लिखी नहीं हैं. घर की आर्थिक स्थति ठीक नहीं है, फिर भी वे उसको डॉक्टर बनाना चाहते थे. ऐसे में जब टेस्ट में नंबर काम आते थे तो भविष्य को लेकर चिंता होती थी, कई बार मन घबराता था, लेकिन अक्सर निराशा के इन पलों में वह 2-3 घंटे सो जाता था.

इसके बाद बाहर निकलकर दोस्तों के साथ चाय पीता. जब देखता की सभी पढाई में लगे हैं तो वह भी जुट जाता, फिर कुछ याद नहीं रहता. कभी-कभी इससे भी काम नहीं चलता तो अपने पिता से बात करता.

Tags: Kota news, Local18, Rajasthan news

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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