
सनन्दन उपाध्याय/ बलिया. बलिया उत्तर प्रदेश राज्य का एक ज़िला है. यह ज़िला आज़मगढ़ मंडल के अन्तर्गत आता है और उत्तर प्रदेश का सबसे पूर्वी ज़िला है. बलिया जिले की उत्तरी और दक्षिणी सीमा क्रमशः सरयू और गंगा नदियों द्वारा बनाई जाती है. आजादी में भाग लेने वाले जनपद के एकमात्र जीवित स्वतंत्रता संग्राम सेनानी पं. राम विचार पांडेय बलिया के बागी होने के विषय पर जानकारी दिए.
भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में इस जिले के निवासियों के विद्रोही तेवर के कारण इसे \”बागी बलिया\” के नाम से जाना जाता है. इस बलिया के धरती के कण-कण में बगावत है. बागी तेवर ही बलिया को बागी बना दिया. अमर शहीद मंगल पांडेय बलिया जनपद के नगवां गांव के रहने वाले थे. बैरकपुर छावनी में आजादी के महासमर की पहली गोली इन्होंने ही मारी थी. वहां से भी हमको बागी का शब्द मिला. उस समय बलिया जिला नहीं थागाजीपुर जिला था. लेकिन मंगल पांडेय बलिया के नगवां गांव के रहने वाले थे. इसलिए बलिया बागी कह दिया गया.
बागी शब्द में छिपा है बलिदानों के प्राणों की आहुति देने का तेवर
18 अगस्त 1942 में जनपद के बैरिया क्षेत्र में थाने पर झण्डा फहराने के लिए 18 लोग शाहिद हुए और 4 लोग लापता होगए. इस तरह 22 लोग वहां के भूमि पर बलिदान होगए. सुखपुरा में 23 अगस्त को चंडी प्रसाद के नेतृत्व में दो लोग गोली खाए और 01 लोग लापता होगए. कुलदीप सिंह लापता होगए और गौरीशंकर सोनार तथा चंडी प्रसाद गोली मारे गए.यहीं नहीं महंत जी का हाथी और कुत्ता जब अंग्रेजो पर टूट पड़ा तो उसको गोली मारा और हाथी चीघाड़ा तो उसको भी गोली मारी गई.
चरउआ भी था आजादी में योगदान देने वाला क्रांतिकारी गांव
चरउआ में मकतूरिया मालिम थी. उसने बलिदान दिया तो तोप से उड़ा दी गई. उसकी लासनहीं मिली. इस तरह अपने मातृभूमि के लिए प्राणों का न्योछावर करने वाली यह धरती आज भी बागी हैऔर बगावत इसका धर्म है. दानवीर राजा बलि यही के थे. जिन्होंने अपनी पूरी पीठ नाप दिया भगवान को लेकिन सरेंडर नहीं किया.ये नहीं कहे कि हम आपके अधीन हैं, भगवान ने कहा हम नाप लें उन्होंने कहा कि नाप लीजिए और भगवान ने नाप लिया और बलि ने बलिदान कर दिया.यही भृगु बाबा थे. जिनके पाप का प्रायश्चित भी इसी धरती पर हुआ. तो इस तरह से बलिया बन गया बागी बलिया.
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FIRST PUBLISHED : June 24, 2023, 12:11 IST






