पुश्तैनी काम को अपना इन दो भाइयों ने किया कमाल, इनके गुलाब हलवा और मावा कचोड़ी के लोग हैं दीवाने

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रवि पायक/भीलवाड़ा. आधुनिक दौर में आधुनिक शिक्षा के साथ युवा नया आयाम स्थापित कर रहे हैं. तो वहीं भीलवाड़ा शहर के रहने वाले 2 भाई इन दिनों मिठाई के बिजनेस को लेकर आगे बढ़ रहे हैं. अपनी नई तकनीक और नए आईडिया को अपनाते हुए वह स्वाद के शौकीनों के बीच अपनी लोकप्रियता हासिल कर रहे हैं. और यही नहीं अपने परंपरागत काम को भी आगे बढ़ा रहे हैं.

यहां पर डिमांड इतनी है कि स्वाद के दीवानों को एडवांस बुकिंग करनी पड़ती है यही नहीं यहां पर जैन लोगों के लोगों के लिए स्पेशल जैन कचोरी-मिठाई और केला कोफ्ता भी लोगों के लिए पहली पसंद बना हुआ है. भीलवाड़ा के रहने वाले अंकुश और आयुष जैन कहते है कि शुरुआती दौर में उनके दादा जी ने इसकी शुरुआत की और पाली में जाकर उन्होंने काफी संघर्ष किया इसको देखते हुए हमने तय किया कि हम अपने नए-नए आइडिया को लेकर अपने दादाजी के द्वारा बनाए गए नाम पहचान डालचंद शांतिलाल बलोटा को आगे बढ़ाएं.

दादा ने शुरू किया था बिजनेस
भीलवाड़ा शहर के सिंधु नगर में मुकंन स्वीट के नाम से अपनी सेकंड ब्रांच लगाने वाले आयुष जैन ने कहा,  ‘लगभग 40 साल पहले हमारे दादा जी डालचंद बालोटा ने भीलवाड़ा से पाली में जाकर कैटरर्स का काम किया. भीलवाड़ा में स्वाद के शौकीन तो बहुत है मगर उन्हें गुलाब हलवा और मावे की कचोरी खाने को नसीब नहीं होती तो हमने पाली और मारवाड़ का स्वाद भीलवाड़ा जिले में लेकर आए हैं. यहां पर मुख्य रूप से गुलाब हलवा, मावे की कचोरी और लहसुन प्याज का कोफ्ता लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. यही नहीं यहां पर लोग अलग-अलग प्रकार की मिठाइयों का भी लुत्फ़ उठाते हैं. जिसे खाने के लिए लोग बेसब्री से इंतजार करते हैं’.

जैन स्पेशल पकवान
आयुष जैन बताते है कि वैसे तो हम स्वयं जैन समाज से आते हैं और हमने हमारे समाज में देखा है कि कई लोग आलू प्याज और लहसुन का सेवन नहीं करते हैं इसको देखते हुए हमने स्पेशल जैन कचोड़ी व मिठाई और केला कोफ्ता बनाया है जो कहीं ना कहीं लोगों को काफी पसंद भी आते हैं. कोई ग्राहक खाने से पहले उसे चखना चाहे तो वह चख भी सकता है यही नहीं फोन कॉल के माध्यम से कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन बुकिंग भी करवा सकता है.

स्वाद के दीवाने लोग
वहीं दूसरी तरफ ग्राहक नीलम चौधरी कहती है कि मैं वैसे तो मैं सुवाणा की रहने वाली हूं. मगर मुझे यहां की कचोड़ी इतनी पसंद है कि मैं सिर्फ यहीं पर कचोड़ी खाने के लिए आती हूं. दिलीप सिंह कहते हैं कि जिस तरह मैंने कभी मारवाड़ में गुलाब हलवा खाया था वैसा का वैसा स्वाद यहां पर भी ग्राहकों को मिल रहा है और भीलवाड़ा में कहीं भी गुलाब हलवा नहीं मिलता है. मगर यह केवल एक मात्र ऐसी दुकान है जहां पर यह गुलाब हलवा मिलता है वाकई में यह स्वाद में बिल्कुल गुलाब के जैसा है.’

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FIRST PUBLISHED : June 24, 2023, 10:08 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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