
सोशल मीडिया में चेतेश्वर पुजारा के वेस्टइंडीज दौरे के लिए नहीं चुने जाने पर बवाल नहीं मचा जैसा कि विराट कोहली या रोहित शर्मा के नहीं चुने जाने पर होता. ख़ैर, कोहली और रोहित तो दूर की बात, बहुत से आलोचकों को ये बात अभी भी ज़्यादा खटक रही है कि मुंबई के सरफराज़ ख़ान को आखिर कब चुना जाएगा जबकि पुजारा के टीम में नहीं होने को एक तरह से अवश्यंभावी फैसले के तौर पर उसी समय से देखा जाने लगा था जब वो लंदन के ओवल मैदान में ऑस्ट्रेलिया के ख़िलाफ WTC फाइनल की दोनों पारियों में नाकाम हुए थे.
लेकिन, अगर आप पुजारा के चाहने वालों में से हैं तो आपको इस बात पर निश्चित तौर पर मायूसी होगी कि आखिर इसी खिलाड़ी को वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल में नाकामी के लिए बलि का बकरा क्यों बनाया गया? पुजारा आधुनिक क्रिकेट में एक ऐसे अपवाद वाले खिलाड़ी है जो टेस्ट क्रिकेट के स्पेशलिस्ट के तौर पर देखे जाते हैं. इसका उन्हें हमेशा नुकसान ही होता है. क्योंकि टीम के दूसरे खिलाड़ी आईपीएल में या फिर वनडे या टी20 क्रिकेट में रन बनाकर अपने टेस्ट क्रिकेट के साधारण आंकड़ों को ढकने में कामयाब हो जाते हैं लेकिन पुजारा के साथ ऐसा नहीं हो पाता है.
कहने वाले निश्चित तौर पर ये तर्क दे सकते हैं कि पिछले साल इंग्लैंड के ख़िलाफ एजबेस्टन टेस्ट में वापसी करने के बाद से पुजारा ने ऐसा कोई कमाल नहीं दिखाया है. 2020 के बाद से टेस्ट क्रिकेट में उनके आंकड़े बेहद साधारण रहे हैं. लेकिन, अगर आपको ये बताया जाय कि पुजारा का इस दौर में 29.69 का औसत ( 28 मैचों के दौरान) एकदम कोहली के औसत ( 29.69) जैसा ही है, भले कोहली ने उस दौरान 25 मैच ही खेले हैं तो क्या आप यकीन करेंगे! लेकिन कोहली तो किंग हैं और बादशाह के टेस्ट फॉर्म के बारे में सवाल करने की हिम्मत कितने लोगों में हो सकती है. आप और हम तो छोड़ दें, चयनकर्ताओं में ही ये दम नहीं जिनका मुख्य काम ही भारत के लिए बेस्ट टीम चुनना है. चलिये, कोहली और पुजारा की कोई तुलना नहीं हो सकती है और इस तर्क को माना जा सकता है लेकिन पुजारा की ही तरह अंजिक्य रहाणे भी तो सिर्फ टेस्ट क्रिकेट ही खेलते हैं और पिछले 15 महीनों से वो टेस्ट टीम से बाहर थे. इसकी वजह थी ओवल टेस्ट से पहले 19 मैचों में उनका 25 से भी कम का औसत. लेकिन, ओवल में रहाणे को पैट कमिंस की एक नो बॉल ने ना सिर्फ जीवनदान उस पारी में दिया बल्कि उनके टेस्ट करियर में भी एक नई जान फूंक दी है. अब रहाणे टेस्ट टीम के अहम बल्लेबाज़ ही नहीं बल्कि उप-कप्तान भी हैं. इसका मतलब ये भी है कि चयनकर्ता और बीसीसीआई ये मानकर भी चल रही है कि अगर वनडे वर्ल्ड कप के बाद रोहित शर्मा के अलावा टेस्ट कप्तानी के नाम पर किसी दूसरे विकल्प के बारे में सोचने की नौबत आ पड़े तो उनके पास रहाणे जैसा विकल्प मौजूद हो. क्योंकि जो तीन खिलाड़ी इस भूमिका के लिए पिछले कुछ सालों से तैयार किए जा रहे थे वो तीनों फिलहाल अनफिट हैं. केएल राहुल, जसप्रीत बुमराह और ऋषभ पंत.
ख़ैर, जब बात राहुल की चली है तो उनके साथ साथ युवा ओपनर शुभमन गिल के आकंड़ों पर भी ग़ौर फरमाया जा सकता है जो पिछले दो सालों में पुजारा की तुलना में बेहद कामयाब नहीं रहे हैं. गिल का औसत (32.89, 16 मैचों में), राहुल का औसत (30.28. 11 मैचों) में ये दिखाता है कि पिछले कुछ सालों में भारतीय बल्लेबाज़ों ने देश और विदेश दोनों जगह पर सामूहिक तौर पर ख़राब खेल दिखाया है और हर बार किसी तरीके से निचलेक्रम के बल्लेबाज़ों के रनों के चलते टीम इंडिया कई मौकों पर संकट से उबरने में किसी तरह से कामयाब रही है.
ऐसे में सवाल ये उठता है कि आखिर पुजारा को ही बलि का बकरा क्यों बनाया गया? मुमकिन है कि कि उनकी उम्र( 35 साल) उनके आड़े आ रही हो. वैसे भी पुजारा 103 टेस्ट खेल चुके हैं और भारत का अगला मुश्किल दौरा इस साल के अंत में साउथ अफ्रीका का होगा जहां पर पिछले 4 दौरे के दौरान पुजारा के बल्ले से 19 पारियों में सिर्फ एक ही शतक निकला है. हो सकता है इन बातों को ध्यान में रखते हुए ही यशस्वी जायसवाल और ऋतुराज गायकवाड़ जैसे खिलाड़ियों पर चयनकर्ताओं ने भरोसा दिखाया है.
ख़ैर, अगर ये पुजारा के टेस्ट करियर का अंत साबित होता है तो उन्हें अपनी यात्रा पर फख़्र होना चाहिए. आने वाले वक्त में बहुत कम खिलाड़ी ऐसे होंगे जो 100 मैच लाल गेंद में भारत के लिए खेलेंगे, सच तो ये है कि रोहित शर्मा जैसे धुरंधर भी शायद 100 टेस्ट क्लब का हिस्सा ना हो पाएं, लेकिन पुजारा ने अपने बल्ले से ऑस्ट्रेलिया में जिस तरह से असाधारम खेल दिखाया उसे यूं ही आसानी से कभी नहीं भुलाया जा सकता है. पुजारा में भले ही आपको रोहित-कोहली वाला ग्लैमर ना दिखे या फिर रहाणे जैसा रोमांचकारी स्ट्रोक-प्ले लेकिन एक अल्टीमेट टीम मैन के तौर पर पुजारा का पिछले एक दशक में कोई जोड़ भी नहीं था जिसने ज़्यादातर मौकों पर अपनी टीम की रैंकिग नंबर 1 या 2 रहने में अहम भूमिका निभाई.
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Tags: Cheteshwar Pujara, Team india
FIRST PUBLISHED : June 24, 2023, 09:18 IST






