हाइलाइट्स
हर छठे भारतीय पर उनकी इनकम से दोगुना लोन.
काम छूट जाए तो ज्यादातर भारतीयों के पास महीना चलाने लायक पैसे भी नहीं.
इमरजेंसी फंड रखना भी उतना ही जरूरी जितना लॉन्ग टर्म सेविंग.
नई दिल्ली. जब भी पैसों की बात आती है, हम भारतीय लॉन्ग टर्म प्लान करते हैं. हमारी फाइनेंशियल प्लानिंग में हमेशा 12-15 साल या उससे ज्यादा टाइम बाद के गोल्स रहते हैं. जैसे बच्चों की हायर एजुकेशन, रिटायरमेंट आदि. इसके अलावा ज्यादातर भारतीय हैंड टू माउथ सिचुएशन में जीते हैं. पर्सनल फायनेंस प्लैटफॉर्म फिनोलॉजी के सर्वे की मानें तो 75 फीसदी भारतीयों के पास आड़े वक्त यानी इमरजेंसी के लिए कोई फाइनेंशियल प्लानिंग, कोई तैयारी नहीं है.
फिनोलॉजी ने India’s Money Habits टाइटल से एक रिपोर्ट शेयर की है. इस रिपोर्ट के लिए प्लैटफॉर्म ने 3 लाख लोगों पर सर्वे किया है. रिपोर्ट के मुताबिक, हर चार में से एक भारतीय ऐसा है, जिसकी नौकरी चली जाए तो उसके पास अगला महीना चलाने के लिए भी पैसा नहीं होगा. 75 फीसदी भारतीय ऐसे हैं जिनकी रेगुलर इनकम प्रभावित हुई तो वो अपने लोन की EMI तक नहीं चुका पाएंगे. इस सर्वे में 29 फीसदी रिस्पॉन्डेंट्स ने जवाब दिया कि उनकी सैलरी ही 15 दिन सेज्यादा नहीं चलती है.
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कर्ज के जाल में फंसा हर छठा भारतीय
इस सर्वे में ये भी सामने आया कि हर छठे भारतीय पर उसकी इनकम से दोगुना लोन है. इनमें से 57 फीसदी का मानना है कि वो अपनी इनवेस्टमेंट्स बेचकर लोन चुकाएंगे, वहीं 24 फीसदी का कहना था कि वो दूसरा लोन लेकर पहला लोन चुकाएंगे. 5 प्रतिशत ने कहा कि वो परिवार और दोस्तों से उधार लेंगे, वहीं, 15 फीसदी ने कहा कि वो EMI स्किप कर देंगे.
क्यों ज़रूरी है आड़े वक्त के लिए तैयार रहना?
क्योंकि जिंदगी लीनियर नहीं चलती. इसमें अप्स एंड डाउन्स आते रहते हैं. जैसे कोविड 19 पैनडेमिक आई तो कई लोगों का काम ठप हो गया, इन दिनों ले ऑफ का जो दौर चल रहा है, उसे देखते हुए भी ये ज़रूरी लगता है कि कम से कम इतना लिक्विड फंड होना चाहिए कि रेगुलर इनकम नहीं होने पर भी कुछ महीने खर्च आराम से निकाला जा सके या फिर अचानक आने वाले किसी बड़े खर्च के लिए किसी से लोन न लेना पड़े.
जितना ज़रूरी लॉन्ग टर्म फाइनेंशियल प्लानिंग है, उतना ही ज़रूरी है इमरजेंसी फंड रखना.
ये है सेविंग का सबसे आसान तरीका!
आपने वो कहावत सुनी है न- बूंद-बूंद से घड़ा भरता है. बस वही रूल अपनाना है पैसों की सेविंग के लिए.सबसे पहले तो दो बैंक अकाउंट रखिए. एक जिसमें सैलरी आती है और जिससे आप खर्च करते हैं और दूसरा जिसमें आप पैसे सेव कर सकते हैं. अब आप अपने इनकम और जरूरी खर्चों का हिसाब करें. जरूरी खर्च निकालने के बाद अगर आपके अकाउंट में 5 हजार भी बचते हैं तो इसमें से 1000-2000 का एक छोटा अमाउंट अपने सेविंग अकाउंट में ट्रांसफर करना शुरू करें.
एक तरीका ये भी है कि आप अपने इमरजेंसी फंड को महीने के एसेंशियल खर्चों में शामिल करें. मतलब सैलरी आते ही एक फिक्स अमाउंट इमरजेंसी फंड में ट्रांसफर कर दें. इस बात का ध्यान रखें कि इमरजेंसी फंड से आपको तब तक नहीं निकालने हैं जब तक कोई इमरजेंसी न हो और काम होने के बाद कोशिश करें कि इमरजेंसी फंड को जल्द से जल्द कवर अप कर दें. इस तरह आपका फंड बरकरार रहेगा और आपको पैसों की दिक्कत नहीं होगी.
आपकी इनकम जितनी ज्यादा है आपके पास सेविंग्स के उतने ज्यादा ऑप्शन हो सकते हैं. स्मॉल सेविंग्स के अलावा आप ऐसे म्यूचुअल फंड्स में पैसे लगा सकते हैं जिन्हें जरूरत पड़ने पर तुरंत रिडीम किया
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FIRST PUBLISHED : June 24, 2023, 06:25 IST






