10 अगस्त से शुरू होगा फाइलेरिया उन्मूलन का एमडीए अभियान

कौशाम्बी

फाइलेरिया उन्मूलन अभियान के तहत 10 अगस्त से प्रस्तावित सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) कार्यक्रम के लिए प्रथम जिला समन्वय समिति की बैठक बृहस्पतिवार को सम्पन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता मुख्य विकास अधिकारी डॉ रवि किशोर त्रिवेदी ने सम्राट उदयन सभागार में किया । में
मुख्य विकास अधिकारी डॉ रवि किशोर त्रिवेदी ने कहा कि किसी भी अभियान को सफल बनाने के लिए सही रणनीति बहुत जरुरी हैं और आपसी समन्वय से हर कार्य को सफल बनाया जा सकता है । उन्होंने कहा कि एमडीए राउंड को सफल बनाने के लिए शिक्षा विभाग कि अहम् भूमिका हैं| शिक्षक स्कूलों में बच्चो और उनके अभिभावकों के साथ बैठक कर अभियान की जानकारी दे | बच्चो को फाइलेरिया के बारे में बताएं एवं दवा सेवन के फायदे के बारे में भी बताएं ताकि बच्चे अपने घर परिवार को दवा सेवन के महत्त्व को समझा सके |
बैठक में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ सुष्पेंद्र ने विगत वर्ष चले अभियान के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि गतवर्ष में जनपद में 84.48% लोगों ने दवा का सेवन किया था | यह संयुक्त प्रयासों से संभव हो पाया हैं |उन्होंने बताया इस बार भी हमे मिलकर प्रयास करना है ताकि लक्षित व्यक्ति को दवा का सेवन कराकर इस बार का कवरेज सौ प्रतिशत किया जा सके |
बैठक के दौरान जिला मलेरिया अधिकारी अनुपमा मिश्रा ने बताया कि अभियान के अंतर्गत समन्वय समिति की प्रथम बैठक के माध्यम से सभी विभागों, सरकारी एवं गैर सरकारी संगठन के साथ कर समन्वय स्थापित कर, कार्य योजना के अनुरूप अभियान चलाने का प्रयास होगा । अभियान के तहत जिला स्तरीय प्रशिक्षको का प्रशिक्षण कर उनके माध्यम से ब्लॉक स्तर पर आशा व एएनएम को प्रशिक्षित कराया जाएगा । उन्होंने कहा कि गैर सरकारी संगठनों में टेक्नीकल सपोर्ट , रेफ्युजल, समुदाय जागरूकता एवं मीडिया सपोर्ट के लिए संस्थाएं कार्य कर रही हैं।
डीएमओ ने कहा कि वर्ष 2022 में 18.19 लाख लक्ष्य के सापेक्ष 15.36 लाख की आबादी को कवर किया गया एवं दवा का सेवन कराया गया । बैठक में पाथ, यूनिसेफ, डब्लूएचओ, पीसीआई एवं सीफार के प्रतिनिधि मौजूद रहे |
फाइलेरिया को जानिये
जिले मलेरिया अधिकारी ने बताया कि फाइलेरिया एक दीर्घ कालीन विकार हैं और इसके लक्षण संक्रमण के करीब पांच से पंद्रह वर्ष के बाद ही दिखाई पड़ते हैं उन्होंने कहा कि यह बीमारी दिन में कराएँ गए जाँच में नहीं पता चलती है बल्कि इसके लिए रात्रि कालीन जाँच आवश्यक हैं| विभाग के द्वारा रात्रि कालीन कैम्प का आयोजन कर जाँच की जाती है | उन्होंने बताया कि फाइलेरिया यानि हाथी पाँव सिर्फ पैर में नहीं बल्कि हाथ, स्तन, एवं पुरषों के अंडकोष में भी होती हैं | इस बीमारी की वजह से व्यक्ति में दिव्यांगता भी हो सकती हैं | उन्होंने कहा कि इससे बचाव के लिए अभियान के दौरान दवा का सेवन बहुत जरुरी हैं | दवा का सेवन स्वास्थ्य कार्यकर्ता के सामने करना है । यह बीमारी क्यूलेक्स प्रजाति के मादा मच्छरों के काटने से होती है। घरों के आसपास साफ सफाई और मच्छरों से बचाव के उपाय भी इस बीमारी से बचाते हैं।
फाइलेरिया के लक्षण कुछ इस प्रकार हैं
• बार-बार बुखार आना
• अंगों, जननांगों और स्तनों में सूजन
• हाइड्रोसील यानि अंडकोष में होने वाली सूजन)
• त्वचा का एक्सफोलिएट होना
• हाथों और पैरों में सूजन

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Author: Up Head Line

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