
वॉशिंगटन. पीएम नरेंद्र मोदी का अमेरिका दौरा दोनों ही देशों के बीच स्थापित संबंधों के लिहाज से तो महत्वपूर्ण रहा है, भारत को आर्थिक और तकनीकी रूप से भी इसके कई अहम मायने हैं. पीएम मोदी का ये दौरा भारतीय सेना की ताकत को और अधिक तकनीकी ताकत देगा तो वहीं अंतरिक्ष की उड़ान में भी नासा का सहयोग दिखेगा. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मौजूदगी में दोनों की देशों के बीच जो समझौते हुए हैं उनमें बिजनेस डील के तहत अमेरिकी कंपनियां भारत का रुख करने लगेंगी.
रक्षा के क्षेत्र में जो करार हुआ है उसके बाद अब भारत में लड़ाकू जेट इंजनों का उत्पादन शुरू हो जाएगा. अभी भारत अमेरिका और रूस से जो लड़ाकू विमानों के जेट इंजन खरीदता रहा है उनका उत्पादन भारत में ही होने लगना बड़ी उपलब्धि है. इस रक्षा समझौते में जीई एयरोस्पेस ने भारतीय वायुसेना आईएएफ के हल्के लड़ाकू विमानों ‘एलसीए’ एमके 2 तेजस के लिए संयुक्त रूप से लड़ाकू जेट इंजनों का उत्पादन करने के लिए हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड ‘एचएएल’ के साथ एक करार किया गया है. इस समझौते में भारत में जीई एयरोस्पेस के एफ 414 इंजनों का उत्पादन भी शामिल है. जीई एयरोस्पेस इसके लिए आवश्यक निर्यात अधिकार हासिल करने के लिए अमेरिकी सरकार के साथ काम कर रही है.
भारत ड्रोन टेक्नोलॉजी में चीन को देगा टेंशन
इसके साथ ही भारत ड्रोन निर्माण में आधुनिक तकनीक के साथ आगे बढ़ेगा. पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति की वार्ता के बाद हुए हस्ताक्षर करार के बाद भारत द्वारा जनरल एटॉमिक्स के एमक्यू .9 रीपर हथियारबंद ड्रोन की खरीद को लेकर भी बड़ी डील हुई है. इस ड्रोन के भारत आने के बाद चीनी खुराफात को काफी हाद तक रोकने में मदद मिलेगी. रीपर ड्रोन से हिंद महासागर और चीन के साथ सीमा पर भी भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा और निगरानी क्षमताओं को मजबूती मिलेगी. पहले के एमक्यू 1 प्रीडेटर की तुलना में इसमें नौ गुना अधिक ताकत है.
गुजरात में होगा बड़ा निवेश
इस बीच अपने पीएम मोदी ने गुजरात को भी बड़ा तोहफा दिया है. अमेरिकी कंप्यूटर चिप मेकर कंपनी माइक्रॉन ने गुजरात में 2.7 अरब डॉलर के निवेश का फैसला लिया है. कंपनी की ओर से गुजरात में असेम्बलिंग और टेस्टिंग प्लांट स्थापित किया जाएगा. पीएम नरेंद्र मोदी के साथ कंपनी के सीईओ संजय मेहरोत्रा की मीटिंग के बाद इस फैसले का ऐलान किया गया. सरकार की एटीएमपी स्कीम के तहत इस प्लांट को मंजूरी दी गई. इस स्कीम में असेम्बलिंग, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग शामिल है.
इसरो और नासा के बीच अहम अंतरिक्ष करार
इसके अलावा भारत और अमेरिका के बीच अर्टेमिस एकॉर्ड्स पर भी मुहर लगी है. इसके तहत दोनों देश अंतरिक्ष खोज पर साथ काम करेंगे. नासा और इसरो ने इस करार के तहत अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन पर 2024 में एक साथ काम करने का फैसला लिया है. 1967 की बाहरी अंतरिक्ष संधि ओएसटी में दरकिनार कर दिया गया आर्टेमिस समझौता ऐसे सिद्धांतों का गैर बाध्यकारी सेट है, जिसे 21वीं सदी में नागरिक अंतरिक्ष अन्वेषण को निर्देशित करने और इस्तेमाल करने के लिए डिजाइन किया गया है. यह 2025 तक मनुष्यों को चंद्रमा पर लौटा लाने का अमेरिकी नेतृत्व वाला मिशन है, जिसका अंतिम लक्ष्य मंगल और उससे आगे अंतरिक्ष अन्वेषण का विस्तार करना है.
भारत में बनेंगे सेमीकंडक्टर
भारत और अमेरिका के बीच आईसीईटी करार भी हुआ है. इसके तहत दोनों देश टेक रिसर्च, सिविलियन स्पेस, क्वांटम टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन के मामले में साथ आएंगे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में सेमीकंडक्टर विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए अमेरिकी चिप निर्माता माइक्रोन टेक्नोलॉजी को आमंत्रित किया, क्योंकि हमारा मुल्क इस प्रोडक्ट की सप्लाई चेन के कई हिस्सों में फायदे दिलाता है. उन्होंने प्रक्रिया प्रौद्योगिकी और उन्नत पैकेजिंग क्षमताओं के विकास के लिए भारत में एप्लाइड मैटेरियल्स को भी आमंत्रित किया.
बेंगलुरु और अहमदाबाद में दो नए वाणिज्य दूतावास
एक और कूटनीतिक करार में दोनों देशों के नागरिकों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका बेंगलुरु और अहमदाबाद में दो नए वाणिज्य दूतावास ‘कॉन्स्यूलेट’ खोलेगा, जबकि भारत सिएटल में एक मिशन स्थापित करेगा.
एच 1बी वीजा से भारतीयों को फायदा
इसके साथ ही अमेरिका अब ऐसा एच 1बी वीजा पेश करने के लिए तैयार है, जिसे देश में रहकर ही रिन्यू किया जा सकेगा. इससे अमेरिका में रहने वाले हजारों भारतीय पेशेवरों को अपने वर्क वीजा के नवीनीकरण के लिए विदेश यात्रा की परेशानी के बिना अपनी नौकरी जारी रखने में मदद मिलेगी.
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FIRST PUBLISHED : June 23, 2023, 17:10 IST






