
इंदौर. देशभर में सफाई में अव्वल इंदौर स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी नंबर वन बनने की तैयारी कर रहा है. यहां के डॉक्टर जटिल से जटिल बीमारियों के इलाज में नए कीर्तिमान गढ़ रहे हैं. ऐसी एक बीमारी मीडियन आर्कुएट लिगामेंट सिंड्रोम का उपचार पहली बार लेप्रोस्कोपी के माध्यम से किया गया है. यहां के शैल्बी अस्पताल में 18 साल के सुमित यादव को पेट दर्द की अजीबो गरीब समस्या हो रही थी. जब यहां के लेप्रोस्कोपी और बेरियाट्रिक सर्जन डॉ. अचल अग्रवाल ने इसकी जांच की तो पता चला कि मरीज को मीडियन आर्कुएट लिगामेंट सिंड्रोम की बीमारी है.
यह बहुत ही रेयर किस्म की बीमारी होती है. दरअसल, हार्ट से शरीर को खून पहुंचाने वाली नस को एओर्टा कहा जाता है, जिसमें से एक नस निकलती है जो आमाशय और लीवर को खून पहुंचाती है. मीडियन आर्कुएट लिगामेंट नाम के इस सिंड्रोम में उस नस में मांसपेशियों की एक मोटी परत बन जाती है और इस कारण खून के पहुंचने में समस्या होने लगती है.
खतरनाक है बीमार
इस बीमारी में खाना पचाने में तकलीफ, भूख न लगना, उल्टी आना, पेट में दर्द और तनाव, पेट में भारीपन, दस्त, वजन कम होना, थकान जैसी समस्याएं होती हैं. मरीज दिनभर तड़पता रहता है और वो खाने से डरने लग जाता है. मरीज की नस से इस मोटी परत को निकालना काफी जोखिम भरा काम होता है, लेकिन डॉक्टरों ने बड़ी मेहनत से यह सफल ऑपरेशन किया. लेप्रोस्कोपी पद्धति से यह ऑपरेशन बेहद चुनौतीपूर्ण था, लेकिन केवल तीन छोटे-छोटे चीरे लगाकर ही इसका सफल निदान कर दिया गया, जिसमें मरीज को ऑपरेशन के 6 घंटे बाद से ही तरल पदार्थ देना शुरू कर दिए गया और अगले ही दिन उसे हॉस्पिटल से छुट्टी भी दे दी गई.
केवल दो दिनों में सुमित यादव पूरी तरह से रिकवर हो गया. सेंट्रल इंडिया में पहली बार लेप्रोस्कोपी के माध्यम से यह ऑपरेशन किया गया. हालांकि इस बीमारी का इलाज पहले दवाइयों से किया जाता है, लेकिन फिर भी समस्या बनी रहती है तो ऑपरेशन ही एकमात्र उपाय बचता है. सुमित यादव काफी समय से इस बीमारी से पीड़ित था, जिसका दूरबीन पद्धति से सफल ऑपरेशन किया. मीडियन आर्कुएट लिगामेंट की सफल सर्जरी दूरबीन पद्धति से पहली बार हुई है.
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FIRST PUBLISHED : June 23, 2023, 12:58 IST






