हरियाणा के इस शहर में भी है बुलंद दरवाजा, पृथ्वीराज चौहान ने करवाया था निर्माण, जानिए इतिहास

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संदीप सैनी/हांसी. हरियाणा में ऐतिहासिक रूप से सबसे समृद्ध नगरों में से एक है हांसी शहर. राजपूतों और मुगलों के जमाने की अनेक ऐतिहासिक निशानियां आज भी इस शहर में देखी जा सकती हैं. यहां कि सबसे प्रमुख धरोहरों में से एक है शहर के बींचो-बीच स्थित बुलंद दरवाजा. जिसे बड़सी गेट के नाम से जाना जाता है. ऐतिहासिक बड़सी गेट को देखकर, देखने वाले दंग रह जाते हैं.

हरियाणा में प्राचीन धरोहरों की कोई कमी नहीं है. यहां के हर कोने में इतिहास की अनेकों तस्वीरें देखने को मिलती हैं.फिर चाहे वो धर्म नगरी कुरूक्षेत्र हो या फिर पानीपत. जहां तीन अहम लड़ाईयां लड़ी गई. आज हम आपको ऐसे ही एक ऐतिहासिक बुलंद दरवाजे के बारे बताएंगे. जिसकी सुदंरता और इतिहास दोनों अदभुत हैं. ऐतिहासिक बुलंद दरवाजा हरियाणा के प्रमुख धरोहरो में से एक और शहर के बीचों-बीच स्थित है जो हांसी की सुदंरता में चार-चांद लगा देता है.

बड़सी गेट का इतिहास
इतिहासकार जगदीश सैनी बताते हैं कि ये देश में अपनी तरह का एकमात्र दरवाजा है.इस बुलंद दरवाजे का निर्माण 1167 में राजपूत काल के दौरान माना जाता है. बड़सी गेट को आरंभ में भट्ट दरवाजा भी कहा जाता था. कई इतिहासकार मानते हैं कि मुगल शासक अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में बड़सी गेट को नया रूप दिया गया था.क्योंकि इससे पूर्व राजपूत काल में हुए हमलों में किले का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो गया था. सुरक्षा की दृष्टि से गेट की दीवारों में करीब 50 छेद बनाए गए हैं. जिनके पीछे खड़े होकर सैनिक दुश्मन को दूर तक देखने औऱ उन पर हमला करने में सक्षम थे. इतिहासकारों के अनुसार 1857 की क्रांति में बड़सी गेट के दरवाजों को फारुख नगर ले जाया गया था.

इंग्लैंड के संग्राहलय में है निर्माण से संबंधित शिलालेख
सम्राट पृथ्वीराज चौहान के द्वारा बुलंद दरवाजे के निर्माण से संबंधित एक शिलालेख इंग्लैंड के स्कॉटलैंड में स्थित एक संग्राहलय में रखा हुआ है. बताया जाता है कि संस्कृत भाषा में लिखे इस शिलालेख को ब्रिटिश काल में कर्नल टॉड ने तत्कालीन गवर्नर वारेन हेस्टिंग्स को भेंट किया था. जिसके बाद यह शिलालेख इंग्लैंड के संग्राहलय में भेज दिया गया. इतिहासकार बताते हैं कि इस शिलालेख पर संस्कृत भाषा में सम्राट पृथ्वीराज चौहान की स्तुति लिखी गई है.

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FIRST PUBLISHED : June 17, 2023, 13:38 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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