
शिखा श्रेया/रांची. बुधवार को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी ने नीट 2023 का रिजल्ट घोषित कर दिया. रिजल्ट की घोषणा के बाद झारखंड की राजधानी रांची के हरमू में रहनेवाले आदित्य अस्थाना ने एआईआर 993 रैंक सुरक्षित कर लिया है. आदित्य रांची के डीपीएस स्कूल के छात्र रह चुके हैं. स्कूल खत्म होने के बाद आदित्य ने 1 साल सिर्फ नीट परीक्षा के लिए ड्रॉपआउट किया.
आदित्य ने लोकल18 से खास बातचीत की और बताया कि यहां तक का सफर आसान नहीं था. खुद को दो-तीन साल तक मोटिवेट रखना बड़ी चुनौती होती है. लेकिन मां, पिताजी व परिवार के सारे सदस्य और कोचिंग टीचर की मदद से यह जर्नी आसान हो गई. इन लोगों का मेरी सफलता में खास योगदान है. हालांकि मैंने मेहनत तो बहुत की थी और मुझे 400 से 500 के बीच रैंक की उम्मीद थी, लेकिन इस रैंक से भी मैं संतुष्ट हूं.
NCERT की किताबें बारीकी से पढ़ीं
आदित्य बताते हैं कि तैयारी के दौरान एनसीईआरटी की किताबें बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं. इसे किसी भी कीमत पर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. चाहे फिजिक्स, केमिस्ट्री या फिर बायोलॉजी हो. साथ ही क्वेश्चन सॉल्व करना काफी महत्वपूर्ण होता है. मैंने इससे पहले वाले अटेम्प्ट में उतने क्वेश्चन प्रैक्टिस नहीं किए थे. लेकिन इस बार मैंने अधिक से अधिक सवाल हल किए. काफी मॉक टेस्ट दिया. अपनी कमी को साफ तौर पर पहचाना और उस पर काम किया.
पढ़ाई के दौरान कंसिस्टेंसी बेहद जरूरी
आदित्य कहते हैं कि पढ़ाई के दौरान कंसिस्टेंसी बेहद जरूरी होती है. कोई जरूरी नहीं कि हर दिन 8 घंटे ही पढ़ा जाए. आप 4-5 घंटे भी पढ़ सकते हैं. लेकिन इस बात का ध्यान रखें कि हर दिन थोड़ा भी पढ़े, लेकिन जरूर पढ़े. इस दौरान शायद ही कोई दिन होगा जब मैंने पढ़ाई न की हो. हर दिन 5 से 6 घंटे पढ़ाई किया करता था.
बुआ और फूफा मेरे प्रेरणा
आदित्य ने बताया कि डॉक्टर बनने का सपना मुझे अपनी बुआ और फूफा को देख कर आया. वे दोनों ही जमशेदपुर में डॉक्टर हैं और जब भी उनके घर जाता तो कोई न कोई क्रिटिकल केस के बारे में वे डिस्कस किया करते थे. जो मुझे सुनने में बड़ा अच्छा लगता था. इसलिए मैंने भी तय किया की एक दिन मैं भी डॉक्टर बन सर्जरी परफॉर्म करूंगा. इन दोनों को ही मैं अपना रोल मॉडल भी मानता हूं.
आर्टिकल से मोटिवेट हुआ
आदित्य बताते हैं कि पहले अटेम्प्ट में वे फेल हो गए थे. यह दौर मेरे लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा व काफी डिमोटिवेट भी हुआ था. इस दौरान मेरे पिताजी ने मुझे रामधारी सिंह दिनकर का एक आर्टिकल लाकर दिया, जो काफी मोटीवेटिंग था. आर्टिकल पढ़ने के बाद मैंने निश्चय किया कि एक बार फिर से मैं अपना शत-प्रतिशत दूंगा और एक विश्वास था कि मैं ये कर सकता हूं. तैयारी के दौरान कई बार टेस्ट में मार्क्स बहुत कम आया करते थे तो मां बड़े प्यार से समझाया करती थी.
कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं
अन्य बच्चों को सलाह देते हुए आदित्य कहते हैं कि कड़ी मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता. साथ ही इस दौरान कंसिस्टेंसी के साथ पढ़ाई किया जाए व हर सब्जेक्ट पर अपनी अच्छी पकड़ बनाएं. इसके लिए जरूरी है कि अधिक से अधिक सवाल हल करें. खासकर जिस दिन जो टॉपिक कोचिंग में पढ़ाई हो, घर आकर उस टॉपिक से अधिक से अधिक सवाल हल कर लें. इससे कांसेप्ट साफ हो जाएगा.
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Tags: Local18, NEET UG 2023, Ranchi news
FIRST PUBLISHED : June 15, 2023, 09:51 IST






