दिव्यांग महिलाओं के लिए प्रेरणा बनी पिंकी, डिजाइनर कपड़े सिलकर बनी आत्मनिर्भर

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 जुगल कलाल/ डूंगरपुर. कहते हैं कि जब इरादे मजबूत हों तो कोई भी मुसीबत आपको अपने मुकाम पर पहुंचाने से रोक नहीं सकती है. ऐसी ही कहानी पिंकी ननोमा की. पिंकी दिव्यांग हैं लेकिन उनके हौसले बुलंद हैं. पिंकी महिलाओं के कपड़े सिलने का काम करती है और अपने साथ अपने परिवार की पालन पोषण की जिम्मेदारी उठा रहीं है. एक समय जहां पिंकी जीने की हिम्मत हार चुकी थी. वही पिंकी आज दूसरों को मुस्कान के साथ जीवन जीने की नसीहत दे रही है.

डूंगरपुर के बिछीवाड़ा ब्लॉक के मोदर गांव की रहने वाली पिंकी ननोमा बचपन में एक हादसे ने उसे दिव्यांग बना दिया. लेकिन, इस हादसे को पिंकी ने पीछे छोड़ते हुए कुछ करने की ठानी और सिलाई मशीन सीखी. आज पिंकी के जस्बे को देख गांव की दूसरी महिला भी पिंकी के पास कपड़े सिलावने के लिए आती है. ना केवल सिर्फ़ महिलाएं पिंकी के जज्बे को देख कर आती है. बल्की उनके कपड़े सिलाई करने का तरीका भी अनोखा है.

हर तरह के डिजाइन में महार​त हासिल

पिंकी हर तरह की डिजाईन के कपड़े सिल देती है. महिलाएं बताती है कि पिंकी बस एक बार ऐसा कपड़ा सिलना है ये बताना होता या उन्हें फ़ोटो दिखाना होता पिंकी हुबहू ऐसा कपड़ा सिल देती है. अब पिंकी से दूसरी महिला प्रेरणा भी लेकर सिलाई का काम सीख रही है और आत्म निर्भर होने की राह पर चल पड़ी हैं. पिंकी रोजाना दो से तीन महिलाओ के ब्लाउज सील देती हैं. इसके अलावा छोटे मोटे कपड़ों के रफू करवाने के लिए भी लोग आते हैं. इस तरह वो दिन का आसानी से 500 रूपये तक कमा लेती हैं.

हिम्मत नहीं हारी, तनाव से बाहर निकली

पिंकी बताती है कि बचपन में एक हादसे उन्हें दिव्यांग बना दिया. जब उन्हें उसके बारे पता चला की अब उनका एक पैर काम नहीं कर सकता है तो उन्होंने कुछ समय तक खुद को घर में कैद कर लिया और किसी से मिलना जुलना छोड़ दिया. बस मन में एक ही ख्याल आता कि अब उनकी जिंदगी कैसे चलगी और मुझ से शादी कौन करेगा. लेकिन, धीरे धीरे समझ में आया कि जो हो गया उसका तो कुछ कर नहीं सकते है. अब यहीं जिंदगी और इसी के साथ जीना है. फिर सोचा अब कुछ ऐसा किया जाए जिसे की खुद भी अपना पालन पोषण किया जाए और परिवार का भी. पिंकी ने फिर महिलाओ के कपड़े सिलने का फैसला लिया. पहले एक उधारी के पैसे से एक मशीन खरीदा और सिलाई करनी शुरू की. अब पिंकी अपने पूरे परिवार को सिलाई के खर्चे से चलाती हैं.

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FIRST PUBLISHED : June 12, 2023, 12:38 IST

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Up Head Line
Author: Up Head Line

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