
निशा राठौड़/ उदयपुर. कोरोना की महामारी से उबरने के बाद अब पर्यावरण की महत्ता का अहसास सबको हुआ हैं, लेकिन उदयपुर जिले के ग्रामीण अंचल के रहने वाले कपिल पालीवाल ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर कई वर्षो पहले ही कार्य शुरू कर दिया. ऐसे में कपिल के इस प्रयास से उदयपुर जिले के गोगुन्दा कस्बे के समीप मजावडी गॉंव में बालिका औषधीय वन विकसीत हो चुका हैं जहॉं ना सिर्फ बालिका के जन्म पर 121 पौधे लगानें की परंपरा हो चली हैं बल्कि बालिका औषधी वन में लाखों पौधें अब वृक्ष का रूप ले चुके हैं.
कोरोना काल के दौरान पुरी दुनिया ऑक्सीजन की मारामारी का दंश झेल चुकी हैं, लेकिन हम आपको ऐसे गावं लेकर जा रहे हैं जहां एक युवा कपिल देव पालीवाल ने अपने गांव की दशा ही बदल डाली और बंजर जगह पर हरा भरा बालिका औषधी वन तैयार कर एक बड़ा ऑक्सीजन पार्क तैयार कर दिया. वर्ष 2016 में मजावडी गांव के कपिल देव पालीवाल के मन में कुछ अनुठा करने की योजना बनाई. इस दौरान गांव के समीप चारागार जमीन पर अतिक्रमण किया हुआ था, यह जमीन बंजर और पथरीली थी जो शायद किसी काम की नहीं मानी जा रही थी. कपिल देव पालीवाल ने इस बंजर जमीन को ही उपजाउ बनाने का संकल्प लिया और अतिक्रमण ध्वस्त करते हुए बंजर जमीन पर लाखों पौधे उगा दिए.
वन किया बालिकाओं को समर्पित
गांव में अब एक परंपरा बन चुकी है कि जिस भी घर में बालिका का जन्म होगा वह परिवार बालिका औषधी वन में 121 पौधे लगाएगा. यह वन करीब 1200 बीघा क्षेत्र में फैला हुआ हैं. जिसमें करीब चार लाख से ज्यादा पौधे लगाए जा चुके हैं और पुरा क्षेत्र हराभरा नजर आता है. अपनी इस मेहनत को सफल होता देख कपिल पालीवाल काफी खुश है क्योंकि उनके द्वारा लगाए गए फलदार वृक्षों पर अब फल आने लगे हैं.
मनाए जाते हैं सभी त्यौहार
बालिका औषधी वन में सभी त्यौहार मनाए जाते हैं, यहां रक्षाबंधन पर बहने पौधे लगातें हुए उन्हें राखी बांधकर अपना भाई मानती हैं तो वहीं पेड़ों कीरक्षा करने का संकल्प भी लेती हैं, इसी तरह महिला दिवस, पर्यावरण दिवस पर भी सभी मिलकर पोधारोपण करते हैं और इस औषधी वन को और खुबसुरत बनाते हैं.









