
विक्रम कुमार झा/पूर्णिया. एकादशी कई प्रकार के होते हैं. इसमें से एक है देवशयनी एकादशी. इसको लेकर कई भक्तों में असमंजस की स्थिति है. इस असमंजस को दूर करने के लिए पूर्णिया के पंडित मनोत्पल झा ने विशेष जानकारी दी. उन्होंने कहा कि देवशयनी एकादशी का विशेष महत्त्व है. इस एकादशी व्रत में भगवान विष्णु की विशेष पूजा-आराधना की जाती हैं. हालांकि उन्होंने कहा कि सामान्य तौर पर साल में 24 एकादशी होते हैं, लेकिन मलमास के कारण कभी-कभी साल में 26 एकादशी भी होते हैं. इन एकादशियों में देवशयनी एकादशी का खास महत्त्व है. पंडित जी कहते हैं कि सूर्य जब मिथुन राशि में प्रवेश करते हैं, तो देवशयनी एकादशी प्रारंभ हो जाती है. पुनः जब सूर्य तुला राशि में प्रवेश करते हैं तो हर तरह के मांगलिक कार्य शुरू होते हैं.
पंडित जी कहते हैं कि इस वर्ष 29 जून 2023 दिन गुरुवार को आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष तिथि को देवशयनी एकादशी मनाई जाएगी. देवशयनी एकादशी को विभिन्न नामों से भी जाना जाता है. इसे कई लोग पदनाम एकादशी भी कहते हैं, तो कई लोग हरीशायनी एकादशी. भगवान विष्णु का नाम हरि और पदनाम है. इसलिए इसे देवशयनी एकादशी कहते हैं. उन्होंने कहा यह एकादशी सब एकादशी में खास माना जाती है. यह ज्यादा फलदाई और शुभ होती है.
पंडित मनोत्पल झा के मुताबिक, देवशयनी एकादशी या हरीशायनी एकादशी के बारे में ऐसा कहा जाता है कि इस एकादशी के बाद भगवान विष्णु देवलोक के अपने शयनकक्ष में आराम करने चले जाते हैं. जिससे आने वाले 4 महीने शुभ कार्य वर्जित होते हैं. उन्होंने कहा कि अगले अश्विन महीने से हर तरह के मंगल कार्य शुरू हो जाते हैं. जिनके बाद संसार का कामकाज शुरू हो जाता है. पालनहार भगवान विष्णु पुनः संसार का पालन करना शुरू कर देते हैं.
साल की अंतिम एकादशी देवशयनी एकादशी है. सभी माता-बहनों और भाई-बंधु को यह एकादशी नियमतः करनी चाहिए. इस एकादशी को करने से निश्चित तौर पर लाभ ही लाभ होगा. आर्थिक परेशानी दूर होगी, घर के कलह दूर होंगे और शांति स्थापित होगी. भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहेगी.
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FIRST PUBLISHED : June 11, 2023, 06:29 IST









