
पंडित गोपाल प्रसाद व्यास को मशहूर ‘लाल किला कवि सम्मेलन’ का जनक माना जाता है. होली के अवसर पर होने वाले ‘मूर्ख महासम्मेलन’ की शुरूआत भी पंडितजी ने ही की थी. पंडित गोपाल प्रसाद व्यास सामाजिक, साहित्यिक, राजनीतिक व्यंग्य-विनोद के प्रतिष्ठाप्राप्त कवि, लेखक और ‘हास्यरसावतार’ के नाम से प्रसिद्ध हुए. हास्य कवि व्यास जी ने सुसराल पक्ष पर कविताओं की एक पूरी श्रृंखला तैयार की है. इसमें पत्नी, साली, सास और साला पर हास्य कविताएं शामिल हैं. प्रस्तुत है पत्नी को समर्पित उनकी एक मशहूर कविता-
यदि ईश्वर में विश्वास न हो,
उससे कुछ फल की आस न हो,
तो अरे नास्तिको! घर बैठे,
साकार ब्रह्म को पहचानो!
पत्नी को परमेश्वर मानो!
वे अन्नपूर्णा जग-जननी,
माया हैं, उनको अपनाओ।
वे शिवा, भवानी, चंडी हैं,
तुम भक्ति करो, कुछ भय खाओ।
सीखो पत्नी-पूजन पद्धति,
पत्नी-अर्चन, पत्नीचर्या
पत्नी-व्रत पालन करो और
पत्नीवत् शास्त्र पढ़े जाओ।
अब कृष्णचंद्र के दिन बीते,
राधा के दिन बढ़ती के हैं।
यह सदी बीसवीं है, भाई !
नारी के ग्रह चढ़ती के हैं।
तुम उनका छाता, कोट, बैग,
ले पीछे-पीछे चला करो,
संध्या को उनकी शैय्या पर
नियमित मच्छरदानी तानो!
पत्नी को परमेश्वर मानो।
तुम उनसे पहले उठा करो,
उठते ही चाय तयार करो।
उनके कमरे के कभी अचानक,
खोला नहीं किवाड़ करो।
उनकी पसंद के कार्य करो,
उनकी रुचियों को पहचानो,
तुम उनके प्यारे कुत्ते को,
बस चूमो-चाटो, प्यार करो।
तुम उनको नाविल पढ़ने दो
आओ कुछ घर का काम करो।
वे अगर इधर आ जाएं कहीं ,
तो कहो-प्रिये, आराम करो!
उनकी भौंहें सिगनल समझो,
वे चढ़ीं कहीं तो खैर नहीं,
तुम उन्हें नहीं डिस्टर्ब करो,
ए हटो, बजाने दो प्यानो!
पत्नी को परमेश्वर मानो!
तुम दफ्तर से आ गए, बैठिए!
उनको क्लब में जाने दो।
वे अगर देर से आती हैं,
तो मत शंका को आने दो।
तुम समझो वह हैं फूल,
कहीं मुरझा न जाएं घर में रहकर!
तुम उन्हें हवा खा आने दो,
तुम उन्हें रोशनी पाने दो,
तुम समझो ‘ऐटीकेट’ सदा,
उनके मित्रों से प्रेम करो।
वे कहां, किसलिए जाती हैं-
कुछ मत पूछो, ऐ ‘शेम’ करो !
यदि जग में सुख से जीना है,
कुछ रस की बूंदें पीना है,
तो ऐ विवाहितो, आंख मूंद,
मेरे कहने को सच मानो!
पत्नी को परमेश्वर मानो।
मित्रों से जब वह बात करें,
बेहतर है तब मत सुना करो।
तुम दूर अकेले खड़े-खड़े,
बिजली के खंबे गिना करो।
तुम उनकी किसी सहेली को
मत देखो, कभी न बात करो।
उनके पीछे उनके दराज से
कभी नहीं उत्पात करो।
तुम समझ उन्हें स्टीम गैस,
अपने डिब्बे को जोड़ चलो।
जो छोटे स्टेशन आएं तुम,
उन सबको पीछे छोड़ चलो।
जो संभल कदम तुम चले-चले,
तो हिन्दू-सदगति पाओगे,
मरते ही हूरें घेरेंगी,
तुम चूको नहीं, मुसलमानो!
पत्नी को परमेश्वर मानो!
तुम उनके फौजी शासन में,
चुपके राशन ले लिया करो।
उनके चेकों पर सही-सही
अपने हस्ताक्षर किया करो।
तुम समझो उन्हें ‘डिफेंस एक्ट’,
कब पता नहीं क्या कर बैठें?
वे भारत की सरकार, नहीं
उनसे सत्याग्रह किया करो।
छह बजने के पहले से ही,
उनका कर्फ्यू लग जाता है।
बस हुई जरा-सी चूक कि
झट ही ‘आर्डिनेंस’ बन जाता है।
वे ‘अल्टीमेटम’ दिए बिना ही
युद्ध शुरू कर देती हैं,
उनको अपनी हिटलर समझो,
चर्चिल-सा डिक्टेटर जानो!
पत्नी को परमेश्वर मानो।
पंडित गोपाल प्रसाद व्यास का जन्म 13 फरवरी, 1915 को मथुरा जनपद के गोवर्धन के निकट पारसौली में हुआ था. उन्होंने केवल सातवीं कक्षा तक ही तालीम हासिल की थी. उन्होंने अलग-अलग क्षेत्र के विशेषज्ञों की संगत में रहकर ही अध्ययन किया. पंडित व्यास ने नवनीत चतुर्वेदी से पिंगल की शिक्षा ग्रहण की तो अलंकार तथा रस-सिद्धांत का ज्ञान सेठ कन्हैयालाल पोद्दार से प्राप्त किया. गोपाल प्रसाद व्यास ने पुरातत्व, मूर्तिकला और चित्रकला का अध्ययन डॉ. वसुदेवशरण अग्रवाल के मार्गदर्शन में किया.
दिल्ली स्थित हिंदी भवन के निर्माण में गोपाल प्रसाद व्यास की महत्वपूर्ण भूमिका थी. हिंदी भाषा और साहित्य में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया था. पंडित गोपालप्रसाद व्यास को हिंदी अकादमी दिल्ली के ‘शलाका सम्मान’ और उत्तर प्रदेश के प्रतिष्ठित ‘यश भारती सम्मान’ से भी अलंकृत किया गया. उनका निधन 28 मई, 2005 को नई दिल्ली स्थित गुलमोहर पार्क में उनके आवास पर हुआ.
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FIRST PUBLISHED : June 02, 2023, 12:53 IST








