
हाइलाइट्स
थॉमस करीब 15 साल तक यूएई में थे.
वह यूएई में शैफ का काम करते थे.
वह 2019 में लौटे और सबसे पहले मशरूम की खेती की.
Success Story: महामारी ने कई लोगों की रोजी-रोटी छीनी. विदेशों में रह रहे लोग भी इसकी चपेट में आए और परदेस में आशियाना बना चुके लोगों को भी घर वापस लौटना पड़ा. केरल के थलावूर निवासी लालू थॉमस भी इन्हीं में से एक थे. वह 15 साल से यूएई में थे लेकिन कोविड-19 के दौरान उनकी नौकरी चली गई. वह यूएई में शैफ थे और कभी स्टार्टअप करने के बारे में नहीं सोचा था लेकिन महामारी में नौकरी चले जाने के बाद उन्हें ये कदम उठाना पड़ा.
वह 2019 में ही देश वापस लौटे और यहां सबसे पहले मशरूम की खेती की. महामारी में उन्हें मशरूम की खेती का ही आइडिया आया. ऐसा इसलिए क्योंकि मशरूम के हेल्थ बेनिफिट बहुत हैं. हेल्थ प्रोडक्ट की मांग में उछाल के देखते हुए थॉमस ने सबसे पहला दाव इसी पर खेला. हालांकि, इसमें वह मुनाफा कमाने में असफल रहे. इसके बाद उन्होंने कोल्लम में कृषि विज्ञान केंद्र से संपर्क किया और उनके साथ रिसर्च करने का आग्रह किया. यही मशरूम फ्लेवर्ड La Bae कॉफी का जन्म हुआ.
पहली मशरूम कॉफी
La Bae केरल का पहला कॉफी पाउडर है. मशरूम पोषक तत्वों से भरपूर होता है. उनकी इस कॉफी को मूल्यांकन खाद्य अनुसंधान और विकास परिषद व काजू निर्यात संवर्धन परिषद की लैब में जांचा गया है. थॉमस कोई वैल्यू एडेड प्रोडक्ट बनाना चाहते थे इसलिए उन्होंने मशरूम कॉफी बनाई. थॉमस 45 साल के हैं कोल्लम में रहते हैं. कॉफी बनाने में उन्हें करीब 2 साल का समय लग गया.
क्यों लगा इतना समय
थॉमस के 2 साल लग गए यह समझने में कि इस कॉफी पाउडर में कॉफी और मशरूम का अनुपात कितना रहेगा. कौन ज्यादा हावी रहेगा और कौन कम. थॉमस की कॉफी में 70 फीसदी मशरूम और 30 फीसदी कॉफी पाउडर मिलाया जाता है. इसमें जो कॉफी मिलाई जाती है वह 100 फीसदी अरेबिका है. थॉमस मशरूम की खेती खुद भी करते हैं और महाराष्ट्र से भी इसे खरीदते हैं. वह कॉफी वायनाड से मंगाते हैं. खबरों के अनुसार, जल्द ही वह इस कॉफी को देश के बाकी हिस्सों और विदेशों में भी बेचना शुरू करने वाले हैं.
.
Tags: Business ideas, Business news in hindi, Success Story
FIRST PUBLISHED : May 29, 2023, 06:52 IST








