
नई दिल्ली. नॉरकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) और भारतीय नौसेना ने आखिरकार इस पाकिस्तान से चलने वाले इंटरनेशनल ड्रग्स सप्लाई रैकेट (drugs supply racket) के काम करने के तरीके के बारे में पहली बार एक ठोस जानकारी हासिल करने में कामयाबी पाई है. एनसीबी और नेवी के एक संयुक्त ऑपरेशन में 13 मई को 29 साल के पाकिस्तानी नागरिक जुबैर डेरक्षशांदेह को कोच्चि के तट से इंटरनेशनल वाटर में गिरफ्तार किया गया था. उसने बताया कि पिछले पांच साल से वह कुख्यात हाजी सलीम ड्रग कार्टेल के मेंबर के रूप में कई देशों को ड्रग्स की सप्लाई करता रहा. ‘इंडियन एक्सप्रेस’ की एक खबर के मुताबिक जुबैर ने बताया कि भारत, अफ्रीका, इंडोनेशिया, मालदीव और श्रीलंका की इस तरह की लगभग 20 दिनों तक चलने वाली यात्राओं के उसे हर यात्रा का 5 लाख रुपये मिलता था.
एनसीबी और नेवी ने जुबैर को 132 बैग में भरे संदिग्ध प्रतिबंधित ड्रग्स के साथ पकड़ा था. उनमें 2,525 किलोग्राम ‘उच्च शुद्धता का मेथामफेटामाइन’ (Methamphetamine) भरा था, जिसकी बाजार में कीमत लगभग 25,000 करोड़ रुपये है. एनसीबी के एक अधिकारी ने बताया कि यह मेथामफेटामाइन की सबसे ‘बेहतरीन क्वालिटी’ थी जो उन्होंने कभी भी अवैध दवा बाजार में देखी थी. पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत का मूल निवासी जुबैर एक व्यवसायी के लिए काम करता है, जिसके पास कई बड़े जहाज और नावें हैं. ये व्यवसायी सलीम का करीबी सहयोगी है और उन्होंने जुबैर से भारत में यह खेप पहुंचाने के लिए कहा था.
भारत पहुंचने के बाद उसे बताया गया कि कुछ लोग नावों में आएंगे और उसके साथ एक कोड शेयर करेंगे. उसके बाद उन्हें खेप सौंपने को कहा गया. इसके बाद वे भारत, श्रीलंका और मालदीव में ड्रग्स की आपूर्ति करेंगे. अधिकारी ने कहा कि सलीम पाकिस्तान के पासनी से है और खुफिया सूचनाओं के मुताबिक उसका आखिरी ठिकाना कराची था. वह इलाके का सबसे बड़ा नशा तस्कर है. वह अफगानिस्तान से अवैध ड्रग्स खरीदता है और बलूचिस्तान क्षेत्र में गुप्त तरीके से संचालन करते हुए उन्हें अपनी प्रयोगशालाओं में प्रोसेस करता है.
प्रोसेस्ड ड्रग्स- हेरोइन (heroin) और मेथामफेटामाइन इन प्रयोगशालाओं से बड़ी मात्रा में समुद्री मार्गों के माध्यम से दुनिया के विभिन्न हिस्सों में तस्करी की जाती है. हर शिपमेंट का वजन आमतौर पर लगभग 1,500-2,500 किलोग्राम होता था. सलीम की प्रयोगशालाओं में प्रोसेस्ड ड्रग्स की आमतौर पर ‘555’, ‘999’, ‘फ्लाइंग हॉर्स ’’ और ‘स्कॉर्पिअन’ जैसे चिह्नों के साथ ब्रांडिंग की जाती है.
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FIRST PUBLISHED : May 26, 2023, 08:46 IST








