Jyeshtha Amavasya 2023: कब है ज्येष्ठ अमावस्या? जानें स्नान-दान मुहूर्त, 4 कारणों से विशेष होगा यह दिन

Share Now:

👇समाचार सुनने के लिए यहां क्लिक करें


हाइलाइट्स

इस बार ज्येष्ठ अमावस्या और ज्येष्ठ दर्श अमावस्या दोनों एक साथ हैं.
ज्येष्ठ अमावस्या के दिन पवित्र ​नदियों में स्नान करने के बाद दान देने की परंपरा है.
ज्येष्ठ अमावस्या वाले दिन स्नान और दान शोभन योग में होगा.

ज्येष्ठ माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को ज्येष्ठ अमावस्या मनाई जाती है. यह कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि है. इसके बाद से शुक्ल पक्ष का प्रारंभ होता है. इस बार ज्येष्ठ अमावस्या और ज्येष्ठ दर्श अमावस्या दोनों एक साथ हैं. ज्येष्ठ अमावस्या के दिन पवित्र ​नदियों में स्नान करने के बाद दान देने की परंपरा है. ऐसा करने से पाप मिटते हैं और पुण्य की प्राप्ति होती है. स्नान और दान से ​पितर प्रसन्न होते हैं और वे आशीर्वाद देते हैं. काशी के ज्योतिषाचार्य चक्रपाणि भट्ट से जानते हैं ज्येष्ठ अमावस्या की तिथि, स्नान-दान मुहूर्त और महत्व के बारे में.

ज्येष्ठ अमावस्या 2023 ति​​थि
हिंदू कैलेंडर के अनुसार, ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या तिथि 18 मई गुरुवार को रात 09 बजकर 42 मिनट से प्रारंभ हो रही है और अगले दिन शुक्रवार 19 मई को रात 09 बजकर 22 मिनट पर समाप्त हो रही है. उदयातिथि के आधार पर इस साल ज्येष्ठ अमावस्या 19 मई को मनाई जाएगी. इस दिन ही ज्येष्ठ की दर्श अमावस्या भी होगी.

यह भी पढ़ें:  कब है ज्येष्ठ माह का पहला प्रदोष? इस दिन पंचक और भद्रा, जान लें शिव पूजा का शुभ-उत्तम मुहूर्त

ज्येष्ठ अमावस्या का स्नान-दान मुहूर्त
ज्येष्ठ अमावस्या वाले दिन प्रात:काल से ही स्नान और दान प्रारंभ हो जाता है. इस दिन आप सुबह पवित्र नदी में स्नान कर लें और उसके बाद अपनी क्षमता के अनुसार दान करें. ऐसा करने से पुण्य लाभ होगा. ज्येष्ठ अमावस्या पर प्रात:काल समय के बाद सुबह में 08 बजकर 54 मिनट से दोपहर 02:00 बजे तक अच्छा समय है.

सुबह 08:54 से सुबह 10:36 बजे चर सामान्य मुहूर्त रहेगा. फिर सुबह 10:36 बजे से दोपहर 12:18 बजे तक लाभ उन्नति मुहूर्त है. उस दिन अमृत सर्वोत्तम मुहूर्त दोपहर 12:18 बजे से दोपहर 02:00 बजे तक है.

4 कारणों से विशेष है ज्येष्ठ अमावस्या
1. इस साल ज्येष्ठ अमावस्या वाले दिन स्नान और दान शोभन योग में होगा. शोभन योग सुबह से लेकर शाम 06 बजकर 17 मिनट तक है. शुभ कार्यों के लिए शोभन योग को अच्छा माना जाता है.

यह भी पढ़ें: ज्येष्ठ का दूसरा बड़ा मंगल आज, इस दिन को क्यों कहते हैं बुढ़वा? भूलकर भी ना करें 4 काम

2. ज्येष्ठ अमावस्या के अवसर पर शिववास है. इस दिन जो लोग भगवान शंकर की कृपा पाना चाहते हैं, वे शिववास में रुद्राभिषेक करा सकते हैं. ज्येष्ठ अमावस्या पर शिववास सुब​ह से लेकर रात 09 बजकर 22 मिनट तक है. यह शिववास गौरी के साथ है.

3. ज्येष्ठ अमावस्या पर न्याय के देवता शनि देव का जन्म हुआ था, इसलिए इस दिन शनि जयंती मनाई जाती है. शनि के कारण ज्येष्ठ अमावस्या को शनि अमावस्या भी कहते हैं. इस दिन शनि देव की पूजा करने से शनि दोष, साढ़ेसाती और ढैय्या में राहत मिलती है.

4. ज्येष्ठ अमावस्या को ही सावित्री ने यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस लाई थीं, इसलिए ज्येष्ठ अमावस्या को वट सावित्री व्रत रखते हैं. इस व्रत को करने से सुहागन महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है.

Tags: Dharma Aastha, Shani Jayanti, Vat Savitri Vrat

Source link

Up Head Line
Author: Up Head Line

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

और पढ़ें