क्या है केंद्राधिपति दोष, इन लक्षणों से करें पहचान, दोष निवारण के ज्योतिषी उपाय

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Kendradhipati dosh : ज्योतिष शास्त्र में किसी व्यक्ति की कुंडली में ग्रहों की स्थिति जानने के लिए उस व्यक्ति के नाम, जन्म तिथि, जन्म के समय एवं जन्म के स्थान की गणना से उसकी जन्म कुंडली बनाई जाती है. जिसके आधार पर व्यक्ति के जन्म के समय ग्रहों की स्थिति का पता लगाया जाता है. इसी माध्यम से कुंडली में मौजूद दोष का आकलन भी किया जा सकता है. ज्योतिष शास्त्र मानता है कि किसी व्यक्ति की कुंडली में मौजूद गुण दोष व्यक्ति के जीवन पर खासा प्रभाव डालते हैं. किसी व्यक्ति की कुंडली में कोई अशुभ ग्रह स्थिति शुभ ग्रह के साथ संयोजन करता है तो ऐसी स्थिति में कुंडली में दोष निर्माण होता है. इस दोष की वजह से व्यक्ति के जीवन में तमाम तरह की समस्याएं आ सकती हैं. कुंडली में मौजूद इन्हीं दोषों में से एक है केंद्राधिपति दोष. भोपाल निवासी ज्योतिष एवं वास्तु विशेषज्ञ पंडित हितेंद्र कुमार शर्मा बता रहे हैं, क्या होता है केंद्राधिपति दोष? और केंद्राधिपति दोष के उपायों के बारे में.

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार कुंडली के कुछ विशेष भावों में हानिकारक ग्रह जैसे शनि, राहु और मंगल होते हैं. तो वे जातक की कुंडली को नुकसान पहुंचाते हैं. जिसके कारण कुंडली में दोष उत्पन्न होते हैं. कुंडली में मौजूद शुभ ग्रहों के कारण बनने वाले दोष को केंद्राधिपति दोष बोला जाता है.

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क्या होता है केंद्राधिपति दोष

किसी व्यक्ति की कुंडली में केंद्राधिपति दोष का निर्माण तब होता है, जब शुभ ग्रह जैसे बृहस्पति, शुक्र, बुध या शुक्ल पक्ष चंद्रमा जैसे लाभकारी ग्रह केंद्र भाव के स्वामी बन जाते हैं. ज्योतिष शास्त्र मानता है कि केंद्र भावों ( पहले, चौथे, सातवें और दसवें भाव) के स्वामी और त्रिकोण भाव (पहले, पांचवे और नवे भाव) के स्वामी हमेशा शुभ परिणाम देते हैं, लेकिन इस दोष के कारण केंद्र भाव के स्वामी नकारात्मक परिणाम देना शुरू कर देते हैं. बृहस्पति और शुक्र इस दोष के बनने के कारण हैं, लेकिन इस दोष के निर्माण में बुध और चंद्रमा का योगदान भी होता है.

केंद्राधिपति दोष का प्रभाव

यह दोष आर्थिक स्थिति, करियर में दिक्कतें, बीमारियों के अलावा समाज में मान प्रतिष्ठा की हानि जैसे कई स्थाई प्रभाव डाल सकता है.

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केंद्राधिपति दोष निवारण की कुछ आसान उपाय

ज्योतिष शास्त्र मानता है कि यदि किसी व्यक्ति की कुंडली में केंद्राधिपति दोष होता है. तो उसे भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए.
यदि आपकी कुंडली में भी केंद्राधिपति दोष है. तो ऐसे में आपको रोजाना शिवलाल में जाकर भगवान शिव की पूजा करनी चाहिए.
प्रतिदिन मंदिर में 11 बार “ॐ नमः शिवाय” मंत्र जाप करना चाहिए.
इसके अलावा 21 बार “ॐ नमो नारायण” मंत्र का जाप करने से इस दोष के प्रभाव को बहुत हद तक कम किया जा सकता है.

Tags: Astrology, Dharma Aastha, Predictions, Religion

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Author: Up Head Line

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