
सौरभ तिवारी/ बिलासपुर. शहर के बीचों बीच बहने वाली अरपा नदी का सौंदर्यीकरण, इसके रख रखाव और इसमें पानी का बहाव सुनिश्चित करने के लिए कई प्रयास किए जा रहे हैं. लेकिन वहीं ये प्रयास कुछ खास सफल होते नजर नहीं आ रहे. अरपा नदी में जलकुंभी एक बड़ी समस्या है. जिसे साफ करने के लिए बिलासपुर नगर निगम द्वारा पुणे से भारी भरकम मशीन मंगाई गई है. मशीन बिलासपुर में आ तो गई लेकिन जलकुंभी की समस्या वैसी की वैसी है. हाल यह है की जलकुंभी हटाने वाली यह मशीन जितनी देर चलती नहीं उससे ज्यादा तो खड़ी रहती है. वहीं गौर करने वाली बात यह है की इस मशीन पर शहर के लोगों की जेब से सालाना का 2 करोड़ रुपए खर्च होगा. लेकिन इस पैसे का सही इस्तेमाल हो रहा यह कह पाना मुश्किल है.जलकुंभी की समस्या जस की तस है और बदबू से लोगों का हाल बेहाल है.
बिलासपुर नगर निगम द्वारा पुणे से मंगाई गई मशीन से बिलासपुर में जलकुंभी की सफाई की जा रही है. यह काम कछुआ गति से चल रहा है. अगर हालात ऐसे ही रहे तो बरसात तक आधी सफाई भी नहीं हो पाएगी और बरसात में वैसे भी इसकी सफाई की आवश्यकता नहीं पड़ती. दिलचस्प बात यह है कि इस नाम पर हर साल 2 करोड़ रुपए फूंकने की तैयारी है.
दावा किया गया था कि हर दिन 8 घंटे यह मशीन अरपा नदी से जलकुंभी की सफाई करेगी. दावा यह भी किया गया था कि अरपा नदी से निकले जलकुंभी को कछार के सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट सेंटर ले जाकर इसे कंपोस्ट खाद में बदला जाएगा, लेकिन धरातल पर सच्चाई कुछ और ही नजर आ रही है. वर्तमान में यह मशीन बिलासपुर के छठ घाट में काम कर रही है, जहां केवल नदी के बीच के हिस्से से ही वर्तमान में जलकुंभी हटाई गई है. हटाए गए जलकुंभी का घाट पर ढेर लगाया गया है.
अगर यहां नियमित रूप से जलकुंभियों को कछार ले जाया गया होता तो फिर यहां घाट पर जलकुंभी का पहाड़ न बना होता. छठ घाट पर जलकुंभी की ढेर की वजह से घाट उपयोग योग्य नहीं रह गया है. वहीं सड़ते जलकुंभी से उठती दुर्गंध से लोगों के नाक के बाल जल रहे हैं. घाट पर आप हर वक्त मशीन को किनारे खड़ा ही देख पाएंगे. यह भी एक बड़ी वजह है जिसके चलते काम बहुत धीमी गति से हो रहा है.
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Tags: Bilaspur news, Chhattisgarh news
FIRST PUBLISHED : May 10, 2023, 21:44 IST







