प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कोर्ट रूम के बाहर वकीलों द्वारा नारेबाजी और न्यायिक कार्यवाही में व्यवधान डालने के मामले को गंभीरता से लिया है। हाईकोर्ट ने कोर्ट नंबर 66 के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज निकलवाकर घटना में शामिल अधिवक्ताओं की पहचान करने का निर्देश दिया है। साथ ही, पहचान होने के बाद मामले को उत्तर प्रदेश बार काउंसिल भेजने और अवमानना की कार्यवाही शुरू करने पर विचार करने की बात कही है।
यह आदेश 28 अक्टूबर 2026 को न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल की पीठ ने देवेंद्र कुमार की आपराधिक विविध जमानत याचिका संख्या 32917/2026 की सुनवाई के दौरान पारित किया।
आदेश के मुताबिक, सुनवाई के दौरान कोर्ट नंबर 66 के बाहर कुछ अधिवक्ताओं ने आवाज उठानी शुरू कर दी और न्यायिक कार्यवाही में व्यवधान उत्पन्न किया। अधिवक्ता मन्नू शर्मा ने अदालत को बताया कि कोर्ट नंबर 49 में एक अधिवक्ता की गरिमा से जुड़े मामले में हुई घटना के विरोध में कुछ वकील नारेबाजी कर रहे थे।
अदालत ने कहा कि न्याय पाने के लिए हाईकोर्ट आने वाले वादियों के हितों को देखते हुए किसी विशेष अदालत से असहमति के कारण दूसरी अदालतों की कार्यवाही बाधित करना उचित नहीं है। आदेश में इस तरह के आचरण को अदालत की अवमानना की प्रकृति का बताया गया है।
रजिस्ट्रार प्रोटोकॉल को निर्देश दिया गया है कि कोर्ट नंबर 66 के बाहर लगे कैमरों की फुटेज प्राप्त कर संबंधित अधिवक्ताओं की पहचान करें और अगली सुनवाई की तारीख तक रिपोर्ट पेश करें। इसके बाद मामले को अनुशासनात्मक कार्रवाई के लिए उत्तर प्रदेश बार काउंसिल भेजने और अवमानना की कार्यवाही शुरू करने पर विचार किया जा सकता है।
जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान आवेदक पक्ष के वकील ने ट्रायल के दौरान दर्ज गवाहों के बयानों को रिकॉर्ड पर लाने के लिए समय मांगा था। अदालत ने अनुरोध स्वीकार करते हुए मामले की अगली सुनवाई 19 नवंबर 2026 को निर्धारित की है।







