151 कन्याओं ने रखा गौरी एवं जया-पार्वती का व्रत

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*151 कन्याओं ने रखा गौरी एवं जया-पार्वती का व्रत*

*40 वर्षों से सदगुरु परिवार में चली आ रही है जया पार्वती व्रत की परंपरा*

चित्रकूट

परमहंस संत श्री रणछोड़दास जी महाराज कि पावन तपोस्थली चित्रकूट के श्री रघुवीर मंदिर परिसर में हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी अत्यंत श्रद्धा और भक्ति भाव के साथ गौरी एवं जया पार्वती व्रत का शुभारंभ हुआ। इस पावन पर्व का आयोजन श्री रघुवीर मंदिर ट्रस्ट के सान्निध्य में किया जा रहा है। इस वर्ष सदगुरु परिवार की 151 बालिकाएं इस व्रत में भाग लेकर शिव-पार्वती की आराधना कर रही हैं।
इस अवसर पर महिला समिति कि अध्यक्ष एवं कार्यक्रम की संचालिका श्रीमती उषा जैन ने बताया कि, यह व्रत आज से लगभग 40 वर्ष पूर्व भूतपूर्व अध्यक्ष अरविंदभाई माफ़तलाल के मार्गदर्शन में आरंभ किया गया था। यह व्रत विशेष रूप से गुजरात में प्रचलित है और इसमें कुंवारी कन्याएं भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना करती हैं। माना जाता है कि इस व्रत के पालन से बालिकाओं को एक श्रेष्ठ जीवन और उचित जीवनसाथी का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
यह व्रत प्रतिवर्ष आषाढ़ शुक्ल त्रयोदशी से प्रारंभ होकर श्रावण कृष्ण द्वितीया तक चलता है। पांच दिनों तक व्रती बालिकाएं उपवास रखती हैं, प्रतिदिन प्रातःकाल स्नान कर विधिवत आचार्यों के निर्देशन में पूजन-अर्चन करती हैं, भजन-कीर्तन करती हैं एवं संयमित जीवन का पालन करती हैं।
व्रत की शुरुआत ज्वारारोपण से होती है, जिसमें मिट्टी के पात्रों में जौ एवं अन्य धान्य बोए जाते हैं और प्रतिदिन उनकी पूजा की जाती है। व्रत का समापन रात्रि जागरण और ज्वारा विसर्जन के साथ होता है, जिसमें पूरी रात भजन-कीर्तन, नृत्य एवं कथा वाचन के साथ भक्तिमय वातावरण बना रहता है।
इस पर्व की विशेषता यह भी है कि इसी समय गुरुपूर्णिमा महोत्सव भी आयोजित होता है, जिसमें देशभर से गुरुभाई-बहन चित्रकूट पधारते हैं। वे न केवल गुरुपूर्णिमा मनाते हैं, अपितु व्रत में सम्मिलित बालिकाओं को भी आशीर्वाद प्रदान करते हैं। यह समागम गुरु-शिष्य परंपरा, तप, सेवा और भक्ति का जीवंत उदाहरण बनता है।

पूरे श्री रघुवीर मंदिर परिसर में इस समय श्रद्धा, भक्ति और साधना का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। मंदिर को पारंपरिक सजावट से अलंकृत किया जायेगा, जहाँ प्रतिदिन भजन, आरती और पूजा-पाठ का आयोजन हो रहा है।
श्री रघुवीर मंदिर ट्रस्ट द्वारा बालिकाओं के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं – आवास, भोजन, पूजा सामग्री और आध्यात्मिक मार्गदर्शन – सुचारू रूप से की गई हैं। यह आयोजन बालिकाओं में सांस्कृतिक मूल्यों, परंपराओं और भक्ति भावना के बीजारोपण का महत्वपूर्ण माध्यम बनता जा रहा है।
यह पर्व न केवल गुजरात की सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक है, अपितु चित्रकूट की तपोभूमि में भी इसे जीवंत बनाए रखने एवं नयी पीढ़ी की बालिकाओं को अहरम संस्कारित करने का भी एक सराहनीय प्रयास है। ट्रस्टी डॉ. बी.के. जैन एवं ट्रस्टी डॉ . इलेश जैन ने इस व्रत में सम्मिलित समस्त बालिकाओं को शुभकामना एवं साधुवाद प्रेषित किया |

Up Head Line
Author: Up Head Line

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