कौशाम्बी
मोहर्रम का चांद दिखा, आज से मजलिसों व मातम का दौर
बीबी को पुरा देने के लिए घरों में बिछेगा फर्श अज़ा। दस दिनों तक अलम ताबूत तो कही निकला जाएगा जुलजनाह।
करारी कौशांबी मोहर्रम का चांद शविवार को नजर न आने के चलते सोमवार को मोहर्रम की पहली तारीख से गांव गांव कस्बे से लेकर शहर में जगह-जगह गम-ए-हुसैन मनाने को मजलिसों और मातम का दौर शुरू हो गया है। इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के चाहने वाले दस दिन बहत्तर की शहादत पर गिरया करेगें, और पूरे दो माह आठ दिन घरों में किसी प्रकार की खुशियां नही मनाई जाएंगे शादी विवाह जैसी कामों को भी दो माह आठ दिन तक नहीं किया जाएगा।

करारी कस्बा के नयागंज से शुरु हुआ मजलिसों मातम का दौर कस्बों में विभिन्न स्थानों पर ताजिये बनाना भी शुरू हो गए हैं। इमाम चौक पर पूरी रात फतिहा और नजर नियाज का सिलसिला चलेगा। शहरों से लेकर गांव-गांव की गालियों में गूंजेगा हुसैन या हुसैन की सदा इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने इंसाफ की लड़ाई लड़ कर बहत्तर के साथ शहीद हुए। आज पूरे दुनिया में सिर्फ़ हुसैन हुसैन की सदा आ रही है।याज़ीद का कोई नाम लेने वाला नही बचा यजीद का काम था लोगों पर जुल्म सितम करना। मौलाना सैयद जाहिद हुसैन रिजवी ने मजलिस में खिताब करते हुए कहा कि अगर हम सब हकी की इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम के चाहने वाले हैं। तो ना ही किसी के मालो दौलत पर नजर रखें और ना ही किसी का माल गज्ब करें। उन्होंने कहा अगर किसी मोमिन ने सारी जिंदगी अल्लाह की दरगाह में अपने आप को मशगूल रखा हो और अगर उसकी नीयत किसी के माल और दौलत पर पड़ जाए तो यह समझ लो उसके सारी जिंदगी अल्लाह की बारगाह में मजगूलियत का कोई फायदा नहीं रहेगा। इमाम हुसैन अलैहिस्सलाम ने अपने हक और इंसाफ की लड़ाई के लिए 72 साथियों के साथ शहीद हो गए ज़ालिम यजीद की बय्यत नहीं की, दुनिया में दिखा दिया कि शहीद होकर भी जुल्मों सितम को खत्म किया जा सकता है। शोज़ खानी जनाब एहसन ने किया वही तंजीम रज़ा ने नाैहा पढ़ा कहती थीं रो रो जैनब अब्बास जल्द आओ सीने पे शिमर बैठा खंजर चला रहा है। अंजुमने अब्बासिया करारी के नौहख्वानो नौहा पढ़ा अज़ा का आगया मौसम तुम्हे ज़हरा दुआ देंगी,करो शब्बीर का मातम तुम्हे ज़हरा दुआ देंगी।






