लाश ले जाने को रात भर शव वाहन मांगते रहे परिजन, चिकित्सा स्टॉफ ने सीधे मुंह नहीं की बात

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कौशाम्बी

लाश ले जाने को रात भर शव वाहन मांगते रहे परिजन, चिकित्सा स्टॉफ ने सीधे मुंह नहीं की बात

-सुबह टहलने निकले मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने मुहैया कराया शव वाहन

-सड़क हादसे में घायल हुए व्यक्ति की मेडिकल कॉलेज में हुई थी मौत

हिमांशु भट्ट/मो. यासीन

कौशाम्बी: मेडिकल कॉलज में तैनात चिकित्सा स्टाफ की एक बड़ी लापरवाही फिर सामने आई है। इल्जाम है कि इन्होंने मरीज की मौत के बाद उसका शव घर ले जाने के लिए परिजनों को रात भर शव वाहन नहीं उपलब्ध कराया। परिवार वाले मिन्नत करते रहे। कोई उनसे सीधे मुंह बात करने तक को तैयार नहीं हुआ। सुबह टहलने निकले मुख्य चिकित्सा अधीक्षक ने मातहतों को कड़ी फटकार लगाई। साथ ही शव वाहन का भी इंतजाम करा दिया। हालांकि, उन्होंने दोषी स्टॉफ पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं की है।


सड़क हादसे में घायल, 25 वें दिन मौत

कड़ा धाम थाना क्षेत्र के बड़नावां गांव का सुरेमन पुत्र स्व. रामदास किसानी करता था। एक जून को वह साइकिल से कुछ सामान लेने बाजार जा रहा था। गुलामीपुर स्थित निजी गेस्ट हाउस के पास बाइक की टक्कर से घायल हो गया था। परिजनों ने उसे मेडिकल कॉलेज मंझनपुर में भर्ती कराया था। यहां 25 वें दिन मंगलवार की रात सांसें थम गईं। मौत के बाद परिवार वालों ने रात्रिकालीन ड्यूटी पर रहे चिकित्सक सहित अन्य स्टाफ से शव वाहन की मांग की। आरोप है कि रात भर शव वाहन उपलब्ध नहीं कराया गया।
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स्टाफ से मिन्नत करते रहे परिजन

पीड़ित कुनबे के लोग चिकित्सा स्टॉफ से मिन्नत करते रहे। कोई उनसे सीधे मुंह बात करने तक को तैयार नहीं था। मजबूरन परिवारीजन शव वार्ड के बाहर स्ट्रेचर पर रखकर आंसू बहाते रहे। परिजनों का कहना था कि सुबह मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसके शुक्ला नहीं आते तो शव वाहन नहीं मिलता। परिजनों ने स्टॉफ के व्यवहार पर कड़ी नाराजगी जाहिर की है।
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बहाना: वाहन में आ गई थी तकनीकी खराबी

मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एसके शुक्ला ने दोषी मातहतों को चेतावनी देकर छोड़ दिया है। चेताया है कि दोबारा इस तरह की लापरवाही की तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने स्टॉफ का बचाव करने को बहानेबाजी करते हुए कहा कि वाहन में खराबी आ गई थी। इसलिए रात को व्यवस्था नहीं हो सकी। सुबह वाहन उपलब्ध करा दिया गया।

Up Head Line
Author: Up Head Line

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